वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में तेजी से बदलाव हो रहे हैं. तेल की सप्लाई अब सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि कूटनीति और रणनीति का हिस्सा बन चुकी है. हाल के दिनों में कच्चे तेल को लेकर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, जिनका असर आयात, टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर पड़ रहा है. एक तरफ पुराने साझेदारों से दूरी बनाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ नए विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. इसी कड़ी में अब एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जो आने वाले महीनों में तेल आयात की दिशा बदल सकता है. यह कदम न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि व्यापार और वैश्विक दबावों के बीच संतुलन साधने की कोशिश भी माना जा रहा है.
रूसी तेल की जगह नया विकल्प
रॉयटर्स से जुड़े तीन सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. इसे रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है. यह पहल ऐसे समय में आई है, जब भारत ने रूस से तेल आयात में बड़ी कटौती का संकेत दिया है. अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि रूसी तेल से होने वाली कमाई को सीमित किया जाए, क्योंकि उसी से यूक्रेन युद्ध की फंडिंग हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले महीनों में रूसी तेल का आयात कई लाख बैरल प्रतिदिन तक घटाया जा सकता है.
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