एक और 'ऑपरेशन सिंदूर', पाकिस्तान का साथ देकर अब पछता रहा तुर्की और अजरबैजान, लग गया मोटा चूना

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Last Updated:January 31, 2026, 09:36 IST

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय पर्यटकों ने तुर्की और अज़रबैजान की यात्रा से दूरी बना ली. इसकी वजह यह है कि इन दोनों देशों ने भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया था.

पाकिस्तान का साथ देकर अब पछता रहा तुर्की और अजरबैजान, लग गया मोटा चूनाऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय पर्यटकों ने तुर्की और अज़रबैजान की यात्रा से दूरी बना ली है.

ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की और अजरबैजान अब अपने किए पर खूब पछतावा हो रहा होगा. दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय पर्यटकों ने इन दोंनों देशों से दूरी बना ली. CNN-News18 को मिले सालाना पर्यटन आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के मुकाबले जून से दिसंबर 2025 के बीच अज़रबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 63 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, इसी अवधि में तुर्की जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 34 प्रतिशत की गिरावट आई है.

प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जून से दिसंबर 2024 के बीच 1.53 लाख भारतीय पर्यटक अज़रबैजान गए थे, जबकि जून से दिसंबर 2025 की इसी अवधि में यह संख्या घटकर करीब 57,000 रह गई. तुर्की के मामले में भी यही स्थिति रही. जून से दिसंबर 2024 के बीच 2.05 लाख भारतीय पर्यटकों ने तुर्की की यात्रा की थी. लेकिन जून से दिसंबर 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 1.35 लाख रह गई. जून 2025 से हर महीने तुर्की और अज़रबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई.

मई 2024 तक अज़रबैजान भारत को अपने पर्यटन क्षेत्र के लिए प्रमुख लक्ष्य बाजारों में से एक मानता था. अज़रबैजान पर्यटन विभाग के अनुसार, ‘पर्यटकों की संख्या, होटल में ठहराव और खर्च लगातार बढ़ रहा था, और भारत अज़रबैजान आने वाले शीर्ष तीन देशों में शामिल था. 2024 में भारतीय पर्यटकों की संख्या 2,43,589 तक पहुंच गई थी, जो 2023 के 1,17,302 के मुकाबले 108 प्रतिशत की वृद्धि थी.’ लेकिन 2025 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.

भारतीय पर्यटकजून-दिसंबर 2024जून-दिसंबर 2025प्रतिशत में गिरावट
अजरबैजान1.53 लाख5700063%
तुर्की2.05 लाख1.35 लाख34%

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की कैसे की थी मदद?

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को 10 मई 2024 को रोक दिया था. इस दौरान यह भी सामने आया कि तुर्की और अज़रबैजान ने पाकिस्तान की खुलकर मदद की थी. पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ तुर्की में बने ड्रोन का इस्तेमाल किया था. इसके अलावा तुर्की ने कूटनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया. इसके बाद भारत में इन दोनों देशों के खिलाफ बहिष्कार की अपीलें शुरू हो गईं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले साल जून में साइप्रस की यात्रा के दौरान स्पष्ट संदेश दिया था. साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने निकोसिया के ऐतिहासिक केंद्र का दौरा किया, जहां उन्हें संयुक्त राष्ट्र की सीज़फायर लाइन दिखाई गई. यह रेखा द्वीप के लंबे समय से चले आ रहे विभाजन का प्रतीक है. राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स ने प्रधानमंत्री मोदी को उत्तरी साइप्रस का पहाड़ी इलाका भी दिखाया, जो 1974 से तुर्की के कब्जे में है.

हर मोर्चे पर पाकिस्तान के साथ खड़े ये देश

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल संसद में यह भी कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से केवल तीन देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया था, जबकि बाकी देशों ने भारत का समर्थन किया. प्रधानमंत्री मोदी जिन तीन देशों की बात कर रहे थे, उनमें तुर्की, चीन और अज़रबैजान शामिल थे. ये देश संयुक्त राष्ट्र और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर पाकिस्तान के साथ खड़े रहे हैं. जब भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में सटीक हमले किए थे, तब भी इन तीनों देशों ने पाकिस्तान के पक्ष में बयान दिए थे.

तुर्की के इस पाकिस्तान परस्त रुख के बाद भारत में बहिष्कार की मांग तेज हो गई थी. इसके बाद MakeMyTrip, EaseMyTrip और Cleartrip जैसे ट्रैवल पोर्टलों ने कहा था कि वे तुर्की के टूर पैकेज को प्रमोट नहीं करेंगे.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी तुर्की सरकार ने राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के नेतृत्व में पूरी तरह पाकिस्तान समर्थक रुख अपनाया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के साथ तनाव के समय समर्थन देने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने तुर्की जाकर राष्ट्रपति एर्दोआन का धन्यवाद भी किया था.

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अमन शर्मासीनियर एडिटर (पॉलिटिक्स)

CNN News18 में सीनियर एडिटर (पॉलिटिक्स) अमन शर्मा News18.com के ब्यूरो चीफ है. इन्हें PMO समेत देश की बड़ी राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है. राजनीतिक घटनाक्रमों पर पैनी पकड़ रखते हैं...और पढ़ें

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January 31, 2026, 09:36 IST

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