अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो क्या होगा? जानिए लोकतंत्र से लेकर ‘वेनेजुएला मॉडल’ तक 5 बड़े असर

2 hours ago

Trump Iran Attack Plan: अमेरिकी हमले के बाद ईरान में सत्ता बदलने से लेकर पूरे इलाके में अराजकता फैलने तक कई तरह के हालात बन सकते हैं. कुछ नतीजे उम्मीद से भरे हो सकते हैं, तो कुछ बेहद खतरनाक भी हो सकते हैं. अगर आखिरी वक्त पर कोई समझौता नहीं हुआ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया तो इसके असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहने वाले हैं बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया पर पड़ सकते हैं. 

बता दें अमेरिका की वायुसेना और नौसेना ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकानों, उसके अर्धसैनिक बल बासिज, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बना सकती है. ये हमले सीमित और सटीक बताए जा रहे हैं लेकिन इनके नतीजे पूरी तरह साफ नहीं हैं. तो आइए जानते हैं कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला कर देता है तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं.

ईरान में लोकतंत्र आ सकता है
पहले से कमजोर ईरानी सरकार गिर जाती है तो एक संभावना यह भी है कि देश धीरे-धीरे लोकतंत्र आ जाए, दुनिया से दोबारा जुड़े. यह सुनने में अच्छी लगती है लेकिन हकीकत में ऐसा होना मुश्किल माना जा रहा है. इराक और लीबिया में पश्चिमी देशों के दखल से तानाशाही तो खत्म हुई लेकिन उसके बाद सालों तक हिंसा और अफरा-तफरी चली. सीरिया का उदाहरण थोड़ा अलग है, जहां 2024 में लोगों ने अपने दम पर विद्रोह कर बशर अल-असद को सत्ता से हटाया और हालात कुछ हद तक संभले रहे थे.

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सरकार बचे लेकिन नीतियां नरम हो सकती 
एक और स्थिति को वेनेजुएला मॉडल कहा जा रहा है. इसमें सरकार बनी रहती है लेकिन उस पर दबाव इतना बढ़ जाता है कि उसे अपनी नीतियों में ढील देनी पड़ती है. ईरान के मामले में इसका मतलब होगा कि सरकार तो वही रहेगी जिससे आम लोग खुश नहीं होंगे लेकिन उसे मध्य पूर्व में हथियारबंद गुटों को समर्थन कम करना पड़ सकता है. साथ ही परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रोकने या सीमित करने होंगे और प्रदर्शनों पर सख्ती भी घटानी पड़ सकती है. जानकार ऐसा मानते हैं कि ईरान का नेतृत्व पिछले कई दशकों से बदलाव का विरोध करता रहा है इसलिए यह रास्ता भी आसान नहीं है.

सैन्य सरकार का आना
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे ज्यादा संभावना इसी बात की है कि मौजूदा सरकार गिर जाए. उसकी जगह सैन्य सरकार आ जाए. ईरान की सरकार भले ही जनता में अलोकप्रिय हो लेकिन उसके पास मजबूत सुरक्षा ढांचा है. जो मौजूदा सिस्टम को बचाने में लगा रहता है. अब तक विरोध प्रदर्शन इसलिए सफल नहीं हो पाए क्योंकि वे बड़े पैमाने पर नहीं फैल सके हैं, जबकि सत्ता में बैठे लोग ताकत और हिंसा का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते हैं. अगर अमेरिकी हमले के बाद हालात बिगड़े, तो देश पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के लोगों से बनी सख्त सैन्य सरकार का कब्जा हो सकता है.

अमेरिका और पड़ोसी देशों पर पलटवार
ईरान पहले ही कह चुका है कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब दिया जाएगा और उसकी उंगली ट्रिगर पर है. हालांकि ईरान अमेरिकी नौसेना और वायुसेना की ताकत का सीधा मुकाबला नहीं कर सकता है, लेकिन उसके पास मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा जखीरा है. इनमें से कई गुफाओं, पहाड़ों और जमीन के नीचे छिपे हुए हैं. खाड़ी क्षेत्र में बहरीन और कतर जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. ईरान जिन्हें अमेरिका का साथ देने वाला माने जैसे जॉर्डन या इजराइल जैसे देशों के अहम ढांचे पर भी हमला कर सकता है. 

खाड़ी में समुद्री बारूदी सुरंगें
एक पुराना लेकिन गंभीर खतरा यह भी है कि ईरान खाड़ी में समुद्री रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछा दे. 1980 से 1988 के इराक युद्ध के दौरान ईरान ऐसा कर चुका है. तब ब्रिटिश नौसेना को उन्हें हटाना पड़ा था. ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत एलएनजी और 20 से 25 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यहां जहाजों की आवाजाही रुकी तो दुनिया भर में व्यापार और तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा.

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