ईरान जंग: हर मिसाइल की कीमत करोड़ों में, 24 घंटे में 65,000 करोड़ स्वाहा, कब तक टिकेगा अमेरिका?

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हर मिसाइल की कीमत करोड़ों में, 1 दिन में 65000 करोड़ स्वाहा, कितना टिकेगा US

Last Updated:March 03, 2026, 20:26 IST

अमेरिका-ईरान संघर्ष के पहले हफ्ते में ही अरबों डॉलर का खर्च सामने आ गया है. पहले 24 घंटों में ही सैन्य कार्रवाई पर 65000 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. मिसाइल, लड़ाकू विमान और एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से खर्च तेजी से बढ़ रहा है. अब सवाल है कि अगर जंग लंबी चली तो अमेरिका कितने समय तक यह बोझ उठा पाएगा.

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ईरान युद्ध में अरबों डॉलर झोंक रहा अमेरिका. (Image:AI)

नई दिल्ली. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर समन्वित हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए. जैसे ही पहला मिसाइल दागा गया, खर्च का मीटर भी तेजी से दौड़ने लगा. शुरुआती 24 घंटों में ही अमेरिका का खर्च 65000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंका गया है. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक एक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की कीमत करीब 15 से 20 लाख डॉलर है. एसएम-3 इंटरसेप्टर 12 से 15 मिलियन डॉलर तक का पड़ता है, जबकि पैट्रियट मिसाइल एक बार दागने पर करीब 40 लाख डॉलर खर्च करवाती है. एफ-35 जैसे लड़ाकू विमान को एक घंटे उड़ाने का खर्च लगभग 36 हजार डॉलर और बी-2 स्टील्थ बॉम्बर का करीब 1.3 लाख डॉलर प्रति घंटे है. ऐसे में यदि दर्जनों या सैकड़ों मिसाइलें इस्तेमाल हों तो रकम तेजी से बढ़ती है.

एयरक्राफ्ट कैरियर से ड्रोन तक, तैनाती का बड़ा बिल
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में एक से दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए हैं. एक स्ट्राइक ग्रुप को पूरी तरह ऑपरेट करने का खर्च रोजाना 6 से 8 मिलियन डॉलर तक हो सकता है. इसके साथ डेस्ट्रॉयर, पनडुब्बियां और मिसाइल डिफेंस जहाज भी तैनात हैं. हवाई मोर्चे पर एफ-35, एफ-15, एफ-16 स्क्वॉड्रन, बी-2 और बी-52 बॉम्बर, रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट और निगरानी ड्रोन लगातार उड़ान भर रहे हैं. खाड़ी देशों में पैट्रियट और थाड जैसी रक्षा प्रणालियां सक्रिय की गई हैं. इतने बड़े ऑपरेशन में ईंधन, लॉजिस्टिक्स, सैनिकों की तैनाती और इंटेलिजेंस मिशनों का खर्च अलग से जुड़ता है. यही वजह है कि पहले दिन का 500 से 800 मिलियन डॉलर का अनुमान असामान्य नहीं माना जा रहा.

अगर युद्ध लंबा चला तो खर्च कहां पहुंचेगा?
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर यह संघर्ष एक महीने तक चला तो खर्च 6 से 15 अरब डॉलर तक जा सकता है. तीन महीने में यह 20 से 45 अरब डॉलर और छह महीने में 50 से 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. एक साल तक उच्च स्तर का युद्ध चला तो लागत 100 से 200 अरब डॉलर या उससे अधिक हो सकती है. इतिहास गवाह है कि लंबे युद्ध कितने महंगे साबित होते हैं. इराक युद्ध पर करीब 2 खरब डॉलर और अफगानिस्तान में लगभग 2.3 खरब डॉलर खर्च हुए. 9/11 के बाद के युद्धों का कुल बोझ 8 खरब डॉलर के आसपास आंका गया है, जिसमें दीर्घकालिक दायित्व भी शामिल हैं.

क्या अमेरिका इतना खर्च झेल सकता है?
कागज पर देखें तो अमेरिका के लिए शुरुआती कुछ अरब डॉलर संभालना मुश्किल नहीं है. वित्त वर्ष 2026 का रक्षा बजट लगभग 900 अरब डॉलर के आसपास है. लेकिन तस्वीर इतनी आसान भी नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज 35 खरब डॉलर से ऊपर है और सालाना घाटा 1.5 से 2 खरब डॉलर के बीच चल रहा है. ब्याज भुगतान अब रक्षा खर्च के बराबर पहुंचने लगे हैं. ऐसे में छोटा और सीमित हवाई अभियान तो वित्तीय रूप से संभव है, लेकिन 6 से 12 महीने का उच्च तीव्रता वाला संघर्ष बजट पर भारी दबाव डालेगा. अगर जमीनी कार्रवाई शुरू होती है तो लागत सैकड़ों अरब डॉलर या समय के साथ खरबों डॉलर तक जा सकती है.

असली खतरा बम नहीं, तेल का झटका
इस पूरे संकट में सबसे बड़ा आर्थिक जोखिम बमबारी नहीं बल्कि तेल आपूर्ति है. होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही होती है. यदि यहां रुकावट आती है और तेल की कीमत 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो अमेरिकी महंगाई 1-2 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है. तेल महंगा होने से मंदी का खतरा बढ़ेगा, पेंटागन का ईंधन खर्च भी उछलेगा और वैश्विक बाजारों को 100 अरब डॉलर से ज्यादा का झटका लग सकता है. इतिहास बताता है कि ऊर्जा संकट अक्सर युद्ध से ज्यादा लंबा असर छोड़ता है. फिलहाल अमेरिका इस संघर्ष का शुरुआती खर्च वहन कर सकता है, लेकिन लंबी जंग और तेल संकट का गणित सचमुच भारी पड़ सकता है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

March 03, 2026, 20:26 IST

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