World Thrift Day ( 31 Oct ) : थ्रिफ्टिंग में हैं फ्रेशर तो इन 5 प्लेटफॉर्म्स से करें शुरुआत

2 hours ago
 थ्रिफ्टिंग में हैं फ्रेशर तो इन 5 प्लेटफॉर्म्स से करें शुरुआत

By: Aditi Shukla | Updated Date: Fri, 30 Oct 2026 20:15:19 (IST)

हर साल 31 अक्टूबर को 'वर्ल्ड थ्रिफ्ट डे' मनाया जाता है। अगर आप इसमें कच्चें हैं तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद जरूर प्रो बन जाएंगे।

हर साल 31 अक्टूबर को 'वर्ल्ड थ्रिफ्ट डे' मनाया जाता है। एक वक्त था जब बचत का मतलब सिर्फ गुल्लक या बैंक में पैसे जमा करना होता था। लेकिन आज के जेन-जी और मिलेनियल्स के लिए 'बचत' का दायरा बहुत बड़ा हो गया है। आज बचत का मतलब सिर्फ पैसा बचाना नहीं बल्कि अपने एन्वायरनमेंट को बचाना भी है। इसी सोच ने जन्म दिया है 'थ्रिफ्टिंग' यानी प्री-लव्ड और सेकंड-हैंड कपड़ों की शॉपिंग ट्रेंड को। अगर आप इसमें कच्चें हैं तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद जरूर प्रो बन जाएंगे।


ऐसे एन्वायरनमेंट बचाता है थ्रिफ्टिंग

थ्रिफ्टिंग (सेकंड-हैंड कपड़े पहनना) सिर्फ पैसे नहीं बल्कि एन्वायरनमेंट भी बचाता है। यह इन 3 तरीकों से फायदा पहुंचाता है:

पानी की बचत: 'वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ एक सूती टी-शर्ट बनाने में लगभग 2,700 लीटर पानी खर्च होता है यह एक इंसान के ढाई साल के पीने के पानी के बराबर है। थ्रिफ्टिंग से आप नए कपड़ों की डिमांड घटाकर सीधे तौर पर इस पानी को बचाते हैं।

लैंडफिल वेस्ट में कमी: 'एलेन मैकआर्थर फाउंडेशन' के डेटा के मुताबिक दुनिया भर में हर सेकंड एक कचरे के ट्रक जितने कपड़े लैंडफिल में फेंक दिए जाते हैं या जला दिए जाते हैं। थ्रिफ्टिंग कपड़ों को कचरा बनने से रोकता है और उन्हें किसी और के वॉर्डरोब का हिस्सा बनाता है।

कार्बन फुटप्रिंट में कमी: 'संयुक्त राष्ट्र एन्वायरनमेंट कार्यक्रम' (UNEP) के मुताबिक ग्लोबल कार्बन एमिशन में लगभग 10% हिस्सा फैशन इंडस्ट्री का है। प्री-लव्ड (इस्तेमाल किए गए) कपड़े खरीदने से नई मैन्युफैक्चरिंग, रंगाई और ट्रांसपोर्टेशन का बोझ कम होता है जिससे ग्रीनहाउस गैसों का एमिशन तेजी से घटता है।


इंडिया के टॉप 5 थ्रिफ्टिंग ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स

अगर आप भी सस्टेनेबल फैशन अपनाना चाहते हैं तो भारत में मौजूद इन 5 ऑथेंटिक और शानदार ऐप्स/वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं:

1. FreeUp
यह भारत के सबसे बड़े और पॉपुलर थ्रिफ्टिंग ऐप्स में से एक है। यहां आप न सिर्फ प्री-लव्ड कपड़े खरीद सकते हैं बल्कि अपने पुराने कपड़े बेच भी सकते हैं। इस ऐप की सबसे खास बात इसकी 'कॉइन' सिस्टम है। आप अपने कपड़े बेचकर कॉइन्स कमा सकते हैं और उन कॉइन्स का इस्तेमाल करके दूसरे कपड़े फ्री में या बहुत कम कैश देकर खरीद सकते हैं।

2. CoutLoot
कौटलूट एक बेहतरीन कंज्यूमर-टू-कंज्यूमर सोशल कॉमर्स प्लेटफॉर्म है। अगर आपको स्ट्रीट फैशन, विंटेज जैकेट्स और बार्गेन करने का शौक है तो यह ऐप आपके लिए है। यहां आप सीधे सेलर से चैट कर सकते हैं और कपड़ों के दाम कम करवाकर शानदार डील्स क्रैक कर सकते हैं।

3. Relove
री-लव थ्रिफ्टिंग की दुनिया में एक बेहद अनोखा और प्रीमियम कॉन्सेप्ट है। यह कोई अलग से ऐप नहीं बल्कि एक टेक्नोलॉजी है जो सीधे ब्रांड्स की वेबसाइट से जुड़ी होती है (जैसे Suta, Snitch आदि)। अगर आपने किसी ब्रांड से कोई ड्रेस खरीदी है और अब उसे नहीं पहनना चाहते तो आप उसे उसी ब्रांड की वेबसाइट पर 'Relove' सेक्शन में जाकर री-सेल कर सकते हैं। यह 100% ऑथेंटिक है क्योंकि यह सीधे ब्रांड के जरिए होता है।

4. Bombay Closet Cleanse
अगर आप इंस्टाग्राम एस्थेटिक, विंटेज कोर्सट, 90s के ओवरसाइज्ड शर्ट्स और ट्रेंडी थ्रिफ्ट कपड़ों के दीवाने हैं तो यह प्लेटफॉर्म आपके लिए बेस्ट है। दो बहनों द्वारा शुरू किया गया यह वुमेन-लेड थ्रिफ्ट स्टोर वेबसाइट के जरिए पूरे भारत में डिलीवरी देता है। इनकी क्वालिटी चेक प्रोसेस बहुत सख्त है इसलिए कपड़े बिल्कुल नए जैसे लगते हैं।

5. Kiabza
कई लोगों को सेकंड-हैंड कपड़ों की क्वालिटी को लेकर डर रहता है। किआब्जा इस डर को दूर करता है। यह एक ऑथेंटिक प्लेटफॉर्म है जो सिर्फ टॉप ब्रांड्स (जैसे Zara, H&M, Mango) के प्री-ओन्ड कपड़े बेचता है। सेलर से कपड़े लेने के बाद इनकी टीम कपड़ों को सैनिटाइज करती है उनका क्वालिटी चेक करती है और फिर उन्हें वेबसाइट पर लिस्ट करती है।

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