Third Space : एक ऐसा कोना जो घर और ऑफिस की दुनिया से बिलकुल है अलग

1 hour ago

अगर आपसे पूछा जाए कि आप अपनी जिंदगी का सबसे ज्यादा वक्त कहां बिताते हैं तो शायद आपका जवाब होगा, 'घर या फिर ऑफिस/कॉलेज'। सुबह उठो काम पर जाओ वापस आओ और फिर सो जाओ। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर भूल जाते हैं कि घर (First Space) और काम (Second Space) के अलावा एक और दुनिया होती है जिसे सोशियोलॉजी और कल्चरल थ्योरी में 'Third Space' कहा जाता है। अगर आपको लगता है कि जिंदगी बोरिंग या स्ट्रेसफुल हो गई है तो शायद आपकी लाइफ में इस 'थर्ड स्पेस' की ही कमी है। क्या है यह यहां समझिए।


यह 'Third Space'

सोशियोलॉजिस्ट रे ओल्डनबर्ग ने अपनी किताब 'द ग्रेट गुड प्लेस' में सबसे पहले 'थर्ड प्लेस' का कॉन्सेप्ट दिया था। उनके मुताबिक

First Space : आपका घर जहां आप परिवार के साथ रहते हैं और आराम करते हैं। Second Space : आपका ऑफिस, स्कूल या कॉलेज जहां आप काम करते हैं या पढ़ाई करते हैं (जहां कॉम्पिटिशन और स्ट्रेस होता है)। Third Space : यह वो जगह है जो न तो आपका घर है और न ही आपका ऑफिस। यह एक ऐसी न्यूट्रल जगह है जहां आप सिर्फ अपनी खुशी के लिए जाते हैं। यहां कोई बॉस नहीं होता, कोई डेडलाइन नहीं होती और न ही घर की जिम्मेदारियां होती हैं।

'थर्ड स्पेस' ऐसा होता है

भारत में 'थर्ड स्पेस' की कोई कमी नहीं है बस हम उन्हें इस नाम से नहीं जानते। नुक्कड़ की चाय की टपरी जहां आप अनजान लोगों के साथ क्रिकेट या राजनीति पर चर्चा करते हैं वो एक थर्ड स्पेस है। कोई लाइब्रेरी, पड़ोस का पार्क, जिम, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, कॉफी शॉप, बार्बर शॉप या कोई बुक स्टोर ये सब थर्ड स्पेस के बेहतरीन एग्जांपल हैं।


एक अच्छे थर्ड स्पेस की खासियत

सब बराबर हैं: यहां यह मायने नहीं रखता कि आप कितने अमीर हैं या आपकी पोस्ट क्या है। चाय की टपरी पर एक ऑटो वाला और एक कॉरपोरेट मैनेजर एक ही बेंच पर बैठकर चाय पी सकते हैं।

बातचीत : यहां का काम सिर्फ बातें करना, हंसना, बहस करना और नए दोस्त बनाना होता है।

कोई टिकट नहीं: यहां जाने के लिए कोई भारी-भरकम फीस या मेंबरशिप नहीं चाहिए।


कल्चर और पहचान का 'थर्ड स्पेस'

'थर्ड स्पेस' सिर्फ कोई जगह नहीं बल्कि एक एहसास भी है। मशहूर थ्योरीस्ट होमी के। भाभा (Homi K। Bhabha) ने इसे 'दो अलग-अलग कल्चर्स के मिलने की जगह' बताया है। एग्जांपल के लिए जब आप हिंदी और इंग्लिश मिलाकर 'हिंग्लिश' बोलते हैं तो वह भाषा का थर्ड स्पेस है। जब आप अपनी फेवरेट साड़ी के नीचे आरामदायक स्नीकर्स पहनती हैं या फिर जब आप ठेले पर मसालेदार 'इंडो-चाइनीज' नूडल्स खाते हैं तो आप अंजाने में ही दो अलग-अलग दुनिया को मिलाकर एक नया 'थर्ड स्पेस' क्रिएट कर रहे होते हैं।


इसलिए गायब हो रहा है हमारा 'थर्ड स्पेस'

मेट्रो शहरों की बिजी लाइफस्टाइल, लंबी ट्रैवलिंग और वर्क-फ्रॉम-होम के कारण लोगों की जिंदगी सिर्फ बेड और लैपटॉप के बीच सिमट गई है। लोग डिप्रेशन, अकेलेपन और एंग्जायटी का शिकार इसलिए हो रहे हैं क्योंकि उनके पास अपना स्ट्रेस निकालने के लिए कोई 'थर्ड स्पेस' नहीं बचा है।

हालांकि आज की जेनरेशन ने अपना 'थर्ड स्पेस' इंटरनेट पर ढूंढ लिया है। वॉट्सऐप ग्रुप्स, गेमिंग कम्युनिटीज, इंस्टाग्राम या रेडिट (Reddit) जैसे प्लेटफॉर्म्स अब 'डिजिटल थर्ड स्पेस' बन गए हैं जहां लोग बिना अपनी असली पहचान बताए अपने जैसे इंट्रेस्ट वाले लोगों से जुड़ते हैं।


अपनी जिंदगी में थर्ड स्पेस ऐसे लाएं

अगर आपकी लाइफ में भी सिर्फ घर और ऑफिस ही बचे हैं तो आज ही अपना थर्ड स्पेस ढूंढें। हफ्ते में एक बार किसी पार्क में जाएं, कोई बुक क्लब जॉइन करें, किसी नई कैफे में अजनबियों से बात करें या बस अपनी कॉलोनी के नुक्कड़ पर 10 मिनट रुकें। यकीन मानिए यह छोटी सी जगह आपकी जिंदगी में ऐसा सुकून लाएगी जो कोई महंगी थेरेपी भी नहीं दे सकती।

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