बिहार में नाचने वाले को अक्सर नचनिया कहकर तंज कसा जाता है, चाहे वह कितना ही प्रतिभाशाली क्यों न हो. ऐसा ही दर्द नृत्य को जीवन मानने वाले विश्वबंधु ने झेला. 1930 में पटना में जन्मे विश्वबंधु को बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य का शौक था. वह स्वयं नाचते थे और दूसरों को भी सिखाते थे, लेकिन उस दौर में पुरुषों का नाचना गलत माना जाता था. जब वे नाचते, तो लोग उन पर पत्थर फेंकते थे. तानों से बचने के लिए उन्होंने घुंघरुओं की जगह समुद्री शंख पहनकर नृत्य किया. नृत्य को जिंदा रखने वाले विश्वबंधु अब पद्मश्री से सम्मानित होने वाले थे, लेकिन 30 मार्च 2025 को उनका निधन हो गया. उनकी पत्नी बिंदु कुमारी ने लोकल 18 को यह जानकारी दी.
Padamshri 2026: लोगों ने जिसे नचनिया कह कर मारा पत्थर, बिहार का वही बेटा अब पाने जा रहा है पद्मश्री
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