Job Loss: अचानक नौकरी चली जाए तो बजट कैसे मैनेज करें? नई जॉब मिलने तक आजमाएं ये टिप्स

1 hour ago

नई दिल्ली (Financial Management after Job Loss). नौकरी छूटना किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं होता, जहां अचानक ‘द एंड’ का बोर्ड लग जाता है और मंथली सैलरी का मेसेज आना बंद हो जाता है. इस दौर में फ्रिज की खाली बोतलें भी ताना मारती महसूस होती हैं और नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन किसी भारी कर्ज जैसा लगने लगता है. लेकिन घबराइए नहीं, यह ‘इंटरवल’ है, फिल्म अभी बाकी है! बजट मैनेज करना इस समय केवल कंजूसी नहीं, बल्कि ‘फाइनेंशियल वॉरियर’ की तरह खुद को बचाए रखने की कला है, जो आपको सड़क पर आने से पहले ही संभाल लेती है.

बेरोजगारी के इस ब्रेक को स्ट्रैटेजिक अवसर में बदलना जरूरी है. जब सैलरी का स्कोप बंद हो जाए तो खर्चों की बाल्टी में छेद ढूंढना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. अचानक आई यह शांति आपको डरा सकती है, लेकिन याद रखें कि दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य भी मंदी के दौर में बजट काटकर ही बचे रहे हैं. यह वक्त है अपनी फाइनेंशियल फिटनेस को परखने का और यह सीखने का कि कैसे न्यूनतम रिसोर्सेस में अधिकतम जीवन जिया जा सकता है. सॉलिड प्लान और थोड़ा सा अनुशासन आपको न केवल इस संकट से बाहर निकालेगा, बल्कि अगली नौकरी मिलने तक कॉन्फिडेंस को भी डगमगाने नहीं देगा.

जब सैलरी हो जाए ‘जीरो’ तो ऐसे बनें फाइनेंशियल हीरो

हर साल की तरह इस बार भी फरवरी-मार्च महीनों में कंपनियों में लेऑफ की लिस्ट तैयार की जाएगी. सैलरी बढ़ने से पहले हर एंप्लॉई इसी स्ट्रेस में डूबा रहता है कि कहीं अगला नंबर उसी का न हो. अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा है तो जानिए नौकरी छूटने के बाद कुछ समय तक अपना बजट कैसे मैनेज कर सकते हैं:

1. जरूरी है खर्चों का पोस्टमॉर्टम

जैसे ही नौकरी जाने की खबर मिले, अपने बैंक स्टेटमेंट का पिछले 3 महीनों का हिसाब निकालें. खर्चों को जरूरी (किराया, बिजली, राशन) और लग्जरी (बाहर घूमना, ऑनलाइन शॉपिंग, मल्टीपल सब्सक्रिप्शन) जैसी 2 कैटेगरी में बांटें. लग्जरी वाले हिस्से पर तुरंत कैंची चलाएं. इस समय आपकी प्राथमिकता केवल सिर पर छत और थाली में खाना होनी चाहिए.

2. इमरजेंसी फंड का सही इस्तेमाल

अगर आपने बुरे वक्त के लिए पैसा जोड़ा है तो यह उसे निकालने का सही समय है. लेकिन ध्यान रहे, इसे एक बार में खर्च नहीं करना है. अपनी कुल बचत को कम से कम 6 महीनों के हिसाब से बांटें. अगर फंड नहीं है तो अपनी पुरानी एलआईसी (LIC) या पीएफ (PF) के पैसों के बारे में एक्सपर्ट से सलाह लें, लेकिन इसे आखिरी ऑप्शन के तौर पर ही रखें.

3. लोन और बैंक से बढ़ाएं दोस्ती

अगर आपकी होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) चल रही है तो छिपने के बजाय बैंक मैनेजर से बात करें, कई बार बैंक आपकी स्थिति देख कर ‘लोन रिस्ट्रक्चरिंग’ या कुछ महीनों की मोहलत (Moratorium) दे देते हैं. क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें क्योंकि उसकी भारी ब्याज दरें आपको कर्ज के ऐसे दलदल में फंसा देंगी जहां से निकलना नामुमकिन होगा.

4. हेल्थ इंश्योरेंस को न दें ‘तलाक’

पैसे बचाने के चक्कर में अक्सर लोग इंश्योरेंस की किस्तें रोक देते हैं. बजट मैनेजमेंट के लिए यह सबसे ज्यादा रिस्की तरीका हो सकता है. नौकरी नहीं होने पर अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए तो वह आपकी बची-खुची पूंजी भी साफ कर देगी. इसलिए एक बेसिक स्वास्थ्य बीमा चालू रखना आपकी और आपके करीबियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है.

5. स्किलिंग और साइड हसल पर फोकस

खाली बैठकर चिंता करने से अच्छा है कि अपनी स्किल्स को अपग्रेड करें. आज के दौर में कई फ्रीलांसिंग वेबसाइट्स हैं जहां आप अपनी काबिलियत के दम पर कुछ हजार रुपये आसानी से कमा सकते हैं. इसके लिए आपको किसी ऑफिस जाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. यह छोटी आय आपके बिजली या इंटरनेट के बिल भर सकती है, जिससे आपकी मुख्य बचत सुरक्षित रहेगी.

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