नई कार खरीदने का एक्साइटमेंट शोरूम में तब बढ़ जाता है, जब डीलर बहुत अट्रैक्टिव और 'कम EMI' वाला लोन प्लान आपके सामने रखता है। फर्स्ट लुक में डील बजट-फ्रेंडली लगती है और हम बिना ज्यादा सोचे पेपर्स पर साइन कर देते हैं। इंडिया में कार बायर्स का पूरा फोकस इसी बात पर होता है कि मंथली इंस्टॉलमेंट कम कैसे हो। लेकिन रियलिटी यह है कि 'लो EMI' लॉन्ग टर्म में लोन को हैवी बना देती है जिससे ड्रीम कार आउट-ऑफ-बजट और एक्सपेंसिव हो जाती है। यहां जानिए कार फाइनेंस से जुड़ी उन मिस्टेक्स को जो आपके बजट पर भारी पड़ती हैं और जानते हैं इनसे बचने के स्मार्ट तरीके।
कार लोन की 5 कॉमन मिस्टेक्स और स्मार्ट सॉल्यूशंस
जब आप लोन ले रहे हों, तो इन बुनियादी गलतियों और उनके वित्तीय प्रभाव को समझना बेहद जरूरी है:
1. जरूरत से ज्यादा लोन
फाइनेंशियल लॉस: बायर्स एसेसरीज और एक्सपेंसिव फीचर्स का कॉस्ट भी लोन अमाउंट में एड करवाते हैं। लोन अमाउंट बड़ा होने से इंटरेस्ट भी ज्यादा लगेगा।
स्मार्ट तरीका: कार की कॉस्ट का मैक्सिमम हिस्सा पॉकेट से (डाउन पेमेंट) पे करें. अननेसेसरी फीचर्स के लिए लोन न बढ़ाएं।
2. लो डाउन पेमेंट
फाइनेंशियल लॉस: 'जीरो डाउन पेमेंट' ऑफर्स स्टार्टिंग में कैश सेव करते हैं लेकिन प्रिंसिपल अमाउंट और फ्यूचर की EMI दोनों ही काफी बढ़ जाते हैं।
स्मार्ट तरीका: डाउन पेमेंट को बर्डन न समझें. बैलेंस मेंटेन करें जिससे लोन अमाउंट कम रहे और इमरजेंसी फंड के लिए बैलेंस बचा रहे.
3. लॉन्ग टेन्योर सिलेक्ट करना
-फाइनेंशियल लॉस: 7 साल का लोन सिलेक्ट करने पर EMI कम होती है, लेकिन कार की कीमत क्लियर करने तक टोटल इंटरेस्ट कई गुना पे करना पड़ता है।
स्मार्ट तरीका: लॉन्ग टेन्योर हर महीने रिलीफ देता है, लेकिन ओवरऑल एक्सपेंस बढ़ाता है. रिपेमेंट कैपेसिटी के अकॉर्डिंग शॉर्टेस्ट टेन्योर वाला लोन सिलेक्ट करें।
4. ऑफर्स कंपेयर न करना
फाइनेंशियल लॉस: डीलर जो फाइनेंस ऑफर देता है, कस्टमर्स उसे फाइनल मान लेते हैं। इस जल्दबाजी में आप लो-इंटरेस्ट रेट वाले दूसरे बेटर ऑप्शंस मिस कर देते हैं।
स्मार्ट तरीका: सिबिल (CIBIL) स्कोर चेक करें और लोन फाइनल करने से पहले 2-3 अलग-अलग बैंकों या NBFCs के ऑफर्स का कंपैरिजन जरूर करें।
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5. टोटल ओनरशिप कॉस्ट इग्नोर करना
फाइनेंशियल लॉस: बायर्स केवल EMI को कार का मेन एक्सपेंस मानते हैं, जबकि फ्यूल, मेंटेनेंस और इंश्योरेंस प्रीमियम पॉकेट पर एक्स्ट्रा फाइनेंशियल बर्डन डालते हैं।
स्मार्ट तरीका: कार का बजट डिसाइड करते समय सिर्फ EMI ही नहीं, बल्कि इस डेली रनिंग कॉस्ट को भी मंथली इनकम के साथ कैलकुलेट करें.
हिडन चार्जेस और की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS) की इम्पोर्टेंस
कस्टमर्स का फोकस सिर्फ इंटरेस्ट रेट पर होता है और वे लीगल पेपर्स बिना पढ़े साइन कर देते हैं। प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्जेस, इंश्योरेंस कॉस्ट और फोरक्लोजर (समय से पहले लोन क्लोज करने के चार्जेस) लोन को एक्सपेंसिव बनाते हैं।
यहीं की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS) आपकी हेल्प करता है। RBI की गाइडलाइंस के अकॉर्डिंग, लेंडर्स को लोन एग्रीमेंट से पहले KFS प्रोवाइड करना मैंडेटरी है। इस डॉक्यूमेंट में टोटल लोन अमाउंट, एक्चुअल इंटरेस्ट रेट, एनुअल परसेंटेज रेट (APR), प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट पेनाल्टी और प्री-पेमेंट चार्जेस क्लियर लिखे होते हैं। इसे केयरफुली रीड करके एनालाइज कर सकते हैं कि कार लोन रियलिटी में कितना महंगा पड़ रहा है।
पॉकेट-फ्रेंडली कार लोन के 4 स्मार्ट स्टेप्स
1. 20-4-10 रूल फॉलो करें: कार की ऑन-रोड प्राइस का 20% डाउन पेमेंट करें, लोन टेन्योर 4 साल से ज्यादा न रखें और टोटल EMI मंथली इनकम के 10-15% से ज्यादा न हो।
2. 2-3 बैंक ऑफर्स कंपैरिजन: कार डीलर के ऑफर पर डिपेंड न रहें। इंटरेस्ट रेट में 0.5% से 1% का डिफरेंस भी 5 साल के लोन में हजारों रुपए आसानी से सेव कर सकता है।
3. KFS केयरफुली रीड करें: अप्रूव करने से पहले बैंक से फी-शेड्यूल (KFS) की रिटन कॉपी डिमांड करें. एक्स्ट्रा फीस और प्री-पेमेंट क्लॉजेस समझें ताकि फ्यूचर में लोन क्लोज करने पर हैवी पेनाल्टी न लगे।
4. टोटल रिपेमेंट कैलकुलेशन: 'लो EMI' पर एग्री करने के बजाय, यह खुद कैलकुलेट करें कि लोन के एंड में आप बैंक को टोटल कितना अमाउंट (प्रिंसिपल और टोटल इंटरेस्ट) फाइनली पे कर रहे हैं।

1 hour ago
