मंडे की सुबह,हाथ में कॉफी का मग और दिमाग में वही पुरानी टेंशन, लाइफ में कुछ भी सही क्यों नहीं चल रहा? कभी कोई पुराना और प्यारा रिश्ता अचानक टूट जाता है, कभी जॉब का स्ट्रेस हावी हो जाता है तो कभी ऐसा लगता है कि आपके सारे प्लान्स पर पानी फिर गया है। ऐसे मोमेंट्स में लो-फील करना बहुत नॉर्मल है। हमें लगने लगता है कि हमारी जिंदगी बर्बाद हो रही है और हम अंदर से टूट रहे हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है? अगर हम नजरिया बदलें तो पाएंगे कि कभी-कभी जिंदगी हमें तोड़ नहीं रही होती बल्कि वह हमें हमारे पुराने वर्जन से जबरदस्ती बाहर निकाल रही होती है। इसे फेमस फिलॉसफर जोसेफ कैंपबेल की फिलॉसफी से समझें।
Hero&यs Journey का असली फंडा
फेमस फिलॉसफर जोसेफ कैंपबेल का Hero&यs Journey का एक बहुत दिलचस्प विचार है। कैंपबेल ने दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियों, माइथोलॉजी और कहानियों पर रिसर्च की और एक अजीब सा पैटर्न नोटिस किया। उन्होंने पाया कि दुनिया के किसी भी हीरो की कहानी तब शुरू नहीं होती जब उसकी जिंदगी में सब कुछ परफेक्ट और चिल चल रहा होता है। भगवान राम हों, गौतम बुद्ध हों, ग्रीक माइथोलॉजी के ओडिसियस हों या हॉलीवुड का कोई भी सुपरहीरो इन सबकी कहानी में एक ऐसा टर्निंग प्वॉइंट आता है जब उनकी पुरानी, जानी-पहचानी और कंफर्टेबल दुनिया अचानक से बिखरने लगती है। उन्हें अपना कम्फर्ट जोन छोड़ना पड़ता है। यही वह पल होता है जब वे आम इंसान से हीरो बनने के सफर पर निकलते हैं।
कौन थे जोसेफ कैंपबेल
जोसेफ कैंपबेल अमेरिका के एक बहुत फेमस प्रोफेसर, राइटर और माइथोलॉजिस्ट थे। उनकी सबसे फेमस किताब द हीरो विद अ थाउजेंड फेसेस ने दुनिया भर की कहानियों का एक यूनिवर्सल स्ट्रक्चर पेश किया था जिसे मोनोमिथ कहा जाता है।
कैंपबेल की इस फिलॉसफी का असर पॉप कल्चर पर इतना गहरा था कि हॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर जॉर्ज लुकास ने अपनी एपिक फिल्म स्टार वॉर्स की स्क्रिप्ट कैंपबेल की इसी थ्योरी को बेस मानकर लिखी थी। कैंपबेल का मानना था कि मिथकों के ये हीरो कोई और नहीं बल्कि हमारे ही अंदर छिपे इंसान का रिफ्लेक्शन हैं। हर इंसान अपनी जिंदगी की कहानी का हीरो है।
मेरे साथ ही ऐसा क्यों? से सवाल बदलिए
हम असल जिंदगी में भी बिल्कुल वैसा ही करते हैं जैसा कैंपबेल की कहानियों में होता है। जब हमारा कोई रिश्ता टूटता है, कोई नौकरी छूटती है या कोई सपना अधूरा रह जाता है तो हमारा पहला रिएक्शन होता है, मैं ही क्यों? मेरी लाइफ बर्बाद हो गई।
लेकिन अगर आप इसे कैंपबेल के नजरिए से देखें तो सवाल पूरी तरह बदल जाता है। तब आप यह नहीं पूछते कि मेरे साथ ये बुरा क्यों हुआ? बल्कि आप यह सोचते हैं कि क्या मेरी पुरानी जिंदगी अब मेरे लिए छोटी पड़ने लगी थी? हीरो बनने का मतलब किसी खास इंसान का होना या कोई सुपरपावर होना नहीं है। इसका सीधा सा मतलब है अपने पुराने वर्जन की केंचुली उतार फेंकना और एक नए रूप में सामने आना।
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क्राइसिस कोई एंड नहीं एक दहलीज है
हर क्राइसिस या ब्रेकडाउन का मतलब आपकी कहानी का End नहीं होता। कभी-कभी वह सिर्फ एक दहलीज होता है। एक ऐसा दरवाजा जिसे पार करके आपको एक ऐसी जिंदगी की ओर जाना होता है जहां पुराने रूप और पुरानी आदतों से काम नहीं चलेगा। जब पुरानी चीजें टूटती हैं तभी तो नई और बेहतर चीजों के लिए जगह बनती है।
तो इस मंडे जब आप अपने हफ्तों पुराने स्ट्रेस या लाइफ के किसी क्राइसिस से जूझ रहे हों तो खुद को एक 'विक्टिम' मानना बंद करें. आप अपनी लाइफ की मूवी के 'मेन कैरेक्टर' हैं. गहरी सांस लें अपनी कॉफी का घूंट पिएं और याद रखें यह आपकी कहानी का 'द एंड' नहीं है यह तो बस आपके 'मेन कैरेक्टर एरा' की शुरुआत है.

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