Who is Gustavo Petro: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद यूएस आर्मी ने आज अचानक वेनेजुएला पर स्ट्राइक कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अरेस्ट कर लिया. गिरफ्तारी के बाद दोनों को अमेरिका ले जाया गया है, जहां पर अब उनके खिलाफ केस चलाने की तैयारी की जा रही है. किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह उसकी राजधानी से उठाए जाने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप इतने से रुक जाएंगे या फिर उन्होंने अगला टारगेट सेट कर लिया है. इस सफलता के बाद क्या अब वे ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई को भी इसी तरह उठाने का आदेश देंगे या उनके मन में कुछ और ही चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप की जंग की यह सनक यहीं रुकने वाली नहीं है. अब उनकी नजर एक और राष्ट्रपति पर पड़ गई है. वह राष्ट्रपति भी यूएस का धुर विरोधी रहा है.
ट्रंप ने ढूंढ लिया है अगला टारगेट
सहयोगी वेबसाइट WION की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के निशाने पर अब लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो हैं. निकोलस मादुरो की तरह उन्हें भी बलपूर्वक उठाकर लाने के लिए अमेरिका एक बड़ा कदम उठा चुका है. इसके तहत अक्टूबर 2025 में उसने पेट्रो का राष्ट्रपति का दर्जा खत्म कर उनका नाम ड्रग माफिया की लिस्ट में डाल दिया था. इस लिस्ट में पेट्रो के अलावा उनकी पत्नी और उनके बेटे का नाम भी शामिल है.
इस बात को कानूनी भाषा में समझें तो अमेरिका की नजर में गुस्तावो पेट्रो अब कोई सम्मानित राष्ट्रपति नहीं है. इसके बजाय वे अब ऐसा आदमी बन चुके हैं, जो ड्रग कारोबार से जुड़ा माना जा रहा है. इस लिस्ट में पेट्रो का नाम डालने के साथ ही अमेरिका में मौजूद उनकी सारी संपत्ति फ्रीज कर दी गई है. साथ ही अमेरिकी कंपनियों को उनके परिवार से किसी भी तरह का लेन-देन करने से रोक दिया गया है. ये वही तरीका है जो पहले मादुरो पर आजमाया गया था.
'पेट्रो' प्लान पर आगे बढ़ रहा अमेरिका
कोलंबियाई राष्ट्रपति को दूसरा झटका खुद उनके बेटे से लगा है. उनके बेटे निकोलस पेट्रो ने गिरफ्तारी के बाद कबूल किया कि उनके पिता के चुनाव में ड्रग माफिया का पैसा लगा था. उसने बताया कि ये पैसा 'मार्लबोरो मैन' नाम के कुख्यात तस्कर ने दिया था. जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर चुनावों में हेराफेरी की गई.
अमेरिका की नजर में पेट्रो की 'टोटल पीस' नीति भी शक के घेरे में है. दावा है कि इस नीति के नाम पर उन्होंने देश में बड़े-बड़े ड्रग माफियाओं की गिरफ्तारी रोक दी. इसके बदले में माफियाओं ने सरकार को करोड़ों डॉलर दिए, जिससे उन्हें “शांति प्रक्रिया” में शामिल कर लिया जाए. यानी शांति के नाम पर ड्रग माफिया को सरकारी सुरक्षा मिल गई.
यूएस को खटकता है पेट्रो का इतिहास
अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि पेट्रो के शासनकाल के दौरान कोलंबिया में नशीले पदार्थ कोका की खेती भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. लेकिन माफियाओं पर कार्रवाई के बजाय सेना और पुलिस को चुप बैठने को कहा गया. अमेरिका का आरोप है कि पेट्रो ने न केवल इस काले धंधे से आंखें मूंदीं बल्कि यूएस में ड्रग महामारी को फैलाने में बढ़ावा भी दिया.
गुस्तावो का अपना एक पुराना इतिहास भी है, जो यूएस को बहुत खटकता है. बताया जाता है कि वे M-19 नाम के एक समूह से जुड़े रहे हैं. इस समूह का रिश्ता कभी पाब्लो एस्कोबार जैसे ड्रग माफिया से रहा था. भले ही पेट्रो उस वक्त जेल में थे, लेकिन अमेरिका मानता है कि आज भी वे उसी सोच को आगे बढ़ा रहे हैं. यानी कि तस्करों को अमेरिका के हवाले न करना.
गुस्तावो भी समझ रहे बदलती हवा का रुख
चूंकि अब मादुरो को अरेस्ट करके यूएस आर्मी अमेरिका ले जा चुकी है. ऐसे में पेट्रो के खिलाफ भी कार्रवाई के कयास लगने लगे हैं. गुस्तावो पेट्रो भी इस हकीकत को बखूबी समझ रहे हैं. इसीलिए जैसे ही अमेरिकन सेना ने वेनेजुएला के खिलाफ बमबारी की, पेट्रो ने अपनी फौज वेनेजुएला बॉर्डर पर भेज दी. साथ ही खुले तौर पर इस ऑपरेशन की आलोचना कर इसे साम्राज्यवादी हमला बता दिया. इसलिए वॉशिंगटन में अब यह माना जा रहा है कि मादुरो के बाद अगला बड़ा टारगेट शायद गुस्तावो पेट्रो ही हों.

20 hours ago
