‘नितिन भाई साहब’ नहीं...BJP में पद ऊपर व्यक्ति नहीं, अब संबोधन में भी अनुशासन

16 hours ago

Last Updated:January 04, 2026, 15:15 IST

Nitin Nabin BJP Working Presiden: राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद भारतीय जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि अब अपनापन नहीं, अनुशासन की भाषा चलेगी. ‘नितिन भाई साहब’ जैसी अनौपचारिकता पर विराम लगाते हुए भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि संगठन में सबसे ऊपर पद की गरिमा है.

‘नितिन भाई साहब’ नहीं...BJP में पद ऊपर व्यक्ति नहीं, अब संबोधन में भी अनुशासननितिन नबीन की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्ति से संगठन में अनुशासन और पद की गरिमा को प्राथमिकता दी गई है,

पटना. अब माननीय कार्यकारी अध्यक्ष जी बोलिए… राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद भाजपा ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दे दिया है कि अब रिश्तों से ज्यादा पद की गरिमा मायने रखेगी.‘नितिन भाई साहब’ जैसे संबोधनों की जगह अब प्रोटोकॉल के तहत सम्मानजनक संबोधन अनिवार्य होगा. पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने सभी स्तरों के नेताओं को यह सलाह दी है कि बैठकों, मंचों और आधिकारिक संवाद में प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए. निर्देश में साफ कहा गया है कि पुराने निजी संबंध या वरिष्ठता के आधार पर अनौपचारिक संबोधन से बचा जाए. इसके साथ ही पार्टी ने गुटबाजी पर भी कड़ा रुख अपनाया है.

संगठन का मानना है कि आपसी खेमेबाजी न केवल अनुशासन को कमजोर करती है, बल्कि पार्टी की सामूहिक छवि और चुनावी तैयारियों को भी नुकसान पहुंचाती है. इसी वजह से अब यह साफ कर दिया गया है कि पद सर्वोपरि है और संगठन से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं. बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर नितिन नबीन की नियुक्ति 14 दिसंबर, 2025 से प्रभावी हुई है. वे बिहार सरकार में मंत्री और पांच बार विधायक भी रह चुके हैं और अब संगठनात्मक अनुभव और नेतृत्व क्षमता के लिए पार्टी की पसंद बने हैं. पार्टी के संसदीय बोर्ड ने उनकी नियुक्ति को संगठन की मजबूती और आगामी राजनीतिक लड़ाइयों से निपटने के लिए तैयार किए जाने का संकेत बताया है.

नया लीडर, नई कार्यशैली

पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन की नियुक्ति जेपी नड्डा के अनुशासन और संगठनात्मक माहौल को आगे ले जाने का एक बड़ा कदम है. इस बदलाव से स्पष्ट संदेश यह भी मिल रहा है कि पार्टी पद की गरिमा और संगठनात्मक अनुशासन को महत्वपूर्ण मानती है. संगठन के भीतर नबीन की नियुक्ति को नए सत्र का आरंभ माना जा रहा है. वे पार्टी को और अधिक संगठित, अनुशासित और कार्यकुशल बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं. वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय काडर को निर्देश दिया गया है कि वे बैठकों और चर्चाओं में पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार रखें, जिससे संगठनात्मक अनुशासन सशक्त बने.

युवा नेतृत्व और बदलाव का संकेत

जानकारों का मानना है कि नितिन नबीन का यह पद केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा है, जिससे पार्टी आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियों में अधिक केंद्रीत हो सके. दरअसल, बीजेपी में नितिन नबीन की नियुक्ति सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि संगठन में अनुशासन, स्पष्ट नेतृत्व और युवा ऊर्जा के समन्वय का संकेत है. यह बदलाव पार्टी की रणनीतिक दिशा को मजबूत करने के साथ ही संगठनात्मक कार्यशैली को सुव्यवस्थित बनाने की कोशिश भी है. पार्टी मुख्यालय से लेकर बूथ स्तर तक यह संदेश पहुंच चुका है कि अब अनुशासनहीनता स्वीकार्य नहीं होगी और सभी काडर पद की गरिमा के साथ काम करें. इससे पार्टी की साख, कार्यक्षमता और चुनावी तैयारी दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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Vijay jha

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First Published :

January 04, 2026, 15:15 IST

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‘नितिन भाई साहब’ नहीं...BJP में पद ऊपर व्यक्ति नहीं, अब संबोधन में भी अनुशासन

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