80 खंभों के नीचे क्या छुपा है? खुदाई में जहां की जमीन बोलती है खुद अपना इतिहास

17 hours ago

Last Updated:January 04, 2026, 14:01 IST

Bihar Archaeological Remains Site : हाल में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के कुम्हरार स्थित मौर्यकालीन अस्सी स्तम्भों युक्त विशाल कक्ष का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों एवं विभिन्न दृश्यावलियों का अवलोकन करते हुए इसके संरक्षण, विकास और सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. इसके साथ ही एक बार फिर यह पुरातात्विक स्थल चर्चा में आ गया जहां करीब 113 वर्ष पहले पहली बार खुदाई हुई थी.

बिहार की राजधानी पटना के कुम्हरार इलाके में प्राचीन शहर पाटलिपुत्र के अवशेष मिले हैं जो मूक रहकर भी मौर्य काल की शानदार विरासत को बताते हैं. यह स्थल 1912 से खुदाई का केंद्र रहा है और हाल ही में 2024 में नई खुदाई शुरू हुई है. यहां मिली दुर्लभ संरचनाएं और वस्तुएं इतिहासकारों को मौर्य साम्राज्य की उन्नत तकनीक और संस्कृति की झलक देती हैं.

<br />कुम्हरार अब एक हेरिटेज पार्क है, जहां पर्यटक प्राचीन इतिहास से रूबरू होते हैं. कुम्हरार की पहली बड़ी खुदाई 1912-1915 में पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (एएसआई) के डी.बी. स्पूनर ने की थी. इसमें 80 खंभों वाला हॉल मिला जो सम्राट अशोक के महल का हिस्सा माना जाता है. बाद में 1951-1955 में आगे की खुदाई हुई जिसमें आरोग्य विहार जैसी संरचनाएं सामने आईं.

<br />कुम्हारार वह जगह है जहां सम्राट अशोक के शासन काल में तृतीय बौद्ध संगीति (249 ई.पू.) हुई थी. इसकी अध्यक्षता तिस्स मोग्गलीपुत्त ने की थी. माना जाता है कि इस संगीति में त्रिपिटक को अंतिम रुप दिया गया था. माना जाता है कि अशोक ने सारनाथ का स्तंभ लेख इसकी संगीति के बाद लिखवाऐ थे.

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जहां आज कुम्हरार के अवशेष हैं वहां पर कभी शानदार नियोजित नगर (Planned City) हुआ करता था. आज कुछ अवशेष यहां देखे जा सकते हैं. कुम्हरार का महल लकड़ी का बना हुआ था. भवन योजना कुछ इस तरह की थी कि 32 फीट ऊंचाई और 9 फीट गहराई वाले विशाल पत्थरों के पिलर पर इमारत खड़ी थी. पर छत के लिए लकड़ी का इस्तेमाल किया गया था.

कुम्हरार में महान चिकित्सक धनवंतरि के आरोग्य विहार (धनवंतरि का क्लिनिक ) होने का भी प्रमाण मिलता है. यहां खुदाई में एक मृदभांड का टुकडा मिला है जिस पर धनवंतरि का नाम लिखा है. यानी चौथी पांचवी शताब्दी में यहां समृद्ध चिकित्सालय था.

वर्ष 2024 में एएसआई ने मौर्य काल की असेंबली हॉल की नई खुदाई शुरू की जो 600 ईसा पूर्व तक के अवशेषों को उजागर कर रही है. यह खुदाई पटना रेलवे स्टेशन से 5 किमी पूर्व में हुई और मौर्य काल (322-185 ईसा पूर्व) के प्रमाण देती है.

खुदाई में कई महत्वपूर्ण वस्तुएं मिलीं. सबसे प्रमुख है 80 खंभों वाला हाइपोस्टाइल हॉल, जिसमें पॉलिश्ड सैंडस्टोन के खंभे हैं. इसके अतिरिक्त, टूटा हुआ अशोक स्तंभ, ईंट की दीवारें, पत्थर के टुकड़े और गुप्त काल की संरचनाएं मिलीं.

आरोग्य विहार 4वीं-5वीं शताब्दी ईस्वी का अस्पताल-सह-मठ है. आरोग्य विहार दुर्लभ क्योंकि यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली का प्रमाण है, जहां ईंट की संरचनाएं स्वास्थ्य सुविधाओं को दर्शाती हैं.

इसके अतिरिक्त पाटलिपुत्र गैलरी में कला, वास्तुकला और कलाकृतियां प्रदर्शित हैं जो प्राचीन विरासत की समृद्धि दिखाती हैं. यहां मिले अवशेष मौर्य काल की राजधानी पाटलिपुत्र की झलक देते हैं जहां चंद्रगुप्त और अशोक जैसे शासकों का शासन था.

कुम्हरार की सबसे दुर्लभ खोज 80 खंभों वाला हॉल है जो मौर्य वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है. ये खंभे पॉलिश्ड सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर)से बने हैं जो पर्सेपोलिस पैलेस जैसे दिखते हैं और उन्नत इंजीनियरिंग दर्शाते हैं.

यह हॉल असेंबली या महल का हिस्सा था, जहां लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर बैठकर बैठकें होती थीं. दुर्लभ क्योंकि मौर्य काल की ऐसी संरचनाएं बहुत कम बची हैं.टूटा अशोक स्तंभ भी दुर्लभ है जो बौद्ध प्रभाव और शासन की प्रतीक है.

ये वस्तुएं 2,000 साल पुरानी हैं और जलमग्न होने से बच गईं जो प्राचीन भारत की तकनीकी श्रेष्ठता बताती हैं. कुम्हरार पार्क में अवशेषों का संरक्षण हो रहा है, लेकिन अब पर्यटकों के लिए खुला है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में इसके रखरखाव पर जोर दिया है.

इतिहासकारों का मानना है कि ये खोजें प्राचीन भारत की शक्ति और कला को समझने में मदद करती हैं. आने वाले समय में नई खुदाई से और राज खुल सकते हैं, जो पटना को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत बनाएगी. तस्वीर उत्खनित टेराकोटा मुहर की है.

First Published :

January 04, 2026, 14:01 IST

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