Last Updated:January 04, 2026, 11:03 IST
Jammu-Kashmir Weather: उत्तर और पूर्वी भारत के तमाम राज्यों में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है. हालांकि, श्रीनगर में अभी हिमपात का इंतजार है.
चिल्लई कलां के दौरान श्रीनगर में बर्फबारी नहीं हो रही है. पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों में भी इससे निराशा है.श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड के बावजूद इस बार अब तक भारी बर्फबारी नहीं होने से चिंता बढ़ने लगी है. रविवार को भी घाटी में न्यूनतम तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से कई डिग्री नीचे दर्ज किया गया, लेकिन मौसम शुष्क बना रहा. 21 दिसंबर 2025 से शुरू हुए चिल्लई कलां के दौर में आमतौर पर भारी बर्फबारी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार घाटी के मैदानी इलाकों में अब तक सीजन की पहली बर्फ भी नहीं पड़ी है. इससे स्थानीय लोगों के साथ ही टूरिस्ट्स में भी निराशा है.
शनिवार रात आसमान आंशिक रूप से साफ रहा, जिसके चलते पूरी कश्मीर घाटी में रात का तापमान शून्य से नीचे चला गया. मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल मैदानी इलाकों में बर्फबारी की संभावना कम है और ठंड के साथ सूखा मौसम बना रह सकता है. श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में पारा माइनस 6.5 डिग्री और पहलगाम में माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. जम्मू संभाग में भी ठंड का असर साफ दिखाई दिया. जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 7 डिग्री, बटोटे में 1.9 डिग्री, बनिहाल में माइनस 0.9 डिग्री और भद्रवाह में माइनस 1.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. हालांकि तापमान में गिरावट के बावजूद, बर्फबारी न होने से सर्दियों की सामान्य तस्वीर इस बार अलग नजर आ रही है.
चिल्लई कलां, जो कश्मीर में 40 दिनों के सबसे कड़े शीतकालीन दौर के रूप में जाना जाता है, 30 जनवरी को समाप्त होगा. इस अवधि के दौरान आमतौर पर भारी हिमपात होता है, जिससे पहाड़ों में बर्फ का बड़ा भंडार जमा हो जाता है. लेकिन इस बार अब तक बर्फबारी न होना मौसम के मिजाज में बदलाव का संकेत माना जा रहा है. मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक जम्मू-कश्मीर में आमतौर पर शुष्क मौसम बने रहने का अनुमान जताया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चिल्लई कलां के दौरान भी भारी बर्फबारी नहीं होती है, तो आने वाले गर्मियों के महीनों में राज्य को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सर्दियों की बर्फबारी ही जम्मू-कश्मीर के प्राकृतिक जल स्रोतों की रीढ़ मानी जाती है. नदियां, झरने, कुएं और झीलें पहाड़ों में मौजूद बारहमासी जल भंडारों से पानी पाती हैं, जो मुख्य रूप से सर्दियों में हुई बर्फबारी से भरते हैं.
भारी बर्फ की कमी से न केवल खेती और सिंचाई प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि पीने के पानी की बुनियादी जरूरतों पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में स्थानीय लोग और प्रशासन दोनों ही मौसम में बदलाव को लेकर सतर्क हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में घाटी को अच्छी बर्फबारी नसीब हो, ताकि जल संकट की स्थिति से बचा जा सके.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
Srinagar,Jammu and Kashmir
First Published :
January 04, 2026, 11:03 IST

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