Stray Dogs Case LIVE: भूषण की दलील- कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है, जस्टिस बोले- प्रमाण पत्र के लिए क्यों नहीं कह सकते?

1 hour ago

Last Updated:January 20, 2026, 15:02 IST

supreme court hearing on stray dogs live: सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने संस्थानों में कुत्तों की मौजूदगी और नगर निकायों की विफलता पर चिंता जताई, जबकि कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ने या रिहायशी सोसाइटियों से हटाने को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस देखने को मिली...

भूषण की दलील- कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है, जस्टिस क्या बोले?आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई. (फाइल)

नई दिल्ली: देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई चल रही है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है और कोर्ट में फिलहाल वकीलों की ओर से दलीलें दी जा रही हैं. आज की सुनवाई में हस्तक्षेपकर्ताओं और पीड़ित पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. एक पक्ष ने दलील दी कि आवारा कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाना चाहिए जहां से उन्हें पकड़ा गया है, जबकि दूसरी ओर रिहायशी सोसाइटियों और संस्थानों से उन्हें हटाने की मांग की गई. दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों के समर्थन में कानून और जमीनी हालात का हवाला दिया.

Supreme Court Hearing Live Updates:

– वकील राजू रामचंद्रन ने समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिए. कहा- एबीसी नियमों का कार्यान्वयन समग्र रणनीति का अभिन्न अंग है. एनएपीआरई नीति ने रेबीज उन्मूलन में 9 बाधाओं की पहचान की है. इसमें सभी हितधारकों की भूमिका स्पष्ट रूप से बताई गई है और राज्यों को अपनी कार्य योजनाएं विकसित करने का निर्देश दिया गया है. कई राज्यों ने ऐसा नहीं किया है. समाधान स्थायी आश्रय स्थल बनाने में नहीं, बल्कि मौजूदा ढांचे के समयबद्ध कार्यान्वयन में निहित है.

– वकील प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नहीं कह सकते?

– वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि सुनवाई के दौरान जजों ने कुछ टिप्पणियां की हैं, जिनमें से कुछ का गलत अर्थ निकाला गया है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कोई बात नहीं, तर्क अव्यावहारिक हैं.

– वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों के गंभीर परिणाम हो जाते हैं, जैसे मान लीजिए पीठ ने व्यंग्यपूर्वक टिप्पणी की कि दाना चुगली करने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, इसकी रिपोर्ट प्रकाशित हुई. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि नहीं-नहीं, बिल्कुल भी व्यंग्यपूर्ण नहीं था. हम गंभीर थे, हमें नहीं पता कि हम क्या करेंगे, लेकिन हम गंभीर थे.

– वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि बार के सदस्य के रूप में मैं भी इस पर कुछ कहना चाहता हूं. कार्यवाही का टेलीविजन पर प्रसारण होता है. बार और पीठ दोनों का कर्तव्य है कि वे सतर्क रहें. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हम जानते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए हम ऐसा करने से बच रहे हैं.

– वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि प्रभावी नसबंदी कुछ शहरों में कारगर साबित हुई है. दुर्भाग्य से यह प्रणाली अधिकांश शहरों में कारगर नहीं रही है. नसबंदी से समय के साथ आवारा कुत्तों की संख्या कम हो जाती है, इससे उनकी आक्रामकता भी कम होती है. इसे प्रभावी कैसे बनाया जाए? इसे पारदर्शी बनाएं और लोगों को जवाबदेह बनाएं. एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां लोग बिना नसबंदी वाले आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें. शिकायत पर कार्रवाई के लिए नामित अधिकारी होने चाहिए और उन्हें आकर जांच करनी चाहिए और स्थिति का जायजा लेना चाहिए.

– याचिकाकर्ता भारती त्यागी के वकील ने कहा कि मैंने इस मुद्दे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्याय क्षेत्रों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों पर एक नोट दिया है. नीदरलैंड इसका एक सफल उदाहरण है. जानवरों को छोड़ने से रोकने के लिए नीदरलैंड का मॉडल अपनाया गया है. सुझाव: दंड सहित सख्त पशु क्रूरता-विरोधी कानून और अनिवार्य माइक्रोचिपिंग और एक केंद्रीय समन्वित कार्यक्रम होना जरूरी है. वकील हर्ष जैदका ने कहा कि मेरी चिंता अलग है. मेरे इलाके में बहुत सारे आवारा कुत्ते हैं, मुझे पूरी तरह से अशांति है. नींद की समस्या होने लगी है और बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं. अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने कहा कि हम केवल टीकाकरण और नसबंदी कर सकते हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की है और उपद्रव होने पर आवारा कुत्तों को हटाया जा सकता है.

– सुनवाई के दौरान एक वकील ने वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी की ओर से मामले की सुनवाई टालने का अनुरोध किया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके पास इस मुद्दे से जुड़े कुछ अहम आंकड़े हैं. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हमें एक नोट दीजिए. पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि आज निजी पक्ष की दलीलें पूरी की जाएंगी और इसके बाद राज्य सरकारों को अपनी बात रखने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा.

– सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई पर देशभर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नगर निकायों की जिम्मेदारी और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े नीतिगत फैसलों पर पड़ सकता है.

– पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर गंभीर चिंता जताई थी. साथ ही नगर निकायों की भूमिका और उनकी विफलता को लेकर भी सख्त टिप्पणी की गई थी. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह सिर्फ पशु कल्याण का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा मसला भी है.

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

January 20, 2026, 14:32 IST

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