सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट: क्या कृषि भवन के साथ ही ढाह दी जाएगी 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद?

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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट: कृषि भवन के साथ ढाही जाएगी 100 साल पुरानी मस्जिद?

Last Updated:February 12, 2026, 07:41 IST

Central Vista Project: दिल्ली के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद नए प्लान में सुरक्षित रहेगी. दिल्ली वक्फ बोर्ड की याचिका पर हाईकोर्ट में सरकार ने यह बात कही है. यानी अब स्पष्ट हो गया है कि इस प्रोजेक्ट में इस मस्जिद को फिलहाल के लिए नहीं ढाही जाएगी.

 कृषि भवन के साथ ढाही जाएगी 100 साल पुरानी मस्जिद?Zoom

दिल्ली के कृषि भवन परिषद में मौजूद मस्जिद फिलहाल नहीं ढाही जाएगी.

Central Vista Project: राजधानी दिल्ली में सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास को लेकर हाल ही में जारी टेंडर ने एक सदी पुरानी कदीमी मस्जिद के भविष्य पर सवाल खड़े किए थे. लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि यह मस्जिद नए भवनों के प्लान में शामिल नहीं है और इसे प्रभावित नहीं किया जाएगा. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने पिछले महीने कृषि भवन और शास्त्री भवन के रीडेवलपमेंट के लिए टेंडर जारी किया था. इस टेंडर में मौजूदा भवनों को ध्वस्त करने के बाद नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 बनाने का प्रावधान है. लेकिन नए प्लान में कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को शामिल नहीं किया गया है.

यह मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है और कृषि भवन के ओपन कोर्ट में स्थित है. रिपोर्ट में बताया गया कि दोपहर के समय यहां 30-40 नमाजी नमाज अदा करते हैं. मस्जिद के बेसमेंट में महिलाओं के लिए अलग से नमाज अदा करने की जगह है.

दिल्ली वक्फ बोर्ड की याचिका और हाईकोर्ट में आश्वासन

वर्ष 2021 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाली छह वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की मांग की गई थी. इनमें मस्जिद जब्ता गंज (मानसिंह रोड), जामा मस्जिद (रेड क्रॉस रोड), सुनेहरी बाग रोड की मस्जिद, कृषि भवन की मस्जिद और 6 मौलाना आजाद रोड पर बनी उप-राष्ट्रपति निवास की मस्जिद शामिल है.

याचिका में कहा गया था कि कृषि भवन की मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है. यहां आज भी नमाज अदा की जाती है. यह अच्छी हालत में है. यह सरकारी भवन से भी पुरानी है. बोर्ड ने कई बार सरकार से स्पष्टीकरण और आश्वासन मांगे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसलिए अदालत का रुख किया गया.

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक दिसंबर 2021 को आश्वासन दिया कि उस समय इन संपत्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. उन्होंने कहा था कि यह लंबी अवधि का प्रोजेक्ट है. इन संपत्तियों के पास हम अभी पहुंचे भी नहीं हैं. कुछ भी नहीं हो रहा है.

हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2024 को याचिका खारिज कर दी और बोर्ड को यह छूट दी कि यदि भविष्य में कोई खतरा महसूस हो तो फिर से अप्रोच कर सकता है.

पूर्व वक्फ बोर्ड चेयरमैन का बयान

तत्कालीन दिल्ली वक्फ बोर्ड चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार ने अदालत में कहा था कि मस्जिदें प्रभावित नहीं होंगी. यदि अब इसे ध्वस्त किया जाएगा, तो यह गलत होगा. ध्यान दें कि वक्फ बोर्ड का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया था और अभी तक नया बोर्ड गठित नहीं हुआ है.

प्रोजेक्ट की डिटेल्स

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स 4 और 5 की अनुमानित लागत 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीने में पूरा किया जाएगा. टेंडर की अंतिम तिथि 13 फरवरी है. नए भवन 3.04 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में सात मंजिला होंगे. टेंडर डॉक्यूमेंट में स्पष्ट है कि काम मौजूदा भवनों को ध्वस्त करने के बाद प्लॉट नंबर 120, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर होगा.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें

First Published :

February 12, 2026, 07:41 IST

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