डेढ़ साल में करवट ले चुकी बांग्लादेश की राजनीति के लिए आज बड़ा दिन है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में हैं और उनकी पार्टी आवामी लीग को बैन कर वोट डाले जा रहे हैं. पूर्व पीएम खालिदा जिया का इंतकाल हो चुका है. उनके बेटे बीएनपी चीफ तारिक रहमान विदेश से लौटकर प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं. उन्होंने वादा किया है कि देश को खुशहाल बनाने के लिए गरीब परिवारों को आर्थिक मदद दी जाएगी, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र पर फोकस बढ़ाएंगे. दिलचस्प है कि पिछले चुनाव के समय भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाकर बीएनपी ने बहिष्कार किया था. हालांकि इस बार एक ही दिन में दो वोट क्यों डाले जा रहे हैं?
जी हां, आज हर वोटर को दो बैलेट मिल रहे हैं. पहले- सफेद बैलेट पर वोटर अपने चुनाव क्षेत्र से पसंदीदा सांसद के लिए वोट करेंगे. दूसरा- गुलाबी बैलेट देश में चुनाव के साथ कराया जा रहे नेशनल रेफरेंडम यानी जनमत संग्रह के लिए है. इसमें सुधारों के प्रस्तावित पैकेज को लेकर वोटर 'हां' या 'ना' में प्रतिक्रिया दे सकते हैं. इस पैकेज में संसद में महिलाओं के ज्यादा प्रतिनिधित्व, प्रधानमंत्री के लिए कार्यकाल की सीमा और 100 सदस्यों वाले उच्च सदन के साथ दो सदनों वाली संसद का प्रस्ताव किया गया है. आज सुबह वोटिंग शुरू होने से पहले ही कई सेंटरों पर लंबी लाइन देखी गई.
#WATCH | Bangladesh: Long queues of voters witnessed at a polling centre at the Gulshan Model School and College in Dhaka, as they await their turn to cast a vote.
Voting for the 13th Parliamentary elections begins. Parties, including the Bangladesh ist Party, led by… pic.twitter.com/j8HHYzF9pr
— ANI (@ANI) February 12, 2026
अगर यह रेफरेंडम पास हो जाता है तो आगे होने वाले किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए अपर हाउस के बहुमत से मंजूरी की जरूरत होगी. इस तरह से देखें तो निचले सदन के फैसलों पर अंकुश लगाने के लिए उच्च सदन को पावरफुल बनाया जा रहा है.
बांग्लादेश चुनाव में कौन-कौन पार्टी मैदान में
- सीधा मुकाबला दक्षिणपंथी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और बांग्लादेश की सबसे बड़ी मुस्लिम पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच है. जमात को चुनावों से पहले बैन किया जा चुका है. इसके पाकिस्तान और आईएसआई से करीबी मानी जाती है.
- जमात पहले भी बीएनपी की सहयोगी रही है. इस बार जमात ने युवाओं की नेशनल सिटिजन पार्टी के साथ गठबंधन किया है. जमात के उभार से कई तरह के सवाल भी खड़े हुए हैं दोनों जमात और बीएनपी को एक समय भारत विरोधी रुख के लिए जाना जाता था लेकिन नए सियासी माहौल में इन्होंने सुर बदल लिए हैं.
खौफ में हिंदू, जमात के मुखिया बोले- सब अपने
हां, पिछले साल और अब भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की खबरें आ रही हैं. वहां रहने वाले अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. जमात-ए-इस्लामी कट्टर मानी जाती है लेकिन चुनावी फायदे के लिए शायद पार्टी के मुखिया शफीकुर रहमान ने ऐलान किया है कि बांग्लादेश में रहने वाले सभी लोग हमारे नागरिक हैं. उन धर्म कुछ भी हो. हमारे देश में कोई सेकंड-क्लास नागरिक नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं किसी को भी माइनॉरिटी नहीं मानता. हम सभी बांग्लादेशी हैं और हर कोई फर्स्ट-क्लास नागरिक है. हम अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के आधार पर बंटवारे का सपोर्ट नहीं करते.
भारत के साथ संबंधों पर शफीकुर ने कहा कि भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है और यह हमारी प्राथमिकता बना रहेगा.

2 hours ago
