'विवादित नारे लगाने वाले सभी छात्र हो सकते हैं सस्‍पेंड', JNU प्रशासन ने अपनाया कड़ा रुख

1 day ago

Last Updated:January 06, 2026, 20:42 IST

जेएनयू प्रशासन ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है. मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और दोषी छात्रों को तत्काल निष्कासन या निलंबन का सामना करना पड़ सकता है. प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय नवाचार के केंद्र हैं, जिन्हें नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा. अनुशासन और संवैधानिक गरिमा बनाए रखना अब प्राथमिकता है.

'जेएनयू में नारे लगाने वाले सभी छात्र सस्‍पेंड होंगे', यूनिवर्सिटी का फैसलाजेएनयू प्रशासन का कड़ा फैसला. (AI Photo)

जेएनयू के सबरमती ढाबा वाली वो सड़क जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गूंजे उन नारों ने लोकतंत्र की अभिव्यक्ति और मर्यादा के बीच की धुंधली लकीर को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि जिसे छात्र आजादी समझ रहे हैं वह कानून की नजर में नफरत की प्रयोगशाला है और अब इस प्रयोगशाला के किरदारों कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से तत्काल निलंबित, निष्कासित या स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जा सकता है. आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. प्रशासन ने पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजकर इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है.

प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए करीब 30-35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे. लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप तब बदल गया जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगने शुरू हो गए. प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और जेएनयू की आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है.

इन छात्रों पर गिर सकती है गाज
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी शिकायत में कुछ प्रमुख छात्रों की पहचान की है, जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है:

·         पहचाने गए छात्र: अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान और शुभम आदि.

·         गवाह: घटना के समय सुरक्षा निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और गार्ड जय कुमार मीणा व पूजा मौके पर मौजूद थे.

‘नफरत की प्रयोगशाला’ बनाम अभिव्यक्ति का अधिकार
जेएनयू प्रशासन का यह बयान कि “विश्वविद्यालयों को घृणा की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा”, एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करता है. यह कार्रवाई केवल नारों तक सीमित नहीं है:

1.      न्यायिक गरिमा का प्रश्न: प्रशासन ने इसे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कोर्ट के फैसलों के प्रति ‘अनादर’ माना है. यह छात्रों की सक्रियता को कानूनी कटघरे में खड़ा करता है.

2.      कैंपस की छवि और सुरक्षा: प्रशासन का मानना है कि इस तरह की नारेबाजी से परिसर की शांति, सौहार्द और सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

3.      अभिव्यक्ति की सीमाएं: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रविरोधी हरकतों या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

यह घटना दर्शाती है कि जेएनयू में छात्र राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ प्रशासन और छात्रों के बीच का संवाद पूरी तरह कानूनी प्रक्रियाओं (FIR और निलंबन) में तब्दील हो चुका है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें किसी भी कीमत पर अराजकता का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें

First Published :

January 06, 2026, 20:27 IST

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'जेएनयू में नारे लगाने वाले सभी छात्र सस्‍पेंड होंगे', यूनिवर्सिटी का फैसला

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