बच्‍चों के बढ़ते स्‍क्रीन टाइम को देखते हुए गाइड लाइन बनाने की तैयारी

1 day ago

Last Updated:January 07, 2026, 20:30 IST

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चिंतित है और इस पर गाइड लाइन बनाने पर विचार किया जा रहा है. डिजिटल दुनिया में बच्‍चे स्क्रीन से चिपके रहते हैं, जिससे मेंटल हेल्थ को खतरा बढ़ रहा है.

बच्‍चों के बढ़ते स्‍क्रीन टाइम को देखते हुए गाइड लाइन बनाने की तैयारीसूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल

नई दिल्‍ली.सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चिंतित है और इस पर गाइड लाइन बनाने पर विचार किया जा रहा है. डिजिटल दुनिया में बच्‍चे स्क्रीन से चिपके रहते हैं, जिससे मेंटल हेल्थ को खतरा बढ़ रहा है. मंत्रालय ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पैरेंटल कंसेंट अनिवार्य कर दिया है. 2025 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 60 करोड़ से अधिक सोशल मीडिया यूजर्स हैं, जिनमें लाखों किशोर शामिल हैं. एक सर्वे बताता है कि 9-13 साल के शहरी बच्चों का बहुमत रोज 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताता है. 14-15 साल के 76% छात्र स्मार्टफोन से इसे एक्सेस करते हैं. इससे 11-37% किशोरों में एडिक्टिव व्यवहार, फोकस की कमी दिख रही है.

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आईटी व शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) रूल्स 2025 लागू किए हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘बच्चों की साइबर सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. सोशल मीडिया, OTT प्लेटफॉर्म्स और गेमिंग ऐप्स पर अब पैरेंटल सहमति जरूरी है.’ मंत्रालय स्क्रीन टाइम रेगुलेशन के लिए नई गाइडलाइंस तैयार कर रहा है.
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने केंद्र से ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर विचार करने को कहा, जहां 16 साल से कम उम्र वालों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से रोका गया है. कोर्ट ने ऑनलाइन बुलिंग, नींद की कमी और साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई. होमवर्क के नाम पर फोन लेने वाले बच्चे सोशल मीडिया में खो जाते हैं. इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और तनाव बढ़ता है..

रिपोर्ट पैरेंट्स को मजबूत पासवर्ड और मॉनिटरिंग की सलाह देती है. इंडियन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार 1-2 साल के बच्चों को 1 घंटे से ज्यादा स्क्रीन न दें. विशेषज्ञ बताते हैं कि 26% छात्र अत्यधिक इंटरनेट यूज करते हैं, जो लड़कों में ज्यादा है. फ्रांस 2026 से 15 साल से कम उम्र पर बैन पर विचार कर रहा है. भारत पैरेंटल कंट्रोल और जागरूकता पर जोर दे रहा है. बहस जारी है कि बैन से क्रिएटिविटी रुकेगी या सुरक्षा बढ़ेगी. लेकिन छात्रों के भविष्य के लिए तुरंत कदम जरूरी हैं.

Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

January 07, 2026, 20:30 IST

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