DNA: ईरान के लिए मंडराया बड़ा संकट? ट्रंप की सेना ने चारों तरफ से घेरा, अब क्या करेंगे खामेनेई

19 hours ago

Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के बाद कई छोटे देशों को धमका रहे हैं. रूस के टैंकर पर कब्जा करके पुतिन को चैलेंज कर रहे हैं, लेकिन उनका अगला टारगेट ईरान है. इस बात का सबसे बड़ा संकेत मिल चुका है. वेनेजुएला  की राजधानी से राष्ट्रपति मादुरो को उठाने वाले डेल्टा कमांडो अब तेहरान के बहुत करीब पहुंच चुके हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश पर काम करने वाले डेल्टा कमांडो का मिडिल ईस्ट में पहुंचना तेहरान के लिए बड़ी टेंशन है. आज आपको डेल्टा कमांडो के इस नए आपरेशन के बारे में जानना चाहिए,  जो मिडिल ईस्ट के खतरनाक समय का सबसे बड़ा संकेत है.

ट्रंप ने तैनात की डेल्टा फोर्स 

ट्रंप के आदेश पर Delta Force की चुनिंदा यूनिट्स को Iraq–Iran बॉर्डर के पास तैनात किया गया है. ये तैनाती इराक के दियाला और वासित प्रांत में मौजूद अमेरिका के अस्थायी सैन्य ठिकानों पर की गई है. ये दोनों ठिकाने ईरान की राजधानी तेहरान से 450 किलोमीटर दूर हैं. फिलहाल डेल्टा कमांडो को फॉरवर्ड लोकेशनों पर अलर्ट रखा गया है । यानी वो किसी भी वक्त आपरेशन के लिए तैयार हैं. सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर काम करने वाली डेल्टा फोर्स की तैनाती कभी भी रूटीन नहीं मानी जाती। यानी ​बिना किसी बड़े मिशन के डेल्टा कमांडो तैनात नहीं किए जाते. डेल्टा कमांडो हमेशा हाई वैल्यू टारगेट को निशाना बनाते हैं । इसलिए Iraq–Iran बॉर्डर पर डेल्टा की तैनाती को खामेनेई पर एक्शन से जोड़ा जा रहा है. ईरान के आस पास अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी मौजूदगी देखी जा रही है, जिसे इराक पर अमेरिकी हमले के बाद सबसे बड़ी तैनाती माना जा रहा है. जिस वक्त ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन में 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 1200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके बावजूद प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है और इस बीच अमेरिका के डेल्टा कमांडोज़ ने ईरान को घेर लिया है. मतलब साफ है कि अगले कुछ दिन वाकई मिडिल ईस्ट के लिए खतरनाक हैं. क्योंकि अब ईरान ने अमेरिका और सहयोगियों पर प्री-एप्म्टिव अटैक यानी दुश्मन के हमला करने से पहले ही उस पर सैन्य वार करने की चेतावनी दे दी है. 

ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने पहले हमले की चेतावनी देते हुए कहा. उनके देश के खिलाफ हो रही बयानबाजी का जवाब सिर्फ शब्दों से नहीं बल्कि अब सैन्य कार्रवाई से दिया जाएगा. ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को अमेरिका और इजरायल खुला समर्थन दे रहे हैं. ईरान के चारों तरफ सेना की तैनाती की जा रही है और ईरान की सरकार को इसी बात से दिक्कत है, लेकिन ये हमला अमेरिका के अड्डों से पहले इजरायल पर हो सकता है. रूस के सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है. इस खबर के बाद रूस इजरायल में अपना दूतावास खाली कर सकता है. क्योंकि उसके पास इजरायल पर हमले की खुफिया सूचना मौजूद है. आज आपको भी ईरान के पलटवार की तैयारी के बारे में जानना चाहिए. इजरायल से युद्ध खत्म होने के फौरन बाद ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण को तेज कर दिया था. बता दें कि ईरान के पास अभी लगभग 3000 बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं. ईरान एक साथ 2,000 मिसाइल दागने की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा था. अगर उसके पास ये क्षमता आ गई होगी. तो पहले ही वार में वो दुश्मन का बड़ा नुकसान कर देगा. ईरान के पास फतेह 1 और फतेह 2 जैसी  मिसाइलें मौजूद हैं जिनकी रेंज 1400 से 1800 किलोमीटर है. ईरान का दावा है उसकी फतेह मिसाइलें आवाज से 15 गुना तेज रफ्तार से हमला करती हैं यानी ये मिसाइलें हाइपरसोनिक हैं, जिन्हें रोकना नामुमकिन है. ईरान ने मध्यम दूरी की परमाणु हमला करने में सक्षम मिसाइलें बनाई हैं यानी ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए तो खामेनेई और ज्यादा खतरनाक साबित होंगे. 

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ईरान करेगा पहला हमला? 

ईरान पहले हमला कर ईरान खुद को 'आत्मरक्षा करने वाला दिखा सकता है. क्योंकि इजरायल और अमेरिका से लगातार ईरान को धमकी दी जा रही है. इसके अलावा ईरान पहले हमला करके देश की जनता का ध्यान विरोध प्रदर्शनों से हटा सकता है. अगर ईरान की सरकार ने राष्ट्र संकट में है वाला नैरेटिव सेट कर दिया तो खामेनेई, देश में फिर से मजबूत हो जाएंगे और अमेरिका के लिए तख्तापलट करना आसान नहीं होगा. ट्रंप ईरान में खामेनेई के तख्तापलट की तैयारी कर रहे हैं और ईरान की इस्लामिक सरकार खुद को फिर से देश में प्रासंगिक बनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन पाकिस्तान में कुछ ऐसा हो गया है, जिससे पूरी दुनिया हैरान है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ पाकिस्तान में ही गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया गया है. यानी शहबाज के लिए पाकिस्तान के अंदर ही खतरनाक समय चल रहा है। दावा किया जा रहा है कि शहबाज शरीफ अगर बलोचिस्तान में घुसेंगे तो उनको गिरफ्तार कर लिया जाएगा. 

शहबाज के खिलाफ वारंट

शहबाज के खिलाफ ये वारंट पाकिस्तान के कब्जे वाले बलोचिस्तान की निर्वासित सरकार ने जारी किया है. इसमें शहबाज शरीफ पर बलोचिस्तान के वीजा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. उन पर बलोचिस्तान की संप्रभुता को गंभीर और जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है. कहा जा रहा है कि शहबाज शरीफ बलोचिस्तान के किसी हवाई अड्डे या एक्जिट प्वाइंट पर आए तो उनको गिरफ्तार कर लिया जाएगा क्योंकि ये बलोचिस्तान में बगैर वैध वीजा के गैर-कानूनी प्रवेश होगा.शहबाज शरीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का ऐलान बलोच नेता मीर यार बलोच ने किया है, जो बलोचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और ये वारंट पाकिस्तान के खिलाफ बलोचिस्तान के लोगों के गुस्से को प्रदर्शित करने का तरीका है. यानी भले ही शहबाज शरीफ को बलोचिस्तान जाने पर हथकड़ी ना लगे, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बलोचिस्तान के लोग अपना प्रधानमंत्री नहीं मानते उनको ये संदेश जरूर दे दिया गया है. 

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