Last Updated:January 16, 2026, 21:01 IST
Justice Satish Chand Sharma Fraud Case: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने खुलासा किया कि साइबर ठगों ने उन्हें फर्जी ट्रैफिक चालान भेजकर ठगने की कोशिश की. मैसेज के लिंक पर क्लिक करते ही सरकारी पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट खुल गई. जस्टिस शर्मा ने समय रहते इस धोखे को पहचान लिया और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी. कोर्ट ने साइबर जालसाजी के एक आरोपी को जमानत देने से भी इनकार कर दिया.
जज ने बताया ट्रैफिक चालान का किस्सा. देश की सबसे बड़ी अदालत के जज जिनके सामने अपराधी कांपते हैं, क्या उन्हें भी ठगा जा सकता है? इसका जवाब खुद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने एक सुनवाई के दौरान दिया. शुक्रवार को जब कोर्ट रूम खचाखच भरा था तब जस्टिस शर्मा ने खुलासा किया कि साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने खुद जस्टिस को ही ‘फर्जी ट्रैफिक चालान’ के जाल में फंसाने की कोशिश की. यह घटना सिर्फ एक जज के साथ हुई ठगी की कोशिश नहीं है बल्कि एक चेतावनी है कि अब डिजिटल दुनिया में कोई भी सुरक्षित नहीं है. अगर जज साहब की सूझबूझ काम न आती तो शायद एक बड़ा साइबर फ्रॉड उनके नाम भी दर्ज हो जाता.
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के साथ क्या हुआ?
शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ एक अजीबोगरीब मामले की सुनवाई कर रही थी. मामला एक ऐसे आरोपी का था जिसने पुलिस अधिकारियों के बैंक खातों में पैसे जमा कर उन्हें ही फंसाने की साजिश रची थी. इसी दौरान जस्टिस शर्मा ने अपने साथ हुई हालिया घटना साझा की. उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें दावा किया गया कि उनका ट्रैफिक चालान कटा है. मैसेज के साथ एक लिंक भी दिया गया था. जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया उनके सामने एक वेबसाइट खुल गई. जस्टिस शर्मा ने कहा, “वह वेबसाइट हूबहू असली सरकारी पोर्टल जैसी दिख रही थी.” यह देखकर एक बार तो कोई भी झांसे में आ जाए लेकिन कानून के जानकार जस्टिस शर्मा ने समय रहते इस खतरे को भांप लिया और किसी भी तरह के भुगतान या जानकारी साझा करने से बच गए.
साइबर फ्रॉड के इस नए पैटर्न पर 5 बड़े खुलासे
1. सुनियोजित साजिश (Sophisticated Fraud): जस्टिस शर्मा ने रेखांकित किया कि ये अपराधी अब बेतरतीब ढंग से शिकार नहीं चुन रहे, बल्कि उच्च पदस्थ लोगों (High-profile targets) को निशाना बना रहे हैं. चालान की वेबसाइट को सरकारी साइट जैसा बनाना यह दर्शाता है कि ठगों ने काफी ‘होमवर्क’ किया है.
2. आम लोगों के लिए खतरे की घंटी: कोर्ट में जस्टिस शर्मा ने बहुत ही अहम बात कही— “अगर जजों को भी इस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, तो आम लोगों की सुरक्षा का क्या?” उनका इशारा साफ था कि साधारण व्यक्ति, जो तकनीक से बहुत ज्यादा वाकिफ नहीं है, वह आसानी से अपना बैंक खाता खाली करवा सकता है.
3. सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: जिस आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी, कोर्ट ने उसे कोई राहत नहीं दी. आरोपी ने पुलिसवालों को ठगने और फंसाने की कोशिश की थी. कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती और आरोपी को जेल में ही रखने का आदेश दिया.
4. फर्जी चालान का बढ़ता ट्रेंड: आजकल व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए ‘पेंडिंग ट्रैफिक चालान’ के नाम पर लाखों लोगों को ठगा जा रहा है. ये ठग सरकारी परिवहन विभाग के लोगो और रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है.
5. लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी: जस्टिस शर्मा ने अपील की कि किसी भी अनजान मैसेज में दिए गए लिंक पर आंख बंद करके भरोसा न करें. चालान चेक करने के लिए हमेशा आधिकारिक ‘mParivahan’ ऐप या सीधे सरकारी वेबसाइट का ही उपयोग करें.
सावधानी ही सुरक्षा है: 3 गोल्ड रूल्स
· संदेह करें: अगर आपको कोई ऐसा चालान मैसेज आता है जिसका आपको अंदाजा नहीं है, तो घबराएं नहीं, पहले आधिकारिक साइट पर जाकर अपनी गाड़ी का नंबर डालें.
· लिंक की जांच: असली सरकारी वेबसाइटों के अंत में अक्सर .gov.in या .nic.in होता है. अगर लिंक अजीब है, तो उसे न खोलें.
· शिकायत दर्ज करें: अगर आपको ऐसा कोई मैसेज मिलता है, तो उसे तुरंत ‘Cyber Crime’ पोर्टल पर रिपोर्ट करें.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
First Published :
January 16, 2026, 21:01 IST

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