Waste To Electricity: एक अनोखी पहल के तहत यहां कचरे से रोजाना करीब 400 यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के इस मॉडल में जैविक कचरे को प्रोसेस कर बायोगैस और बिजली तैयार की जाती है. साथ ही बचा हुआ अपशिष्ट ऑर्गेनिक खाद में बदल दिया जाता है, जिसका उपयोग प्राकृतिक खेती में किया जा रहा है. इस पहल से जहां स्वच्छता को बढ़ावा मिला है, वहीं किसानों को रासायनिक खाद का विकल्प भी उपलब्ध हुआ है. यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा और टिकाऊ कृषि का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरी है. स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ यह मॉडल आत्मनिर्भर और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें |

2 hours ago

