नई दिल्ली (AI Courses After Humanities). दशकों से हमारे समाज में एक लकीर खिंची हुई थी- अगर आप आर्ट्स पढ़ रहे हैं तो सिविल सेवा, साहित्य या शिक्षण में जाएंगे और अगर आप कोडिंग या डेटा के साथ खेलना चाहते हैं तो इंजीनियर होना पड़ेगा. लेकिन 2026 की डिजिटल क्रांति ने इस लकीर को पूरी तरह मिटा दिया है. अब डेटा सिर्फ 0 और 1 का गणित नहीं है. यह हमारे महसूस करने के तरीके, हमारी बातचीत के अंदाज और समाज में हमारे बर्ताव का डिजिटल रिकॉर्ड है.
यही कारण है कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां अब ऐसे दिमाग ढूंढ रही हैं, जो सिर्फ कोड लिखना न जानते हों, बल्कि उसके पीछे का Human Context भी समझ सकें. गूगल, आईबीएम, एप्पल और मेटा जैसे संस्थानों ने भर्ती की पुरानी दीवारें गिरा दी हैं. अब वे 4 साल की बीटेक डिग्री के बजाय ‘माइक्रो-क्रेडेंशियल्स’ और ‘पोर्टफोलियो’ को प्राथमिकता दे रहे हैं. यह बदलाव ह्यूमैनिटीज यानी आर्ट्स के स्टूडेंट्स के लिए सुनहरे युग की शुरुआत है.
क्या आर्ट्स वाले एआई की पढ़ाई कर सकते हैं?
इतिहास, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और भाषाविज्ञान पढ़ने वाले स्टूडेंट्स अब अपनी ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ का इस्तेमाल कॉम्प्लेक्स डेटा सेट को समझने के लिए कर रहे हैं. जानिए हर वह पहलू, जो आर्ट्स बैकग्राउंड के स्टूडेंट को टेक-लीडर बना सकता है.
अब कोई भी सीख सकता है कोडिंग
पहले कोडिंग के लिए भारी-भरकम सॉफ्टवेयर और गणितीय महारत की जरूरत होती थी. आज पाइथन (Python) जैसी भाषाएं इतनी सरल हो गई हैं कि उन्हें सीखना किसी नई भाषा (जैसे अंग्रेजी या फ्रेंच) को सीखने जैसा है. ह्यूमैनिटीज के जिन स्टूडेंट्स की भाषा पर अच्छी पकड़ होती है, वे कोडिंग के ‘सिंटैक्स’ को बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं. इसके अलावा, अब ‘नो-कोड’ और ‘लो-कोड’ टूल्स का जमाना है, जहां आप बिना एक भी लाइन लिखे जटिल डेटा मॉडल तैयार कर सकते हैं.
आर्ट्स बैकग्राउंड: डेटा साइंस के लिए ‘सीक्रेट वेपन’
डेटा साइंस में सिर्फ ग्राफ बनाना काफी नहीं है, बल्कि उस ग्राफ का मतलब समझाना भी जरूरी है. यहां ह्यूमैनिटीज के स्टूडेंट्स इंजीनियर्स को पीछे छोड़ देते हैं:
डेटा स्टोरीटेलिंग: आर्ट्स के स्टूडेंट्स कहानियों के जरिए अपनी बात कहना जानते हैं. वे डेटा को ऐसी शक्ल देते हैं जिसे बिजनेस लीडर्स आसानी से समझ सकें. एथिक्स और बायस (Ethics in AI): जब हम AI बनाते हैं तो उसमें इंसानी पक्षपात (Bias) आने का खतरा होता है समाजशास्त्र या दर्शनशास्त्र का छात्र यह बेहतर समझ सकता है कि एल्गोरिदम को निष्पक्ष और नैतिक कैसे बनाया जाए.‘स्किल-फर्स्ट’ हायरिंग: पोर्टफोलियो ही बन जाएगा डिग्री
गूगल और आईबीएम जैसे संस्थानों ने अपने खुद के ‘प्रोफेशनल सर्टिफिकेट’ प्रोग्राम लॉन्च किए हैं. ये 3 से 6 महीने के कोर्स होते हैं जो किसी भी स्ट्रीम में डिग्री लेने वाले व्यक्ति को डेटा एनालिटिक्स या UX डिजाइन में एक्सपर्ट बना देते हैं.
टेक जगत में आर्ट्स वालों के लिए उभरते हुए करियर
Natural Language Processing (NLP): अगर आपने साहित्य या भाषाविज्ञान (Linguistics) पढ़ा है तो आप ChatGPT जैसे मॉडल्स को बेहतर तरीके से ट्रेन कर सकते हैं. AI एथिक्स ऑफिसर: यह सुनिश्चित करना कि AI मानवता के लिए खतरा न बने. UX रिसर्चर: यूजर के व्यवहार का मनोविज्ञान समझना और उसके अनुसार ऐप्स डिजाइन करना. डेटा जर्नलिज्म: डेटा का इस्तेमाल करके बड़ी खबरें और रिपोर्ट्स तैयार करना.आर्ट्स वाले एआई में करियर कैसे बनाएं?
डर खत्म करें: मान लें कि डेटा साइंस गणित से ज्यादा ‘लॉजिक’ का खेल है. फ्री रिसोर्सेज का फायदा उठाएं: Coursera, Google Career Certificates और YouTube (जैसे Codebasics) से बेसिक पाइथन और एक्सेल सीखें. डोमेन नॉलेज का इस्तेमाल करें: अगर आप साइकोलॉजी के छात्र हैं तो ‘मेंटल हेल्थ डेटा’ पर प्रोजेक्ट बनाएं. अपनी आर्ट्स की नॉलेज को डेटा के साथ जोड़ें. नेटवर्किंग: LinkedIn पर उन लोगों से जुड़ें, जिन्होंने आर्ट्स से टेक में स्विच किया है.कोडिंग को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-जवाब (FAQs)
क्या आर्ट्स बैकग्राउंड के छात्र डेटा साइंस सीख सकते हैं, जबकि उन्होंने स्कूल में मैथ्स नहीं पढ़ा?
हां, बिल्कुल. डेटा साइंस के लिए एडवांस कैलकुलस या ट्रिगोनोमेट्री की जरूरत नहीं होती. इसमें मुख्य रूप से स्टैटिस्टिक्स (सांख्यिकी) और लॉजिक का इस्तेमाल होता है. कई ऑनलाइन कोर्सेज 0 लेवल से शुरू होते हैं और काम भर की गणित (जैसे- मीन, मीडियन, प्रोबेबिलिटी) साथ-साथ सिखा देते हैं.
बिना इंजीनियरिंग डिग्री के टेक कंपनियां नौकरी कैसे देंगी?
आज-कल गूगल, IBM और स्टार्टअप्स ‘स्किल-बेस्ड’ हायरिंग करते हैं. अगर आपके पास मजबूत पोर्टफोलियो (जैसे गिटहब पर प्रोजेक्ट्स) और टॉप संस्थानों के सर्टिफिकेट्स हैं तो कंपनियां आपकी डिग्री नहीं, बल्कि काम देखती हैं. कई कंपनियां अब डिग्री की अनिवार्यता को अपने जॉब डिस्क्रिप्शन से हटा चुकी हैं.
आर्ट्स के छात्रों के लिए कोडिंग सीखना कितना कठिन है?
यह एक मिथक है कि कोडिंग बहुत मुश्किल है. पाइथन (Python) जैसी भाषाएं बहुत ही ‘यूजर-फ्रेंडली’ हैं और इन्हें सीखना किसी नई भाषा के व्याकरण को समझने जैसा है. ह्यूमैनिटीज के छात्र भाषा और पैटर्न को समझने में माहिर होते हैं, वे कोडिंग के लॉजिक को बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं.
इस क्षेत्र में स्विच करने के लिए सबसे अच्छे फ्री कोर्सेज कौन से हैं?
Google Data Analytics Professional Certificate (Coursera पर), IBM Data Science Professional Certificate, और Harvard University के मुफ्त कोर्सेज (edX पर) से शुरुआत कर सकते हैं. यूट्यूब पर ‘Codebasics’ और ‘Sentdex’ जैसे चैनल भी नॉन-टेक छात्रों के लिए बेहतरीन रिसोर्स हैं.
टेक जगत में आर्ट्स वालों को किस तरह के सैलरी पैकेज मिलते हैं?
फ्रेशर डेटा एनालिस्ट (आर्ट्स बैकग्राउंड) की शुरुआती सैलरी ₹5 लाख से ₹8 लाख सालाना तक हो सकती है. अनुभव और स्किल्स बढ़ने के साथ डेटा साइंटिस्ट के तौर पर यह पैकेज ₹15 लाख से ₹25 लाख तक भी जा सकता है, जो कई अनुभवी इंजीनियरों के बराबर या उनसे ज्यादा है.

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