Last Updated:February 11, 2026, 11:47 IST
India-US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय वाइट हाउस ने अंतरिम व्यापार समझौते पर जारी संशोधित दस्तावेज में उन अमेरिकी उत्पादों की सूची से ‘दालों’ का जिक्र हटा दिया है जिन पर भारत के शुल्क समाप्त करने या कम किए जाने की बात कही गई थी. वाइट हाउस अमेरिका और भारत ने की ऐतिहासिक व्यापार समझौते (अंतरिम समझौता) की घोषणा’’ शीर्षक से एक दस्तावेज (फैक्ट शीट) सोमवार को जारी किया था.

India-US trade deal fact sheet: आज का भारत नया भारत है. न किसी से डरता है और न किसी के आगे झुकता है. अपनी शर्तों पर सौदे करता है. भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी इसका उदाहरण है. अपनी बात मनवा कर भारत ने इसका एक और सबूत दिया है. जी हां, अमेरिका ने भारत की बात मान ली है, जिसे लेकर चिंता जताई जा रही थी. भारत-ट्रेड डील पर विपक्ष ने सवाल उठाया था. कहा कि इसमें भारत का हित नहीं देखा गया है. किसानों का हित नहीं देखा गया है. भारत ने अमेरिका के प्रेशर में डील किया. मगर सरकार शुरू से कहती आ रही थी कि कृषि और डेयरी सेक्टर डील में प्रोटेक्टेड हैं. हालांकि, ट्रेड डील वाले फैक्टशीट की बातों से संशय के बादल बरकरार थे. मगर अब अमेरिका-भारत ट्रेड डील में किसानों की टेंशन दूर हो गई है. ट्रेड डील में भारत के किसानों के लिए बहुत बड़ी राहत की खबर आई है.
दरअसल, भारत-अमेरिका ट्रेड डील की अपडेटेड फैक्टशीट ने यह साफ कर दिया है कि भारत सरकार ने डील को लेकर नेगोशिएशन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. पहले ट्रेड डील वाले फैक्टशीट में कई ऐसे बिंदु थे, जिन पर पहले अमेरिका की ओर से सख्त भाषा का इस्तेमाल किया गया था. ऐसा लग रहा था कि भारत ने सरेंडर कर दिया है. मगर भारत की सख्ती के आगे अमेरिका को झुकना पड़ा है. अब वाइट हाउस ने कुछ शब्द और पॉइंट्स बदल दिए हैं, जिन पर भारत को आपत्ति थी. इन बदलाव में सबसे खास है ट्रेड डील वाली लिस्ट से दाल को हटाना. जी हां, दालों को टैरिफ कटौती की सूची से हटा दिया गया है. इस तरह से भारत ने अपने किसानों के हितों की रक्षा की है और बता दिया है कि भारत किसी से भी सौदेबाजी अपनी शर्तों पर करता है.
भारत ने मनवाया लोहा
जी हां, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के अपडेटेड फैक्टशीट के बदलावों से साफ पता चलता है कि भारत सरकार ने किसानों के हित से एक इंच भी समझौता नहीं किया. खासकर दाल (pulses) वाले मुद्दे पर भारत ने अपना स्टैंड पूरी तरह बचा लिया. सबसे पहले जानते हैं किदाल को लेकर पहले फैक्टशीट में क्या लिखा था-‘भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और खाद्य-कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा… इसमें pulses यानी दाल भी शामिल हैं.’ अब नए फैक्टशीट में pulses यानी का नाम ही काट दिया गया है. ‘certain pulses’ शब्द पूरी तरह हटा दिए गए हैं. मतलब अब भारत को अमेरिकी दालों पर टैरिफ घटाने की कोई जरूरत नहीं है. इस तरह भारतीय किसान दाल पर अमेरिकी दाल के सस्ते आयात से सुरक्षित रहेंगे.
किसानों की टेंशन दूर
यही भारत की सबसे बड़ी टेंशन थी. कई दिनों से किसान संगठन चेता रहे थे कि अगर दाल पर टैरिफ घटाया गया तो हमारे किसानों को भारी नुकसान होगा. विपक्ष के भी सुर कुछ इसी तरह थे. मगर सरकार शुरू से कह रही थी कि किसी भी कीमत पर किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा.भारत ने अपने एग्रीकल्चर चैप्टर में साफ किया है कि दालें एक संवेदनशील क्षेत्र हैं और इन्हें पूरी तरह संरक्षण दिया गया है. आखिरकार सरकार ने अमेरिका से फैक्टशीट को ठीक करवा ही दिया. यही अपडेटेड फैक्टशीट भारत की मजबूती के सबूत हैं. इसका मतलब है कि भारतीय किसानों को अमेरिकी दालों के साथ सीधे कंपीटिशन का खतरा नहीं होगा.वैसे भी दालों की खेती लाखों-करोड़ों किसानों की आय से जुड़ी है. यही वजह है कि यह किसानों के लिए राहत की बात है.
वादे को इरादे से बदला
फैक्टशीट में एक और बड़ा बदलाव हुआ है. वह है 500 अरब डॉलर खरीद का वादा वाला प्वाइंट. इस प्वाइंट पर भी खूब बवाल था. विपक्ष इस मुद्दा बना रहा था और सरकार को घेर रहा था. मगर अब भारत ने इस मुद्दे को भी अमेरिका से ठीक करवा दिया है. पहले कहा गया था कि भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने तथा ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. यानी भारत ने वादा किया है. अब अपडेटेट फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत अगले पांच वर्ष में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान एवं उसके कलपुर्जे, बहुमूल्य धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा रखता है. मतलब अब वादा को इरादा से बदल दिया गया है. इसका मतलब यह है कि भारत 500 अरब डॉलर की खरीद करेगा यह जरूरी नहीं है.
भारत ने मार ली बाजी
ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत ने डील में अपना हित कितनी मजबूती से रखा. किसानों की दाल, गेहूं, चावल, सब्जी, फल .. इन पर कोई समझौता नहीं हुआ है. इतना ही नहीं, 500 अरब डॉलर की खरीद को भी कानूनी बाध्यता से मुक्त कर दिया गया. यह समझौता पिछले हफ्ते ही घोषित हुआ था. तब पहला फैक्टशीट काफी सख्त लग रहा था. किसान संगठनों में चिंता थी। लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका से बात करके इन बदलावों को मनवा लिया. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन चुकी है. अमेरिका ने भारत पर टैरिफ अब 18 फीसदी कर दिया है.
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First Published :
February 11, 2026, 11:47 IST

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