GEN, SC, ST, OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सरकारी नौकरियों पर क्‍या पड़ेगा असर?

1 day ago

Supreme Court Update, ST, SC, OBC Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसेले में कहा है कि जनरल कैटेगरी किसी जाति के लिए आरक्षित नहीं है, बल्कि ये पूरी तरह मेरिट पर आधारित है. अगर SC, ST, OBC या EWS जैसी आरक्षित कैटेगरी का कोई उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो उसे जनरल सीट पर ही जगह मिलेगी. ये फैसला राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़े केस पर आया, लेकिन इसका असर पूरे देश की सरकारी नौकरियों पर पड़ेगा. आइए समझते हैं कि ये फैसला क्या है? क्यों आया और इससे आपकी नौकरी पर क्या फर्क पड़ेगा?

क्‍या कहता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि ‘ओपन’, ‘जनरल’ या ‘अनरिजर्व्ड’ कैटेगरी किसी खास जाति, वर्ग या लिंग के लिए रिजर्व नहीं है. ये सभी के लिए ओपन है और यहां एंट्री की एक ही शर्त है मेरिट. मतलब अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जैसे SC, OBC, MBC या EWS बिना किसी रियायत या छूट के जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा अंक लाता है तो उसे जनरल लिस्ट में ही शामिल किया जाएगा. उसे अपनी आरक्षित कैटेगरी में नहीं बांधा जा सकता. कोर्ट ने पुराने फैसलों जैसे इंद्रा साहनी केस (1992) और सौरव यादव केस का हवाला देते हुए ये बात दोहराई. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने ये फैसला सुनाया और राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर आरक्षित कैटेगरी का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा चला जाता है, तो भी ऐसे उम्मीदवारों को जनरल से बाहर करना गलत है, क्योंकि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 यानी समानता का अधिकार के खिलाफ है.

‘डबल फायदा’ वाली दलील को कोर्ट ने क्यों खारिज किया?

बहुत से लोग कहते हैं कि अगर आरक्षित उम्मीदवार को जनरल सीट मिल गई, तो ये ‘डबल बेनिफिट’ जैसा हो जाएगा.एक तो आरक्षण का फायदा ऊपर से जनरल में एंट्री. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर उम्मीदवार ने कोई छूट नहीं ली और शुद्ध मेरिट से क्वालीफाई किया, तो ये कोई एक्स्ट्रा लाभ नहीं है. बल्कि अगर इस दलील को मान लिया जाए तो आरक्षित वर्ग के सबसे टैलेंटेड लोग सिर्फ अपनी कैटेगरी तक सीमित रह जाएंगे जो समानता की भावना के खिलाफ है. कोर्ट ने ये भी क्लियर किया कि फॉर्म में अपनी जाति लिखने से सिर्फ ये पता चलता है कि उम्मीदवार आरक्षित लिस्ट में भी क्लेम कर सकता है, लेकिन ये अपने आप में जनरल से बाहर करने का बहाना नहीं बन सकता. मतलब अब मेरिट का नियम और मजबूत हो गया है और ये फैसला आरक्षित कैटेगरी के मेधावी उम्मीदवारों के लिए बड़ा तोहफा है.

मामला क्या था? राजस्थान हाईकोर्ट भर्ती से शुरू हुई कहानी

ये पूरा केस राजस्थान हाईकोर्ट की 2022 की भर्ती से जुड़ा है. अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II के 2756 पदों के लिए वैकेंसी निकाली थी. मई 2023 में रिजल्ट आए तो SC, OBC, MBC और EWS कैटेगरी का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा निकल गया. कुछ आरक्षित उम्मीदवारों ने जनरल कट-ऑफ पार किया, लेकिन अपनी कैटेगरी का कट-ऑफ न पार करने पर उन्हें अगले राउंड से बाहर कर दिया गया. इन उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चैलेंज किया. हाईकोर्ट ने कहा कि जनरल लिस्ट पहले मेरिट के आधार पर बननी चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित लिस्ट में नहीं रखा जा सकता है. फिर हाईकोर्ट प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की तारीफ की कि उसने अपनी गलती सुधारकर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की.

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले और रुख में क्या बदलाव आया?

ये पहला ऐसा फैसला नहीं है. सितंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने CISF (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) की भर्ती में कुछ ऐसा ही कहा था. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने फैसला दिया कि अगर भर्ती नियमों में स्पष्ट मना न हो तो आरक्षित उम्मीदवार जो शारीरिक मानकों में छूट लेता है, लेकिन मेरिट से क्वालीफाई करता है तो उसे जनरल पोस्ट पर नियुक्त किया जा सकता है. उस केस में एक जनरल उम्मीदवार ने चैलेंज किया था क्योंकि एक ST उम्मीदवार ने 366 अंक लेकर जनरल सीट ली जबकि जनरल कट-ऑफ 364 था. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, क्योंकि नियमों में कोई साफ रोक नहीं थी.

मेरिट को ज्‍यादा तवज्‍जो

अब सुप्रीम कोर्ट के रुख की बात करें, तो विशेषज्ञों का कहना है कि 1990 से पहले सुप्रीम कोर्ट आरक्षण को मौलिक अधिकार से भी ऊपर मानता था और इसे आर्टिकल 14 का हिस्सा बताता था. लेकिन 1990 के बाद रुख बदला. 1997-98 में कोर्ट ने कहा कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि ‘इनेबलिंग प्रोविजन’ है. पहले ओपन कैटेगरी में आरक्षित लोगों को ‘डबल बेनिफिट’ के नाम पर रोका जाता था, लेकिन अब ये फैसला उस पर रोक लगाता है.ये फैसला ऐतिहासिक है और अब तक के रुख के उलट है, क्योंकि अब कोर्ट मेरिट को ज्यादा तवज्जो दे रहा है.

सरकारी नौकरी पर क्या असर पड़ेगा?

अब मुख्य बात ये है कि यह फैसला आपकी सरकारी नौकरी पर कैसे असर डालेगा? सबसे पहले अगर आप जनरल कैटेगरी से हैं, तो चिंता न करें. कोर्ट ने कहा है कि इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार नहीं छिनेंगे, बल्कि मेरिट का नियम मजबूत होगा. मतलब कंप्टीशन और टफ हो सकता है, क्योंकि अब SC/ST/OBC/EWS के टैलेंटेड कैंडिडेट भी जनरल सीट्स पर कंप्टीट करेंगे, लेकिन ये फेयर प्ले को बढ़ावा देगा क्योंकि सीट्स मेरिट पर जाएंगी, न कि सिर्फ जाति पर.अगर आप आरक्षित कैटेगरी से हैं तो ये आपके लिए गुड न्यूज है. अब आप बिना छूट के जनरल कट-ऑफ पार करके जनरल सीट पा सकते हैं जो पहले मुश्किल था, लेकिन याद रखें अगर फाइनल मेरिट में आपका स्कोर जनरल कट-ऑफ से कम रहता है तो आप अपनी आरक्षित कैटेगरी में ही क्लेम कर पाएंगे. कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के लिए गाइडलाइंस भी दी है जिसमें कहा गया है कि लिखित एग्जाम में अगर आप जनरल कट-ऑफ पार करते हैं तो इंटरव्यू में जनरल उम्मीदवार माने जाएंगे. इससे सरकारी जॉब्स और एडमिशन में दूरगामी असर होगा.मेधावी आरक्षित उम्मीदवारों को ज्यादा मौके मिलेंगे और ओवरऑल सिस्टम ज्यादा मेरिट-बेस्ड बनेगा.कुल मिलाकर ये फैसला बताता है कि सरकारी नौकरी में अब ‘अब जाति नहीं, मेरिट जरूरी’ है. ये आरक्षित वर्ग के लोगों को बड़ा हक देता है, लेकिन जनरल वालों को भी फेयर चांस सुनिश्चित करता है. अगर आप तैयारी कर रहे हैं तो मेरिट पर फोकस करें.

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