न मीलॉर्ड, न योर ऑनर, न जज साहब... सुप्रीम कोर्ट के जज को महिला ने कही ऐसी बात, वकील भी रह गए हैरान

22 hours ago

Last Updated:January 08, 2026, 10:07 IST

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवार कुत्ते के मामले पर सुनवाई चल रही थी. जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि बच्चों और बड़ों दोनों को कुत्ते काट रहे हैं और लगातार लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है. इस दौरान एक महिला ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को इस तरह संबोधित किया, जिसे सुनकर वहां खड़े वकील भी हैरान रह गए.

न मीलॉर्ड, न जज साहब...सुप्रीम कोर्ट के जजों को महिला ने कही ऐसी बात, सब हैरानमहिला ने अनजाने में अदालत की तय शिष्टाचार प्रक्रिया का उल्लंघन कर दिया, लेकिन इस पर पीठ की प्रतिक्रिया बेहद संवेदनशील और मानवीय रही. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान एक रोचक वाकया देखने को मिला. जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष पशु प्रेमी, पीड़ित पक्ष और विशेषज्ञ अपनी-अपनी दलीलें रख रहे थे. इसी दौरान एक महिला ने अनजाने में अदालत की तय शिष्टाचार प्रक्रिया का उल्लंघन कर दिया, लेकिन इस पर पीठ की प्रतिक्रिया बेहद संवेदनशील और मानवीय रही.

महिला ने सुप्रीम कोर्ट जजों को क्या कहा?

आवारा कुत्ते से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने के लिए अदालत का आभार जताया. अपनी बात रखते हुए उन्होंने पीठ को संबोधित करते हुए ‘You Guys’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया. कोर्ट रूस में यह सुनते ही मौजूद वकील चौंक गए, क्योंकि न्यायिक मर्यादा के तहत जजों को ‘मिलॉर्ड’, ‘योर लॉर्डशिप’ या ‘योर ऑनर’ कहकर संबोधित किया जाता है.

जब हुआ गलती का एहसास

महिला के इस संबोधन पर कुछ अधिवक्ताओं ने तुरंत उन्हें टोका और कोर्ट रूम के प्रोटोकॉल की जानकारी दी. अपनी भूल का एहसास होते ही महिला ने तत्काल माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी. हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ ने पूरे घटनाक्रम को बेहद सहजता और सौम्यता के साथ संभाला. उन्होंने महिला को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘कोई बात नहीं, यह ठीक है,’ और बिना किसी औपचारिक अड़चन के सुनवाई आगे बढ़ा दी.

अक्सर सुप्रीम कोर्ट में शिष्टाचार और प्रोटोकॉल को लेकर सख्ती देखी जाती है, लेकिन इस मामले में पीठ का मानवीय रुख चर्चा का विषय बन गया है. जस्टिस विक्रम नाथ के इस व्यवहार को यह संदेश देने वाला माना जा रहा है कि न्यायिक प्रक्रिया में शब्दों की तकनीकी शुद्धता से अधिक अहम आम नागरिक की भावना और उसकी बात को सुनना है.

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

बता दें कि आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई जारी रखेगा. कोर्ट इस मामले को और गहराई से जांचेगा और राज्यों द्वारा नियमों का पालन करने की स्थिति भी देखेगा. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश भर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी और नगर निगम अधिकारियों और स्थानीय निकायों द्वारा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता पर चिंता जताई थी.

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने क्या जताई चिंता?

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि बच्चों और बड़ों दोनों को कुत्ते काट रहे हैं और लगातार लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है. जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हमें पता है कि ये सब हो रहा है. बच्चों और बड़ों को कुत्ते काट रहे हैं, लोग मर रहे हैं. पिछले 20 दिनों में ही दो जजों का जानवरों से जुड़े सड़क हादसों से सामने हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर आवारा जानवरों की मौजूदगी सिर्फ काटने की समस्या नहीं है, बल्कि यह हादसों का भी एक बड़ा कारण है.

उधर पशु कल्याण समूहों का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नसबंदी और टीकाकरण के जरिए आबादी को कंट्रोल करना ही एकमात्र टिकाऊ समाधान है. उन्होंने चेतावनी दी कि कुत्तों को उनके इलाकों से अंधाधुंध हटाने से समस्या और बिगड़ सकती है. वहीं अधिकारियों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि गेटेड कम्युनिटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को वोटिंग से यह तय करने की अनुमति दी जानी चाहिए कि उनके परिसर में आवारा जानवरों को अनुमति दी जाए या नहीं. उन्होंने कहा कि जानवरों के प्रति दया निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकती.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

January 08, 2026, 10:07 IST

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