नई दिल्ली: भारत के कई शहरों में पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है. साफ पानी मिलना अब एक लग्जरी बन गया है. दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और इंदौर जैसे बड़े शहरों से डराने वाली खबरें आ रही हैं. कहीं नलों से सफ़ेद झाग वाला पानी निकल रहा है. कहीं कूड़े के पहाड़ों से रिसता ज़हर लोगों की जान ले रहा है. लोग अब अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. प्रदूषित पानी की वजह से कैंसर और हार्ट अटैक जैसी बीमारियां घर-घर पहुंच गई हैं. प्रशासन और सरकारें केवल आश्वासन देने में जुटी हुई हैं. लेकिन ज़मीन पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. इंदौर में हुई मौतों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. अब सवाल यह है कि क्या हमें साफ पानी के लिए पलायन करना होगा. News18इंडिया ने भारत के विभिन्न शहरों में जहरीले पानी का रियलटी चेक किया. पढ़ें एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट.
इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी ने ली जान, क्यों लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं?
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को सबसे साफ होने का गौरव प्राप्त है. लेकिन यहां के भागीरथपुरा इलाके की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. दूषित पानी पीने की वजह से यहां कई लोगों की मौत हो चुकी है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और मातम का माहौल है. हालात इतने खराब हैं कि लोग अब इंदौर छोड़कर भाग रहे हैं. मजदूर परिवार अपनी रोज़ी-रोटी छोड़कर वापस अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं. सागर ज़िले से आए कोरी परिवार की आपबीती सुनकर हर कोई हैरान है. शुभम कोरी राजवाड़ा की एक दुकान पर मामूली नौकरी करते थे. लेकिन उनके 5 साल के बेटे परीक्षित की तबीयत जहरीले पानी से बिगड़ गई. बच्चे को 5 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखना पड़ा और ऑक्सीजन लगानी पड़ी.
भागीरथपुरा में कथित तौर पर दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद एक नगर निगम कर्मचारी इलाके को सैनिटाइज करता दिखा. (PTI फोटो)
शुभम की 75 साल की मां प्रेम रानी न्यूज़ 18 के कैमरे पर फूट-फूटकर रोने लगीं. उन्होंने कहा कि पोते की ऐसी हालत देखकर वह बहुत डर गई हैं. अब वे लोग इंदौर में एक पल भी रुकना नहीं चाहते हैं. उनका कहना है कि जान बची तो दोबारा काम ढूंढ लेंगे. यह परिवार अब वापस सागर लौट रहा है क्योंकि यहां पानी मौत बांट रहा है. इंदौर की इस घटना ने पूरे प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है. लोग अब नगर निगम और जल विभाग पर भरोसा खो चुके हैं. दूषित पानी की वजह से लोग अब अपने ही शहर में रिफ्यूजी बन गए हैं. यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं बल्कि पूरे इलाके का दर्द है.
क्या गुरुग्राम के बंधवाड़ी का कूड़े का पहाड़ गांव वालों के लिए मौत का फरमान बन चुका है?
दिल्ली से सटे गुरुग्राम के बंधवाड़ी गांव में इन दिनों दहशत का माहौल है. यहां बना कूड़े का विशाल पहाड़ अब गांव वालों के लिए काल बन गया है. इस पहाड़ से एक काला और बेहद ज़हरीला पानी रिसता रहता है. इस जहरीले तरल को लीचेट कहा जाता है जो ज़मीन के अंदर जा रहा है. यह काला ज़हरीला पानी गांव के ग्राउंडवाटर में पूरी तरह मिक्स हो चुका है. इसकी वजह से गांव के लोग सालों से ज़हरीला पानी पीने को मजबूर हैं. यहां के पानी का रंग और गंध दोनों ही डराने वाले हैं. गांव के लोगों का कहना है कि जब से यह खत्ता बना है तब से बीमारियां बढ़ी हैं. जहरीले पानी की वजह से लोग कैंसर और हार्ट जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. गांव में कैंसर के करीब 50 मरीज आज भी अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं.
बंधवाड़ी के रहने वाले तेजराम की कहानी सुनकर रूह कांप जाती है. कुछ साल पहले उनकी पत्नी की मौत कैंसर की वजह से हो गई थी. अब तेजराम खुद भी दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. उन्होंने बताया कि गांव में कैंसर से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. लेकिन सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि लोग इस पर बात नहीं करना चाहते. गांव में बीमारी की बात फैलने से युवाओं के रिश्ते होने में दिक्कत आती है. लोग अपनी पहचान और बीमारी को छिपाने पर मजबूर हो गए हैं. घरों में बर्तन धोने से लेकर कपड़े धोने तक में इसी पानी का उपयोग होता है. कुछ गरीब परिवार तो मजबूरी में इसे पी भी रहे हैं. कूड़े के पहाड़ से उठने वाली बदबू ने सांस लेना भी दूभर कर दिया है.
गाजियाबाद के माधवपुरा और दिल्ली के बुराड़ी में नलों से निकलता बदबूदार झाग क्या बड़ा इशारा है?
दिल्ली के बुराड़ी इलाके में भी पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है. यहां के घरों में नलों से निकलने वाला पानी किसी जहर से कम नहीं है. पानी में इतना झाग होता है कि वह साबुन के घोल जैसा दिखाई देता है. लोगों ने इसकी शिकायत विधायक से लेकर पीएमओ तक को भेजी है. लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. लोग मजबूरी में गंदा और बदबूदार पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. बुराड़ी के निवासी कहते हैं कि पानी की वजह से त्वचा की बीमारियां बढ़ रही हैं. प्रशासन की अनदेखी ने लोगों के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. नलों से निकलता यह झाग सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है.
गाजियाबाद के माधवपुरा इलाके में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. यहां नगर निगम द्वारा सप्लाई किया जाने वाला पानी पीने लायक नहीं है. पानी से इतनी तेज़ बदबू आती है कि उसे पास रखना भी मुश्किल है. स्थानीय लोग इस पानी का उपयोग सिर्फ नहाने और सफाई के लिए करते हैं. पीने के लिए लोगों को बाहर से बोतल बंद पानी या प्लांट का पानी खरीदना पड़ता है. इससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर हर महीने अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है. इंदौर की घटना के बाद अब गाजियाबाद प्रशासन भी थोड़ा अलर्ट मोड में आया है. डीएम ने नगर आयुक्त को वार्डों में जाकर पानी के सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं. पिछले एक साल में गाजियाबाद के करीब 500 पानी के सैंपल फेल पाए गए थे.
नोएडा के सेक्टर 56 में TDS ने तोड़ा रिकॉर्ड, क्या जहरीला पानी सोखकर मौत परोस रही है जमीन?
नोएडा के पॉश इलाकों में भी पानी की स्थिति बहुत ही डरावनी पाई गई है. न्यूज़ 18 की टीम ने सेक्टर 56 में पानी का रियलटी चेक किया. यहां लिए गए वॉटर सैंपल्स की रिपोर्ट चौंकाने वाली और डराने वाली आई है. सबमर्सिबल वाटर का TDS लेवल 3 हज़ार के पार पहुंच चुका है. गंगाजल वॉटर सप्लाई का TDS भी 1200 से 1500 के बीच मिला है. जबकि पीने के पानी के लिए 120 से 150 के आसपास TDS होना चाहिए. हाई TDS वाला पानी पीने से किडनी और हड्डियों की गंभीर समस्याएं होती हैं. आरडब्ल्यूए अध्यक्ष संजय मावी ने बताया कि अथॉरिटी सिर्फ आश्वासन देती है. सेक्टर के पास खोड़ा कॉलोनी का सीवेज वेस्ट भी इसी तरफ आता है.
मौत का घूंट पी रही जनता: 3000 के पार पहुंचा नोएडा का TDS
ज़मीन के अंदर लगातार सीवेज का पानी रिसने से ग्राउंडवाटर ज़हरीला हो गया है. यहां के लोगों को डर है कि जल्द ही नोएडा के हालात भी इंदौर जैसे हो जाएंगे. दूषित पानी की वजह से लोगों के बाल झड़ रहे हैं और स्किन एलर्जी हो रही है. नलों में आने वाले गंदे पानी की वजह से बीमारियों का अंबार लग गया है. नालियों में बहता कचरा और लीकेज पाइपलाइन इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं. लोग अब महंगे आरओ सिस्टम लगवाने को मजबूर हैं. लेकिन इतने हाई TDS पर आरओ भी बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं. नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है.
कैसे पहचानें कि आपके घर का पानी जहरीला है?
पानी का प्रदूषण हमेशा आंखों से नहीं दिखता है. लेकिन कुछ आसान तरीकों से आप इसकी पहचान कर सकते हैं.
रंग और गंध: अगर पानी का रंग हल्का पीला या मटमैला है तो उसमें मेटल्स हो सकते हैं. पानी से सड़े हुए अंडे या क्लोरीन की तेज गंध आना खतरे का संकेत है. TDS मीटर का उपयोग: आप बाजार से एक सस्ता TDS मीटर खरीदकर पानी की शुद्धता चेक कर सकते हैं. अगर TDS 500 से ऊपर है तो वह पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. बर्तनों पर सफेद परत: अगर आपके बर्तनों या नलों पर सफेद रंग की पपड़ी जम रही है तो पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम ज्यादा है. झाग आना: अगर बिना साबुन लगाए पानी में झाग दिख रहा है तो उसमें केमिकल या सीवेज मिक्स हो सकता है.गांधीनगर में दूषित पानी से टाइफॉयड का तांडव, क्या लीकेज पाइपलाइन बन गई हैं सबसे बड़ा खतरा?
गुजरात की राजधानी गांधीनगर भी पानी के संकट से अछूती नहीं रही है. यहां पिछले 15 दिनों में टाइफॉयड के 133 मामले दर्ज किए गए हैं. शहर के आदिवाड़ा सहित कई इलाकों में गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें मिली हैं. नगर निगम की जांच में पता चला है कि पाइपलाइन में बड़े पैमाने पर लीकेज है. पूरे शहर में 30 से ज्यादा स्थानों पर पाइपलाइन टूटी हुई पाई गई है. इन लीकेज के जरिए सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है. टाइफॉयड फैलने की वजह से नगर निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. शहर में करीब 140 खाद्य लारियां और पानीपुरी के स्टॉल बंद करा दिए गए हैं.
लोग अब अपनी जान बचाने के लिए आरओ वाटर के कैन खरीदने को मजबूर हैं. गरीब वर्ग के लिए यह आर्थिक रूप से बहुत बड़ी मार साबित हो रही है. नगर निगम का दावा है कि मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. लेकिन सवाल यह है कि प्रशासन ने पहले से पाइपलाइनों का मेंटेनेंस क्यों नहीं किया. बीमारियां फैलने के बाद की जाने वाली यह कार्रवाई काफी देरी से हुई है. गांधीनगर की यह स्थिति दिखाती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी कैसे जानलेवा हो सकती है. लीकेज पाइपलाइन अब शहरों के लिए सबसे बड़ा साइलेंट किलर बन गई हैं.

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