Why did Venezuela not respond to the US attack: ट्रंप ने वेनेजुएला में अपना मकसद हासिल कर लिया है. वेनेजुएला से निकोलस मादुरो को सरेआम गिरफ्तार ट्रंप ने ये भी बता दिया है कि आज भी दुनिया में अमेरिकी पावर का डंका बजता है. ट्रंप का मिशन पूरा हुआ लेकिन एक सवाल छोड़ गया. सवाल ये कि आखिर अमेरिकी हमले का वेनेजुएला से प्रतिरोध क्यों नहीं हुआ. इस सवाल के उठने की वजह समझने के लिए आपको मादुरो के तख्तापलट से जुड़ी कुछ तस्वीरों के बारे में जानना होगा.
वेनेजुएला ने क्यों नहीं किया मुकाबला
वेनेजुएला की राजधानी काराकस समेत उसके दो और शहरों पर अमेरिकी वायुसेना के हमलों के वीडियो वायरल हैं. उन वीडियो को आप गौर से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि हमलों के दौरान अमेरिकी विमान और हेलीकॉप्टर काफी कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे . कुछ तस्वीरों को देखकर तो लगता है मानों अमेरिकी एयरक्राफ्ट जमीन से सिर्फ 200 या 250 फीट ही ऊपर उड़ रहे थे. इतनी कम ऊंचाई पर कोई भी जेट या हेलीकॉप्टर बेहद आसानी से हवाई रक्षा प्रणाली यानी एयर डिफेंस सिस्टम का शिकार बन सकता है लेकिन वेनेजुएला में ऐसा नहीं हुआ. वेनेजुएला के एयर डिफेंस ने अमेरिकी वायुसेना का रत्ती भर मुकाबला नहीं किया .
अगर ये हमला भूटान या आयरलैंड जैसे किसी देश पर हुआ होता तो बात समझ में आती. इन देशों के पास सेना तो है लेकिन हवाई रक्षा प्रणाली नहीं है. वेनेजुएला के मामले में ऐसा नहीं है. वेनेजुएला का एयर डिफेंस सिस्टम किस स्तर का है. ये भी आपको गौर से देखना चाहिए.
वेनेजुएला की सेना के पास दुनिया की उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियों में से एक S-300 की दो बटालियन यानी तकरीबन 12 लॉन्चर्स मौजूद हैं . इसके साथ ही साथ वेनेजुएला के पास 9 बक एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं. वेनेजुएला को रूस से पैंतसीर एयर डिफेंस सिस्टम भी मिला है. इसके साथ ही साथ छोटी दूरी पर विमानों या ड्रोन को टारगेट करने के लिए भी वेनेजुएला के पास एयर डिफेंस सिस्टम हैं.
S-300 जैसे घातक एयर डिफेंस कैसे हो गए फेल
ऐसा नहीं हो सकता कि वेनेजुएला की हवाई रक्षा की क्षमता का पता अमेरिकी सेना को नहीं रहा हो. S-300 जैसे घातक एयर डिफेंस होने के बावजूद अमेरिकी हेलीकॉप्टर और अटैक जेट इतनी नीची ऊंचाई पर उड़ रहे थे. इसी वजह से एक बड़ा सवाल उठ रहा है.
सवाल ये है कि क्या वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला पहले से फिक्स किया गया था. क्या ये सहमति पहले ही बना ली गई थी कि अमेरिकी हमले के दौरान वेनेजुएला की सेना की तरफ से कोई प्रतिरोध नहीं किया जाएगा. क्या इसी सहमति या यूं कहें कि फिक्सिंग की वजह से अमेरिकी एयरफोर्स ने इतनी कम ऊंचाई पर पहुंचकर घातक हमलों को अंजाम दिया.
क्या यूएस ने फिक्सिंग से किया हमला
जिस तरह बिना किसी प्रतिरोध के वेनेजुएला पर हमला किया गया और कुछ ही घंटों के अंदर ट्रंप के विरोधी निकोलस मादुरो को अगवा किया गया. ये दोनों तथ्य पहले से फिक्सिंग के शक को और ज्यादा बल देते हैं. बड़ी बात ये है कि अगर फिक्सिंग हुई तो ट्रंप से हाथ किसने मिलाया . अब हम इस थ्योरी का अगला विश्लेषण आपके सामने रखने जा रहे हैं.
चूंकि वेनेजुएला में विपक्ष बहुत कमजोर था तो उसके ट्रंप से हाथ मिलाने की संभावना ना के बराबर है. ऐसे में दो ही किरदार सामने बचते हैं. पहली है वेनेजुएला की सेना जिसने कथित सहमति के तहत अमेरिकी कार्रवाई का जवाब नहीं दिया और दूसरे हैं खुद निकोलस मादुरो. बहुत मुमकिन है कि मादुरो ने अपनी जिंदगी के बदले में कुर्सी छोड़ने और एक छोटी सैन्य कार्रवाई पर सहमति जता दी हो.
#DNAमित्रों | वेनेजुएला पर ट्रंप का हमला...'फिक्सिंग' है?.. जानिए वेनेजुएला के हथियार...कैसे 'धोखा' खा गए?#DNA #DNAWithRahulSinha #Venezuela #AirStrike #DonaldTrump #NicolasMaduro@RahulSinhaTV pic.twitter.com/dqAGT8uZWz
— Zee News (@ZeeNews) January 3, 2026
उपराष्ट्रपति के बयान से भी आशंकाओं को बल
वेनेजुएला के सरकार और सिस्टम पर शक जाने की वजह है वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति का वो बयान जिसमें उन्होंने अमेरिका को सख्त जवाब देने की बजाय सिर्फ मादुरो के जिंदा होने का सबूत मांगा है. मादुरो के अमेरिकी गिरफ्त में जाने के कुछ ही देर बाद ये खबरें भी फैलने लगी हैं कि मादुरो विरोधी मारिया कोरिना मचाडो को अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है. कुछ ही घंटों के अंदर बिना प्रतिरोध के हमला एक देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करना और नए राष्ट्रपति से जुड़ी अटकलें सामने आना. आप खुद इन बिंदुओं को जोड़िए और तय कीजिए कि ये फिक्सिंग नहीं तो और क्या है.

3 days ago
