'हमारा लेना-देना नहीं', ED की बात सुन जज बोले- आदेश देने से मुझे कोई नहीं रोक सकता, HC में क्या हुआ?

1 hour ago

Delhi HC on ED Delhi Liquor Case: दिल्ली शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसिदिया बरी हो चुके हैं. राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई मामले में उन्हें बरी कर दिया. मगर अब भी उनकी मुसीबत पूरी तरह टली नहीं है. सीबीआई के बाद अब ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दिल्ली हाईकोर्ट में आज यानी मंगलवार को ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई हुई. इस याचिका में ईडी ने शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य सभी आरोपियों को बरी करते समय ट्रायल कोर्ट द्वारा एजेंसी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की है. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई की. ईडी की ओर से एएसजी एसवी राजू पेश हुए.

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, ईडी की ओर से पेश हुए ASG राजू ने अपनी दलील शुरू की. उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट के जज की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि उस मामले में ईडी का कोई लेना-देना नहीं था. फिर भी ईडी को घसीटा गया. उन्होंने कहा कि जज साहब, सीबीआई के एक मामले में ED के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की गई हैं. इसके बाद सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए और उन्होंने कहा, ये टिप्पणियां किसी के भी खिलाफ नहीं हैं.

वहीं, चलिए जानते हैं कि कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

हाईकोर्ट: यह आदेश वैसे भी समीक्षा के दायरे में है, है ना? चलिए देखते हैं कि इसमें कौन-कौन से पैराग्राफ हैं.

ASG राजू ने ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी, 2026 के उस आदेश के कुछ पैराग्राफों की ओर कोर्ट का ध्यान दिलाया, जिसमें इस मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था.

बेंच: इसका इस विचाराधीन मामले से कोई लेना-देना नहीं है. मैं इस पर फैसला करूंगा. मैं इसे देख रहा हूं. मुझे इस मामले में जवाब तलब करने की ज़रूरत है. मैं देखूंगा कि ये टिप्पणियां सही हैं या गलत.

इसके बाद ASG राजू ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के बारे में कोर्ट को विस्तार से बताया.

ASG राजू: एक ऐसे मामले में ED के खिलाफ सीधे आरोप लगाए गए हैं, जिसमें ED कोई पक्षकार नहीं है और न ही उसका इससे कोई लेना-देना है.

ASG राजू: यह एक तीसरे पक्ष का मामला है, जिससे ED का कोई संबंध नहीं है. ऐसे में जज को इस तरह की टिप्पणियां करने का कोई अधिकार नहीं है.

बेंच: मैं यह देखना चाहता हूँ कि ये टिप्पणियां सामान्य प्रकृति की हैं या इनका इस मामले से कोई सीधा संबंध है.

बेंच: जज ने जो कुछ भी कहा है, वह इस विशिष्ट मामले के संदर्भ में नहीं था. ये तो सामान्य टिप्पणियां हैं, जो कुछ जज अक्सर करते रहते हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं.

ASG राजू: उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए थी और उसके बाद ही टिप्पणियां करनी चाहिए थीं. यहां तक कि सामान्य आरोप भी हम पर असर डालते हैं.

बेंच: क्या यह बात संबंधित मामले के संदर्भ में कही गई थी?

ASG राजू: जब मेरा मामला सुनवाई के लिए आएगा, तो इन टिप्पणियों का इस्तेमाल मेरे खिलाफ किया जाएगा. ED को बिना उसकी बात सुने ही दोषी ठहरा दिया गया है.

बेंच: इस मामले में मेरा सवाल यह है कि… ये टिप्पणियां तो सामान्य प्रकृति की हैं और इनका इस विचाराधीन मामले से कोई लेना-देना नहीं है.

इस बहस के बीच सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन भी प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए.

एडवोकेट हरिहरन: उन्होंने इन टिप्पणियों को उनके मूल संदर्भ से काटकर पेश किया है.

बेंच: क्या आप यह कहना चाहते हैं कि इनमें से कुछ पैराग्राफ विचाराधीन फैसले के संदर्भ में हो सकते हैं? वैसे भी यह पूरा फैसला ही चुनौती के दायरे में है; इसलिए जब मैं उस मामले पर फैसला करूंगा, तो मैं इस फैसले को पढ़ूँगा ही. मैं यह करना चाहता हूं कि इस मामले में एक नोटिस जारी करूं और इसकी सुनवाई उसी दिन रखूं, जिस दिन दूसरा मामला यानी सीबीआई वाला सुनवाई के लिए निर्धारित है.

एडवोकेट विक्रम चौधरी: कल उन्हें एक आदेश मिला था कि ED के मामले की सुनवाई स्थगित कर दी जाएगी. क्या उस समय ED कोर्ट के समक्ष उपस्थित था?

ASG राजू: मेरी एक बहुत ही सीधी-सादी गुज़ारिश है. यह एक सच है कि मेरी बात सुनी नहीं गई है. वे इसी बात का सहारा लेंगे.वे कहेंगे कि कोर्ट ने यह माना है कि ED ऐसा ही करती है.

ASG ने ज़ोर देकर कहा कि कि कोर्ट ऐसा आदेश दे सकता है कि इन टिप्पणियों पर भरोसा न किया जाए.

कोर्ट: मैं एक आदेश जारी करूंगा.

एडवोकेट हरिहरन: हमने कोई रियायत नहीं मांगी है.

कोर्ट: मुझे आदेश जारी करने से कोई नहीं रोक सकता. मुझे कोई यह नहीं बता सकता कि मुझे कौन सा आदेश जारी करना है. मैं वही आदेश जारी करूंगा, जो मैं जारी करना चाहता हूं और जो मुझे सही लगता है.

कोर्ट: जरा देखिए कि आप जज पर कितना दबाव डाल रहे हैं.

कोर्ट: सोमवार तक अपना जवाब फाइल करें.

एडवोकेट हरिहरन: हम कोशिश करेंगे सर. एक छोटी सी गुजारिश और है. क्या मुझे थोड़ा और समय दिया जा सकता है?

कोर्ट: ठीक है, हम यह मामला बुधवार को रखेंगे.

कोर्ट ने रेस्पोंडेंट्स से जवाब मांगा और मामले को अगले गुरुवार यानी 19 मार्च के लिए लिस्ट किया.

ईडी की याचिका में क्या-क्या है?

ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने आदेश देते समय एजेंसी के बारे में जो टिप्पणियां दर्ज की हैं, वे अनुचित हैं. एजेंसी की मानें तो इन टिप्पणियों को बिना उसकी बात सुने और केवल कयासों के आधार पर दर्ज किया गया है, जिससे उसकी जांच प्रक्रिया और छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ईडी ने अदालत से आग्रह किया है कि आदेश में दर्ज इन टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए, क्योंकि एजेंसी को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच मंगलवार को सुनवाई करेगी. माना जा रहा है कि अदालत इस मामले में दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी.

क्या है दिल्ली शराब वाला पूरा मामला?
गौरतलब है कि यह मामला तत्कालीन आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू की गई दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 से संबंधित है, जिसे बाद में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था. सीबीआई ने आरोप लगाया था कि यह नीति कुछ निजी शराब कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, जिसके बदले में कथित तौर पर चुनावी उद्देश्यों के लिए अग्रिम रिश्वत ली गई थी, जिनमें साउथ ग्रुप भी शामिल है. सीबीआई ने यह भी दावा किया कि नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में अनियमितताओं के कारण लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ मिला और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ. हालांकि, निचली अदालत ने एजेंसी के व्यापक साजिश के सिद्धांत को खारिज कर दिया और कहा कि उस समय के रिकॉर्ड से पता चलता है कि यह नीति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परामर्श और विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई थी.

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