CJI Suryakant on West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले पर आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. बंगाल एसाईआर यानी विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य प्रक्रिया मामले में सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हैं. इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत गुस्से में दिखे. उन्होंने न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने वालों को कड़ी फटकार लगाई. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाकर हद पार कर दी है. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने वाले याचिकाकर्ताओं को कड़ी चेतावनी दी. इससे एक दिन पहले सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि क्या हमारे पास बंगाल के अलावा और कोई काम नहीं है.
‘सिस्टम पर भरोसे की कमी का संदेश’
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं सिस्टम पर भरोसे की कमी का गलत संदेश देती हैं. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त शब्दों में कहा, ‘अब यह खेल शुरू हो जाता है… कुल 52 लाख लोगों का मामला है. यह एक समय से पहले दायर की गई याचिका है.’
दरअसल, आज मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को बताया गया कि 10 लाख लोगों का काम हो चुका है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जहां तक आप लोगों का सवाल है, इंतजार कीजिए और देखिए. एडवांस में याचिका दाखिल करना यह गलत संकेत देता है कि आपको सिस्टम पर भरोसा नहीं है.’
‘आपने हद पार कर दी’, सीजेआई सूर्यकांत हुए नाराज
उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ताओं ने न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाकर हद पार कर दी है. उन्होंने आगे कहा, ‘याचिकाकर्ता ऐसी अर्जी दाखिल करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मैं इस पर सख्त चेतावनी जारी कर रहा हूं.’
सीजेआई सूर्यकांत ने क्या टिप्पणी की?
CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास वैध मतदान का अधिकार है, उन्हें शामिल किया जाएगा, जबकि अवैध रूप से शामिल लोगों को बाहर किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘जो लोग वास्तविक और वैध मतदाता हैं, उन्हें शामिल किया जाएगा. जो घुसपैठिए हैं, उन्हें बाहर किया जाएगा.’ कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में नियमों और प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
चलिए जानते हैं बंगाल एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं. कोर्ट को बताया गया कि अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं और झारखंड सहित अन्य राज्यों के अधिकारियों को भी ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है. अदालत ने कहा कि एहतियात के तौर पर राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि न्यायिक अधिकारियों के कामकाज के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी हाईकोर्ट के आधिकारिक टेलीग्राम ग्रुप में रियल-टाइम आधार पर साझा की जा रही है.मामले पर विचार करते हुए अदालत ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
1. चुनाव आयोग (ECI) यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी अनिवार्य नया कदम ऐसा न उठाया जाए जो प्रक्रिया में बाधा डाले, जब तक कि मुख्य न्यायाधीश (CJ) की मंजूरी न हो.
2. पोर्टल में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी बाधाएं न आएं.
3. नए लॉग-इन आईडी तुरंत बनाए जाएं ताकि कामकाज प्रभावित न हो.
4. याचिकाकर्ताओं ने यह मुद्दा उठाया कि जिन लोगों के नाम शामिल करने के दावे खारिज हो जाते हैं, उनके लिए अपील का क्या तंत्र होगा? इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी (JO) के फैसले के खिलाफ किसी प्रशासनिक निकाय के सामने अपील नहीं होगी.
अब कौन करेगा सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दो पूर्व हाईकोर्ट जज या मौजूदा हाईकोर्ट जजों की बेंच गठित कर सकते हैं, जो अपीलों पर सुनवाई करेगी. इसके लिए चुनाव आयोग को एक अधिसूचना जारी कर इस अपीलीय निकाय की जानकारी प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया है.

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