नई दिल्ली: भारत की युवा शक्ति ने बीते एक दशक में ऐसा बदलाव देखा है, जिसने देश की आर्थिक और तकनीकी तस्वीर ही बदल दी है. कभी सरकारी और निजी नौकरियों के पीछे दौड़ने वाला युवा अब खुद उद्यमी बनकर हजारों लोगों को रोजगार दे रहा है. इस बदलाव के केंद्र में है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्टार्टअप इंडिया योजना, जिसने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप हब में बदल दिया है.
साल 2016 में शुरू हुई यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं रही, बल्कि देश में इनोवेशन और उद्यमिता का बड़ा आंदोलन बन चुकी है. 2026 में योजना के 10 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “10 साल, एक विजन और लाखों सफलता की कहानियां” बताया. आज आंकड़े भी इस बदलाव की कहानी खुद बयां कर रहे हैं.
स्टार्टअप इंडिया ने कैसे बदली तस्वीर
साल 2014 तक भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम बेहद सीमित था. उस समय देश में करीब 500 स्टार्टअप्स थे और यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या महज 4 थी. लेकिन स्टार्टअप इंडिया योजना लागू होने के बाद स्थिति तेजी से बदली. 2026 तक भारत में 2 लाख से ज्यादा DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और करीब 125 यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी हो चुकी हैं.
सिर्फ 2025 में ही करीब 44,000 नए स्टार्टअप्स रजिस्टर्ड हुए, जो किसी भी एक साल में सबसे ज्यादा संख्या है. आज भारतीय स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, मोबिलिटी और सेमीकंडक्टर जैसे हाईटेक सेक्टर्स में दुनिया को चुनौती दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन साफ था युवा नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने.
रोजगार के नए दरवाजे खोल रही योजना
स्टार्टअप इंडिया योजना का सबसे बड़ा असर रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिला है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यह इकोसिस्टम अब तक 21 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुका है. योजना के तहत युवाओं को सीड फंडिंग, टैक्स में छूट, आसान पेटेंट प्रक्रिया और निवेश के नए अवसर उपलब्ध कराए गए.
इसके अलावा स्टार्टअप इंडिया हब के जरिए युवाओं को मेंटरशिप, इनक्यूबेशन सपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच दिलाई गई. खास बात यह रही कि महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया, जिससे यह इकोसिस्टम अधिक समावेशी बन सका.
देहरादून के राजत जैन की सफलता बनी मिसाल
स्टार्टअप इंडिया की सफलता को समझने के लिए देहरादून के युवा उद्यमी राजत जैन की कहानी अहम उदाहरण मानी जा रही है. उन्होंने इस योजना के सहयोग से एक पोर्टेबल ECG डिवाइस विकसित किया, जो दूरदराज इलाकों में दिल की बीमारियों की जांच को सस्ता और आसान बनाता है.
फर्स्टपोस्ट और न्यू केरला की रिपोर्ट के अनुसार, राजत ने बताया कि स्टार्टअप इंडिया उनके लिए पहला मार्गदर्शन प्लेटफॉर्म बना. उन्हें ट्रेडमार्क, पेटेंट फाइलिंग, सीड फंडिंग और DST समर्थित इंक्यूबेटर से तकनीकी सहयोग मिला. प्रधानमंत्री मोदी के साथ वर्चुअल मीटिंग में भी उन्होंने इस योजना की भूमिका की सराहना की.
एक दर्दनाक घटना से जन्मी इनोवेशन की कहानी
YourStory (जून 2025) और द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक राजत के दोस्त की हार्ट अटैक से अचानक मौत ने उन्हें यह डिवाइस बनाने के लिए प्रेरित किया. परिवार और मेडिकल समुदाय की शुरुआती आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.
राजत द्वारा बनाया गया ‘स्पंदन’ डिवाइस 99.7% सटीकता के साथ मिनटों में हार्ट रिस्क का अलर्ट देता है. यह डिवाइस शार्क टैंक इंडिया में भी चर्चा का केंद्र बना और सभी निवेशकों से डील हासिल करने में सफल रहा. आज यह तकनीक खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रही है.
मोदी सरकार की दूरदर्शिता और वैश्विक पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन साफ था युवा नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने. स्टार्टअप इंडिया योजना ने नियमों को सरल बनाया, फंडिंग सिस्टम को मजबूत किया और स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच उपलब्ध कराया. आज भारतीय स्टार्टअप्स IPO लॉन्च कर रहे हैं, विदेशी निवेश आकर्षित कर रहे हैं और भारत को वैश्विक इनोवेशन हब बना रहे हैं. स्टार्टअप इंडिया ने आत्मनिर्भर भारत के सपने को नई गति दी है.

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