हाल ही में अमेरिका में एक बड़ा क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल की मीटिंग हुई, जिसमें भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हिस्सा लिया. अमेरिका ने ये फोर्ज अलायंस यानि रणनीतिक संसाधन सहयोग मंच चीन का मुकाबला करने के लिए बनाया है ताकि दुनियाभर में चीन के रेयर अर्थ के एकाधिकार को चुनौती दी जा सके.
ये 55 देशों का संगठन है. इसमें भारत भी खासतौर पर शामिल है. आखिर ये संगठन क्या करेगा. भारत की इसमें क्या भूमिका होगी. अचानक रेयर अर्थ यानि क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका दुनिया में बढ़ गई है.
क्रिटिकल मिनरल्स क्या हैं, क्या रेयर अर्थ से अलग हैं?
- क्रिटिकल मिनरल्स वो खनिज हैं जो किसी देश के आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और उन्नत तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इनकी सीमित उपलब्धता या आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम के कारण इनकी निरंतर उपलब्धता खतरे में रहती है.
रेयर अर्थ एलिमेंट्स आवर्त सारणी के 17 विशिष्ट तत्वों का समूह हैं, जैसे लैंथेनम, सेरियम और नियोडिमियम, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों में उपयोग होते हैं. ये क्रिटिकल मिनरल्स का भी एक हिस्सा हैं, लेकिन क्रिटिकल मिनरल्स की श्रेणी इससे व्यापक है – सभी रेयर अर्थ क्रिटिकल हैं, पर सभी क्रिटिकल मिनरल्स रेयर अर्थ नहीं.
क्रिटिकल मिनरल्स में कौन कौन सी धातुएं आती हैं और रेयर अर्थ में कौन सी. उनका काम क्या है?
- भारत सरकार ने 30 क्रिटिकल मिनरल्स की आधिकारिक सूची जारी की है, जिसमें कई धातुएं और तत्व शामिल हैं जो रिन्यूएबल ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं. इनमें अधिकांश धातुएं हैं, जबकि कुछ गैर-धातु भी हैं.
क्रिटिकल मिनरल्स (भारत की सूची) –
कोबाल्ट – इलैक्ट्रिक व्हीकलबैटरी, सुपरकंडक्टर
तांबा – इलेक्ट्रिक वायरिंग
निकेल – स्टेनलेस स्टील, बैटरी
लिथियम – रिचार्जेबल बैटरी
मोलिब्डेनम – स्टील अलॉय
नियोबियम – सुपरकंडक्टर, स्टील
टाइटेनियम – एयरोस्पेस, मेडिकल
टंगस्टन – कटिंग टूल्स, फिलामेंट
वैनेडियम – स्टील स्ट्रेंथनिंग
कैडमियम – बैटरी, पिगमेंट
पूरी सूची बैरिलियम, बिस्मथ, गैलियम, जैरीमेनियम, हाफनियम, इंडीयम, प्लेटिनम ग्रुप, रेनियम, टांटुलम, टिन, जिरकोमनियम आदि भी शामिल हैं. वहींरेयर अर्थ क्रिटिकल मिनरल्स का ही एक सबसेट हैं.
रेयर अर्थ एलिमेंट्स – रेयर अर्थ क्रिटिकल मिनरल्स का हिस्सा हैं. ये 17 लैंथेनाइड तत्वों का समूह हैं, जो दुर्लभ नहीं होते लेकिन इनकी प्रोसेसिंग कठिन है. इसमें लैंथेनम, सेरियम, प्रासियोडिमियम, नियोडिमियम, और सैमेरियम मुख्य हैं.
भारी रेयर अर्थ – यूरोपियम, गैडोलिनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, होलमियम, इरबियम, थूलियम, ल्यूटेशियम, इट्रियम,स्कैंडियम.
फोर्ज अलायंज क्या है और क्या करेगा?
- फोर्ज अलायंज वास्तव में कोई पुराना गठबंधन नहीं है, बल्कि एक नयी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा पहल है जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके साझीदार देशों ने रेयर अर्थ की सप्लाई चैन और सहयोग के लिए शुरू किया है. ये पहल दुनिया भर के क्रिटिकल मिनरल्स यानी उच्च-तकनीक, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन जैसी उन्नत तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की आपूर्ति शृंखला को स्थिर, विविध और सुरक्षित बनाना चाहता है.
क्या ये अलायंस इसलिए बनाया गया कि रेयर अर्थ पर चीन के एकाधिकार को खत्म करना है
- हां कहा जा सकता है लेकिन बात केवल रेयर अर्थ तक सीमित नहीं है. फोर्ज अलायंस का बड़ा मक़सद चीन के उस एकाधिकार और वर्चस्व को तोड़ना है, जो उसने क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई-चेन पर बना लिया है. रेयर अर्थ इसका सबसे चर्चित हिस्सा हैं, मगर अकेले वही नहीं.
चीन का असली वर्चस्व क्या है?
- चीन की ताक़त जमीनी खनिज से ज़्यादा उनकी प्रोसेसिंग में है. हालांकि दुनिया के 60 फीसदी रेयर अर्थ की माइनिंग वहीं होती है. इसकी 90 फीसदी प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग भी चीन में ही होती है. लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, मैग्नेट्स – सभी में चीन निर्णायक स्थिति में है. यही वजह है कि अगर चीन सप्लाई रोके या शर्तें बदले, तो ईवी, सेमीकंडक्टर, मिसाइल, ड्रोन, विंड टरबाइन सब अटक सकते हैं.
तो FORGE Alliance असल में किसलिए है?
- अमेरिका और उसके साझीदारों ने खुलेतौर पर कहा है कि समस्या है, इस मामले में चीन का एकाधिकार समस्या पैदा करता है. इस वजह से फोर्ज का गठन हुआ कि इससे चीन के क्रिटिकल मिनरल्स पर एकाधिकार को तोड़ा जाए. फोर्ज के तीन असली लक्ष्य हैं
– चीन पर निर्भरता घटाना
– खनन + प्रोसेसिंग + मैन्युफैक्चरिंग को अलग-अलग देशों में फैलाना
– सप्लाई-चेन को राजनीतिक दबाव से मुक्त करना
इसलिए ये गठबंधन केवल रेयर अर्थ का नहीं बल्कि लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, कॉपर जैसे सभी महत्वपूर्ण खनिजों को कवर करता है.
तो क्या इसे “चीन-विरोधी गठबंधन” कह सकते हैं?
- डिप्लोमेटिक भाषा में नहीं लेकिन जियो-पॉलिटिकल सच्चाई में हां. अमेरिका, यूरोप, जापान, भारत सभी ने कहा कि ये एंटी चाइना नहीं है बल्कि खुद को सक्षम करने की पहल है. हालांकि ये तथ्य है कि अगर चीन का दबदबा न होता, तो फोर्ज की ज़रूरत ही नहीं पड़ती.
ये भारत के संदर्भ में क्यों अहम है?
- भारत ने खुद माना है कि रेयर अर्थ और बैटरी मिनरल्स में एक देश पर बहुत ज्यादा निर्भरता एक रणनीतिक जोखिम है. इसी वजह से जयशंकर ने इस पहल का समर्थन किया और कहा कि सप्लाई-चेन का डाइवर्सिफिकेशन अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है.
फोर्ज अब सदस्य देशों के बीच क्या करेगा?
- ये सदस्य देशों के बीच नीति-निर्माण, निवेश और प्रोजेक्ट स्तर पर सहयोग को तेज़ करेगा. खनिजों के स्थिर सप्लाई नेटवर्क को तैयार करेगा. दुनियाभर में अब क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है.
इस फोर्ज के सदस्य कौन कौन से देश हैं?
- मुख्य अंतरराष्ट्रीय सदस्य – अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन और यूरोपीयन यूनियन. इसमें लातीनी अमेरिकी देश शामिल हैं. एशिया से भारत, जापान, साउथ कोरिया, मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और कजाखस्तान इसमें शामिल हैं.
भारत की भागीदारी फोर्ज में कैसे बढ़ रही है?
- भारत पहले केवल खनिजों का स्रोत था, अब वो वैश्विक नीति सहयोग, प्रौद्योगिकी भागीदारी, सप्लाई-चेन सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ा रहा है
भारत में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ की क्या स्थिति है?
- भारत के पास दुनिया में सबसे बड़े रेयर अर्थ भंडारों में एक है, ये उसके पास 6.9 मिलियन टन तक मोनाज़ाइट खनिज के रूप में है, जिसमें कई रेयर अर्थ मिलते हैं. ये भंडार मुख्यतः ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पाया गया है. सरकार ने बड़े नई भंडार खोज भी की है. भारत संसाधन के मामले में दुनिया में ऊपर है.
भारत में प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग की कितनी क्षमता है?
- भारत प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग में अभी मजबूत नहीं है, खासकर उन्नत तकनीकी स्तर पर. अत्यधिक शुद्धता वाली बैटरी-ग्रेड लिथियम, रेयर अर्थ मैगनेट आदि की आधुनिक और कमर्शियल-स्केल प्रोसेसिंग क्षमता बहुत सीमित है. उच्च गुणवत्ता रिफाइनिंग के लिए आधुनिक संयंत्रों की कमी है. इसका मतलब यह है कि भारत के पास खनिजों का स्रोत्र है लेकिन आधुनिक प्रोसेसिंग-रिफाइनिंग में वो अभी पीछे है.

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