Last Updated:February 11, 2026, 19:08 IST
मुंह का कैंसर भारत में काफी आम है, हालांकि इसका इलाज भी यहां मौजूद है और अगर इस कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाता है तो इसे पूरी तरह जड़ से खत्म किया जा सकता है. लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि भारत में इस कैंसर का पता लोगों को अक्सर तीसरी और चौथी स्टेज में चलता है. उससे पहले तक मरीज कैंसर के लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं.

मेरे पापा की उम्र 45 साल है और उन्हें जब मुंह के कैंसर का पता चला तो तीसरी स्टेज थी. उनके गाल के अंदर बस एक घाव हुआ था जो अचानक ही कुछ महीनों में तेजी से बढ़ता चला गया. फिलहाल इलाज चल रहा है, कीमोथेरेपी हो रही है, क्या ये ठीक हो सकता है? क्या वे लंबा जीवन जी सकते हैं?
यह सवाल एक कैंसर मरीज के बेटे ने News18hindi के व्हाट्सएप ग्रुप https://wa.me/+918076349631 पर पूछा है, आपका भी सेहत से जुड़ा ऐसा कोई सवाल हो तो पूछ सकते हैं. हम एक्सपर्ट से जवाब लेकर आप तक पहुंचाएंगे.
आइए मरीज के इस सवाल पर देश के टॉप ऑन्कोलॉजिस्टों सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्याम अग्रवाल और हेड एंड नेक कैंसर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुल्तान ए प्रधान से जानते हैं जवाब.
डॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं कि भारत में मुंह का कैंसर कोई दुर्लभ बीमारी नहीं है. देश में होने वाले कुल कैंसर मामलों में लगभग एक-तिहाई मामले मुंह के कैंसर के होते हैं. यह एक छिपी हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है. मुंह की जांच आसानी से की जा सकती है, फिर भी देश में 70–80 फीसदी मामले तब पता चलते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है. यानि या तो स्टेज 3 में या स्टेज 4 में.
ऐसी स्थिति में मरीज के पांच साल तक जीवित रहने की संभावना 30 फीसदी से भी कम रह जाती है. जबकि अगर बीमारी शुरुआती पहले या दूसरे चरण में पकड़ी जाए, तो 80 फीसदी से ज्यादा मरीज ठीक हो सकते हैं.
डॉ. श्याम आगे कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि लोग लक्षण दिखने के बाद भी 3 से 7 महीने तक इलाज के लिए विशेषज्ञ अस्पताल नहीं पहुंचते.शुरुआत में मुंह के घाव छोटे और बिना दर्द के होते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. इसी वजह से इलाज से ठीक होने वाली बीमारी गंभीर रूप ले लेती है.
वहीं डॉ. सुल्तान ए प्रधान का कहना है कि स्क्रीनिंग (जांच) कार्यक्रम बहुत फायदेमंद साबित हुए हैं. नियमित जांच से मौत के मामलों में 24–30 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है, क्योंकि कैंसर बनने से पहले ही बीमारी पकड़ में आ जाती है. मोबाइल जांच यूनिट और कैंपों से भी लोगों में शुरुआती लक्षण पहचानने में मदद मिली है.
भारत में 90 फीसदी से ज्यादा मुंह के कैंसर के मामले तंबाकू के सेवन से जुड़े हैं, खासकर गुटखा, खैनी और सुपारी जैसे बिना धुएं वाले तंबाकू से. शराब पीने से खतरा और बढ़ जाता है.अब एचपीवी संक्रमण भी युवाओं में चिंता का कारण बन रहा है, खासकर उन लोगों में जो तंबाकू नहीं लेते.
मुंह का कैंसर पुरुषों में सबसे आम कैंसर है और महिलाओं में भी यह शीर्ष पांच कैंसरों में शामिल है. हालांकि मुंह का कैंसर रोका जा सकता है, समय पर पकड़ा जा सकता है और शुरुआती अवस्था में पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है.असली नुकसान इलाज की लागत से नहीं, बल्कि इलाज में देरी से होता है.
ये आ गई नई तकनीक
डॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं कि कैंसर के इलाज में अब नई तकनीक आ रही है. डीएनए की गहराई से जांच (डीप सीक्वेंसिंग) करके इलाज तय किया जाएगा. अब 5 मिमी से छोटे ट्यूमर भी पहचाने जा सकेंगे. भविष्य में मरीजों से पूछा जाएगा कि उनका ctDNA टेस्ट नेगेटिव है या नहीं. उन्होंने कहा कि भारत की लैब्स और शोधकर्ताओं को भी इस तकनीक को अपनाना चाहिए, क्योंकि दूसरे देशों में यह आम हो रही है.
About the Author
प्रिया गौतमSenior Correspondent
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्...और पढ़ें
Location :
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
February 11, 2026, 19:08 IST

2 hours ago
