Last Updated:January 15, 2026, 09:32 IST
पहली स्लीपर वंदेभारत 17 जनवरी को चलने वाली है. इसमें खास सुविधाएं हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर सफर का अनुभव दिया जा सके. आपको पता है कि पहली वंदेभारत चेयरकार की तुलना में स्लीपर में क्या -क्या बदलाव हुए हैं. कितनी अलग है स्लीपर वंदेभारत ट्रेन.जानें
स्लीपर ट्रेन में किए गए हैं कई बदलाव.Vande Bharat Sleeper And First Chair Car. वंदे भारत स्लीपर 17 जनवरी से शुरू होने वाली है. यह वंदेभारत सिरीज की पहली ऐसी ट्रेन होगी जो लंबी दूरी की यात्रा कराएगी. ट्रेर से ओवरनाइट जर्नी होगी. इसमें आम यात्रियों को पहले की तुलना बेहतर सफर कराने के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं. पर क्या आपको पता है कि यह स्लीपर ट्रेन पहली वंदेभारत चेयरकार कार से कितनी अलग है? आइए जानें –
देश की पहली वंदे भारत ट्रेन सबसे नई दिल्ली से भगवान शिव की नगरी काशी के बीच चली. यह ट्रेन फरवरी 2019 में चलाई गयी है. नई दिल्ली से इस ट्रेन को प्रधानमंत्री ने झंडी दिखाकर रवाना किया था और तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल स्वयं दिल्ली से वाराणसी तक सफर किया था.
अब पहली स्लीपर वंदेभारत दो राज्यों को जोड़ने का काम करेगी, जो गुवाहाटी और कोलकाता के बीच चलेगी. पिछले सात सालों में दोनों ट्रेनों में बड़े बदलाव हुए हैं.
क्या हुए बदलाव
क्लास और क्षमता कैसी है
स्लीपर में 1एसी, 2एसी, 3एसी बर्थ हैं (कुल 16 कोच, 823 बर्थ). जबकि दिल्ली-वाराणसी वाली में मुख्यतः सीसी (चेयर कार) और ईसी (एग्जीक्यूटिव चेयर कार) हैं. इसमें 1128 लोगों के बैठने की क्षमता थी.
बर्थ आरामदायक बनाई गयी हैं.
सुविधाओं में क्या बदला
स्लीपर में रीजनल फूड (असम से असमिया, कोलकाता से बंगाली) दिया जाएगा. वहीं इसमें कोई इमरजेंसी कोटा नहीं है. कचव तकनीका का इस्तेमाल किया गया. इस वह से सेफ्टी और प्राइवेसी मिलेगी. वहीं पहली वंदे भारत में पारपंरिक फूड था. वहीं लोगों को लंबी दूरी भी बैठकर तय करनी पड़ती थी.
स्पीड और डिजाइन में क्या है फर्क
दोनों सेमी-हाई स्पीड हैं, लेकिन स्लीपर वाली का टेस्ट स्पीड 180 किमी/घंटा में किया गया. सर्विस स्पीड 130 किमी/घंटा होगी, लंबी दूरी के लिए बेहतर सस्पेंशन डिजाइन किया गया है. पहली वंदे भारत का औसत स्पीड 95 किमी/घंटा ही है. इसका सस्पेंशन स्लीपर के मुकाबले कमजोर है.
सामान रखने की क्या है व्यवस्था
स्लीपर ट्रेन में ओवरहेड रैक, बर्थ के नीचे स्टोरेज और कोच एंट्री के पास बड़े बैग के लिए जगह. इस तरह अगर आपके पास ज्यादा सामान है तो चिंता की बात नहीं है. सारा सामान एडजस्ट हो जाएगा. साथ ही आपास के यात्रियों को परेशानी नहीं होगी. जबकि चेयरकार में केवल ओवरहेड रैक ही होते थे.
आटोमैटिक दरवाजों में क्या बदला
स्लीपर में ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टिब्यूल का इस्तेमाल किया गया है. एक कोच से दूसरे कोच में जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे लगे हुए हैं, जिससे आसानी से आ सकते हैं. जबकि चेयरकार में ऐसा नहीं है, केवल एक ही गेट होता है.
Location :
New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
January 15, 2026, 09:32 IST

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