अमेरिका तो 37 घंटे बॉम्बर उड़ाकर ईरान पर हमला कर सकता है लेकिन सवाल यह है कि जिस तरह से तेहरान जवाबी कार्रवाई की बात कर रहा है क्या उसकी मिसाइलें अमेरिका पहुंच पाएंगी? इसे समझने के लिए दुनिया का मैप देखना होगा. ईरान की लोकेशन और अमेरिका का मेनलैंड देखिए. ईरान के पास करीब 6 लाख एक्टिव सुरक्षाकर्मियों की फौज है. यह दुनिया के 20 पावरफुल सैन्य ताकतों में 16वें पायदान पर आता है. इसके पास लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम भी है लेकिन अमेरिका तक पहुंचना आसान नहीं है. फिर अमेरिका को जवाब क्या देगा ईरान?
वास्तव में तेहरान के पास पश्चिम एशिया में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का एक बड़ा शस्त्रागार है. इसमें क्रूज और एंटी-शिप मिसाइलें भी शामिल हैं. बैलिस्टिक मिसाइलें 2000 किमी तक मार कर सकती हैं. इसका मतलब यह हुआ कि ईरान की धरती से अगर वेस्ट की तरफ मिसाइल दागी जाए तो वह इजरायल समेत पूरे पश्चिम एशिया पर टारगेट को भेद सकती है. लेकिन अमेरिका तो बहुत दूर है. अमेरिका का पूर्वी तट ईरान से 11,000 किमी दूर है. इस तरह से देखें तो ईरानी मिसाइल एक चौथाई दूरी भी तय नहीं कर पा रही है. (मैप में बना सर्किल ईरान के 2000 किमी से लेकर 2500 किमी की रेंज को दिखाता है)
शेजिल मिसाइल कहां तक मार करेगी?
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो मौजूद हैं जिसमें ईरान की शेजिल मिसाइल की ताकत बताई जाती है. हालांकि इसकी रेंज भी 2500 किमी से ज्यादा नहीं है. वह अपनी सैन्य परेड में हथियारों का प्रदर्शन करता है. उसके शाहिद (शहीद) ड्रोन यूक्रेन में रूस के द्वारा इस्तेमाल किए गए हैं. सूडान संघर्ष में भी ईरानी ड्रोन दिखे. ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को नॉर्थ कोरिया, रूस और चीन से मदद मिलती रही है. अब सवाल यह है कि अगर अमेरिका न हमला किया तो ईरान जवाब कैसे देगा?
अमेरिका को पता है
हां, तेहरान की मारक क्षमता को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने अड्डों को खाली करना शुरू कर दिया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान ने क्षेत्र के पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर वॉशिंगटन ने हमला किया तो वह अमेरिका अड्डों को निशाना बनाएगा.
ईरान की जद में अमेरिका के अड्डे
1. पश्चिम एशिया के देश बहरीन में अमेरिकी नेवी के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है. इसके दायरे में गल्फ, लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर का भी कुछ हिस्सा है.
2. कतर में 59 एकड़ में फैला अल उदेद एयरबेस है जो यूएस सेंट्रल कमांड का अड्डा है. यह मिस्र से लेकर पूर्व में कजाकिस्तान तक नजर रखता है. यह पश्चिम एशिया में सबसे बड़ा यूएस बेस है जहां करीब 10 हजार जवान तैनात हैं.
3. कुवैत में 40 किमी के इलाके में इराकी सीमा के पास अमेरिकी सेना के कई बेस हैं.
4. यूएई में अल धाफरा एयर बेस राजधानी अबू धामी के दक्षिण में है. यह अमेरिक एयरफोर्स का एक बड़ा हब है जिसने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई है.
5. इराक के अनबर प्रांत में एन-एल असद एयरबेस पर भी अमेरिका की मौजूदगी है. यहां अमेरिका इराकी सेना और नाटो मिशन की हेल्प करता रहा है.
6. सऊदी अरब में करीब 2000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. ये रियाद से 60 किमी दूर प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हैं.
7. जॉर्डन में राजधानी अम्मान से 100 किमी की दूरी पर अल साल्टी एयर बेस पर अमेरिकी एयरफोर्स की मौजूदगी है.
8. तुर्की के अदाना प्रांत के इनसर्लिक एयरबेस पर अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. बताया जाता है कि यहां अमेरिकी न्यूक्लियर वॉरहेड भी मौजूद हैं. तुर्की में 1500 के करीब अमेरिकी सैनिक तैनात हैं.

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