ED vs I-PAC: बंगाल में लोकतंत्र नहीं भीड़तंत्र; सुप्रीम कोर्ट में ईडी की जोरदार दलील, देखते रह गए कपिल सिब्बल

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Last Updated:January 15, 2026, 12:11 IST

ED Raid AT IPAC: आईपैक मामले में ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिका दायर किया है. ईडी का कहना है कि कोलकाता में तलाशी अभियान के दौरान ईडी अधिकारियों को गलत तरीके से प्रतिबंधित करने के खिलाफ यह याचिका दायर की है. यह याचिका पश्चिम बंगाल और मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर की गई है. ईडी के तीन अधिकारी जो कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल में थे. उनकी ओर से यह याचिका दायर की गई है. दायर याचिका पर ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार को पक्षकार बनाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. ईडी ने दायर याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में हस्तक्षेप और बाधा डालने का आरोप लगाया है. ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मौके पर पहुची और अहम दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साथ ले गई, जिससे जांच प्रभावित हुई है.

बंगाल में लोकतंत्र नहीं भीड़तंत्र; SC में ईडी की दलील, देखते रह गए सिब्बलबंगाल में लोकतंत्र नहीं भीड़तंत्र; SC में ईडी की दलील, देखते रह गए सिब्बल

आईपैक बनाम ईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज यानी गुरुवार को सुनवाई हुई. आई-पैक (I-PAC) से जुड़े छापों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह याचिका किस आधार पर विचार करने योग्य है? इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने खूब दलीलें दीं.

ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि– यह एक बेहद चौंकाने वाला पैटर्न सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जब-जब वैधानिक प्राधिकरणों ने अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया, मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर पहुंच गईं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने पूछा कि– यह याचिका किस आधार पर विचारणीय है। इस पर SG मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ निदेशक, आयुक्त भी मौके पर मौजूद थे और वे सभी सहयोगी की तरह व्यवहार कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे रहे। SG ने यह भी बताया कि एक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से आहत है और आइटम 28 अधिकारियों की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले संयुक्त निदेशक, CBI के घर का घेराव किया गया था और पत्थरबाजी भी हुई थी।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी पेश हुए।

SG मेहता ने आगे कहा कि ऐसे ठोस सबूत मौजूद थे, जिनसे यह निष्कर्ष निकलता है कि एक परिसर में आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी। स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद DGP, मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त, क्षेत्र के DCP और बड़ी संख्या में पुलिस बल वहां पहुंचा और बिना अधिकार के सामग्री उठा ली गई। उन्होंने इसे चोरी का अपराध बताया। SG के अनुसार, ED अधिकारी का मोबाइल फोन भी ले लिया गया और मुख्यमंत्री मीडिया के सामने भी गईं।

SG मेहता ने चेतावनी दी कि— इस तरह की घटनाएं अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन से रोकेंगी और केंद्रीय बलों का मनोबल गिराएंगी।

उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि एक मिसाल कायम की जाए और छापे के दौरान मौजूद अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए जाएं।

इस पर जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि— क्या अदालत निलंबन का आदेश दे।

SG मेहता ने स्पष्ट किया कि– वह सीधे निलंबन का आदेश नहीं मांग रहे हैं, बल्कि सक्षम प्राधिकारी को ऐसा करने का निर्देश देने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस मुख्यमंत्री के साथ इस उद्देश्य से आई थी ताकि एकत्रित साक्ष्य उनकी निगरानी में हटाए जा सकें।

ED के तरफ से कोलकाता हाईकोर्ट में कल की सुनवाई और उससे जुड़े परेशानियों का भी किया गया जिक्र

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि कल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक याचिका दाखिल की थी। उन्होंने बताया कि मामले की सुनवाई शुरू होने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश (CJI) को यह आदेश पारित करना पड़ा कि– केवल वही वकील अदालत में उपस्थित होंगे, जो इस मामले से सीधे जुड़े हुए हैं।

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Shankar Pandit

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First Published :

January 15, 2026, 12:11 IST

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