Last Updated:January 15, 2026, 10:07 IST
नए श्रम कानून लागू होने से आईटी कंपनियों का खर्चा बढ़ गया है. देश की तीन बड़ी कंपनियों (TCS, Infosys, HCLTech) को दिसंबर 2025 वाली तिमाही में 4,373 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा है. ब्रोकरेज फर्म्स अब ये आशंका जता रही हैं कि कंपनियां इस लागत को कम करने के लिए सैलरी ग्रोथ रेट कम कर सकती है. खासकर सीनियर लेवल पर कम सैलरी ग्रोथ का इम्पेक्ट ज्यादा दिख सकता है.

दिसंबर 2025 में खत्म हुई तिमाही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक (HCLTech) को करीब 4,373 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का फटका लगा है. यह खर्च नए श्रम कानूनों (Labour Code) को लागू करने से जुड़ा था. इसी वजह से इन तीनों दिग्गज कंपनियों के मुनाफे में 2 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई. 14 जनवरी को इंफोसिस ने अपने तिमाही नतीजों में बताया कि उसे 1,289 करोड़ रुपये का असाधारण खर्च झेलना पड़ा. कंपनी के अनुसार, नए नियमों की वजह से ग्रेच्युटी की देनदारी बढ़ी है और कर्मचारियों की छुट्टियों का भी दोबारा हिसाब लगाना पड़ा. इसी तरह 12 जनवरी को टीसीएस ने 2,128 करोड़ रुपये और एचसीएस टेक ने 956 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा खर्च घोषित किया.
अगर मार्जिन यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट की बात करें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है. टीसीएस ने तमाम लागतों के प्रेशर के बावजूद अपना ऑपरेटिंग मार्जिन 25.2 प्रतिशत पर स्थिर रखा. HCLTech ने भी मामूली सुधार के साथ मार्जिन 18.6 प्रतिशत तक पहुंचा दिया, लेकिन इंफोसिस को झटका लगा. उसका मार्जिन पिछली तिमाही के 21 प्रतिशत से गिरकर 18.4 प्रतिशत रह गया. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि अगर लेबर कोड से जुड़ा खर्च न होता, तो उसका मार्जिन करीब 21.2 प्रतिशत रहता. तीनों कंपनियों का कहना है कि आने वाली तिमाहियों में इसका असर सीमित रहेगा, और अनुमानित प्रभाव सिर्फ 10 से 20 बेसिस प्वाइंट तक ही होगा.
टीसीएस ने इस बारे में क्या कहा?
टीसीएस के मुताबिक, जो 2,128 करोड़ रुपये का खर्च हुआ है उसमें से लगभग 1,800 करोड़ रुपये ग्रेच्युटी के लिए और करीब 300 करोड़ रुपये छुट्टी से जुड़ी देनदारी के समायोजन में गए हैं. टीसीएस के सीएफओ समीर सेकसारिया ने पोस्ट-अर्निंग कॉल में कहा, “यह सब पिछली सेवाओं से जुड़ा खर्च है और यह आगे भी चलता रहेगा. इसका असर बहुत ज्यादा नहीं (लगभग 10 से 15 बेसिस प्वाइंट के दायरे में) होगा. जब तक नियमों में और स्पष्टता नहीं आती, हमें किसी अतिरिक्त बड़े खर्च की उम्मीद नहीं है.”
इंफोसिस और HCL टेक की तरफ से क्या बयान आया?
इंफोसिस के सीएफओ जयेश संघराजका ने भी माना कि इस बदलाव का सालाना आधार पर लगभग 15 बेसिस प्वाइंट का असर पड़ेगा. उन्होंने कहा, “आगे बढ़ते हुए यह लेबर कोड का नियमित प्रभाव रहेगा.” वहीं HCLTech ने बताया कि उसे करीब 109 मिलियन डॉलर का एकमुश्त खर्च उठाना पड़ा. कंपनी के सीईओ सी विजयकुमार ने नोएडा में आयोजित अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस में कहा, “लेबर कोड के तहत आगे चलकर खर्च बहुत सीमित रहेगा. यह लगभग 10 से 20 बेसिस प्वाइंट के बीच रह सकता है.”
क्या सोचती हैं ब्रोकरेज फर्म?
ब्रोकरेज फर्मों की राय कंपनियों से जरा अलग है. जेफरीज जैसी ब्रोकरेज का मानना है कि इसे सिर्फ एक बार का खर्च मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनका अनुमान है कि आगे चलकर आईटी कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ेगा, जिससे सैलरी ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो सकती है. नए नियमों के अनुसार कर्मचारियों का वेतन कम से कम कुल पैकेज (CTC) का 50 प्रतिशत होना चाहिए, और पीएफ व ग्रेच्युटी जैसे लाभ इसी वेतन के आधार पर तय होंगे. इससे कंपनियों का नियमित खर्च बढ़ेगा और एक बार में बड़ा वित्तीय असर भी पड़ेगा.
सीनियरों की सैलरी में कम ग्रोथ संभव!
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “नए लेबर कोड धीमी रेवेन्यू ग्रोथ, एआई आधारित बिजनेस मॉडल में बदलाव और वित्त वर्ष 2027-28 में H-1B वीजा नियमों के कारण बढ़ने वाली ऑनसाइट सैलरी के साथ मिलकर मार्जिन पर और दबाव डालेंगे.” रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि अगर भारतीय कर्मचारियों की लागत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो इससे वित्त वर्ष 2027 की कमाई के अनुमान में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. कंपनियां इस दबाव को आंशिक रूप से सीनियर स्तर पर सैलरी बढ़ोतरी कम करके संतुलित करने की कोशिश कर सकती हैं.
नए लेबर कोड में क्या-क्या?
नवंबर 2025 से लागू हुए नए लेबर कोड का मकसद कर्मचारियों को बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सुविधाएं देना है. आईटी और आईटीईएस सेक्टर के लिए इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं. जैसे तय अवधि की नौकरी में भी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, अनिवार्य नियुक्ति पत्र, बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी, काम के निर्धारित घंटे और महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की सुविधा, ताकि वे अधिक कमाई कर सकें.
कुल मिलाकर, नए लेबर कानून कर्मचारियों के हित में जरूर हैं, लेकिन कंपनियों के लिए यह एक नई वित्तीय चुनौती बनकर सामने आए हैं. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आईटी दिग्गज इस संतुलन को कैसे साधते हैं.
कर्मचारियों के लिए नए लेबर कोड्स के फायदे
बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50% होगी. PF और ग्रैच्युटी में ज्यादा योगदान जमा होगा. रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर बड़ी सुरक्षित रकम मिलेगी. टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है. बची हुई छुट्टियां अगले साल के लिए जोड़ सकेंगे. जरूरत पड़ने पर लीव एनकैशमेंट की सुविधा मिलेगी. गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा. डिलीवरी पार्टनर्स को बीमा और हेल्थ कवर मिलेगा. फ्रीलांसर्स सरकारी योजनाओं के दायरे में आएंगे. महिलाओं को सभी शिफ्ट में काम करने की आजादी मिलेगी. कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी. समान काम के लिए समान वेतन सख्ती से लागू होगा. कर्मचारियों का नियमित हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा. हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा. नौकरी से जुड़े अधिकारों का कानूनी सबूत मिलेगा.About the Author
मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे ...और पढ़ें
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First Published :
January 15, 2026, 10:07 IST

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