Last Updated:January 15, 2026, 10:08 IST
NEET PG 2025: नीट पीजी परीक्षा भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण मेडिकल परीक्षाओं में से एक है. लेकिन पिछले कुछ समय से यह विवादों और अदालती कार्यवाहियों के केंद्र में है. नीट पीजी परीक्षा की पारदर्शिता, कट-ऑफ में भारी गिरावट और काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर हंगामा मचा हुआ है.
NEET PG 2025: नीट पीजी परीक्षा विवादों के घेरे में हैनई दिल्ली (NEET PG 2025). देशभर के डॉक्टर और नीट पीजी अभ्यर्थी केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) के चौंकाने वाले फैसले से आक्रोश में हैं. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने 9,000 से अधिक खाली सीटों को भरने के लिए क्वॉलिफाइंग कट-ऑफ घटाकर बहुत कम (कुछ श्रेणियों के लिए लगभग शून्य) कर दी है. इस फैसले ने चिकित्सा जगत में नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या सीटें भरने के लिए डॉक्टरों की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है?
वहीं दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट में लंबित ‘परीक्षा पारदर्शिता’ से जुड़ी याचिका ने भी माहौल को गरमा दिया है. अभ्यर्थी लंबे समय से रिस्पॉन्स शीट, आंसर-की और स्कोर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं. 15 जनवरी 2026 को काउंसलिंग की अहम समय सीमा खत्म हो रही है, जिससे उन स्टूडेंट्स की धड़कनें बढ़ी हुई हैं जो अपनी सीटें छोड़ना चाहते हैं या अंतिम राउंड में हिस्सा लेना चाहते हैं. इन तकनीकी और नीतिगत बदलावों के कारण नीट पीजी 2025 ‘बैटलफील्ड’ बन गई है.
नीट पीजी कट-ऑफ में गिरावट: क्या गुणवत्ता से समझौता?
सबसे बड़ा बवाल नीट पीजी कट-ऑफ पर्सेंटाइल को लेकर है. अधिकारियों के अनुसार, सरकारी और निजी कॉलेजों में पीजी की हजारों सीटें खाली रह जाने के कारण कट-ऑफ में भारी ढील दी गई है. विशेषज्ञों का तर्क है कि अगर बहुत कम या शून्य अंक पाने वाले स्टूडेंट्स भी विशेषज्ञ डॉक्टर (MD/MS) बनेंगे तो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठ रहा सवाल
नीट पीजी परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई थी. स्टूडेंट्स का आरोप है कि दोनों पालियों के प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में बड़ा अंतर था. स्कोर को बराबर करने के लिए अपनाई गई ‘नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया’ अपारदर्शी रही है. उम्मीदवारों का दावा है कि उनके अपेक्षित और वास्तविक अंकों में 100-150 अंकों का फासला देखा गया, जिससे रैंक पूरी तरह बदल गई.
नीट पीजी आंसर की में पारदर्शिता का अभाव
लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की आंसर-की जारी की जाती है. इससे उम्मीदवारों को अपने रिजल्ट का अंदाजा लग जाता है. लेकिन NBE ने लंबे समय तक नीट पीजी की ऑफिशियल आंसर-की और प्रश्न पत्र साझा नहीं किए. उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि जब तक यह डेटा सार्वजनिक नहीं होता, तब तक मूल्यांकन की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
नीट पीजी काउंसलिंग और NRI सीटों का मुद्दा
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने हाल ही में नीट पीजी के भारतीय उम्मीदवारों को अपनी नागरिकता ‘NRI’ में बदलने का विकल्प दिया है. इससे खाली पड़ी महंगी सीटों को भरा जा सकेगा. सामान्य वर्ग के उम्मीदवार इसे अपनी हकमारी मान रहे हैं क्योंकि इससे मेरिट वाले छात्रों के बजाय आर्थिक रूप से मजबूत छात्रों को लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
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First Published :
January 15, 2026, 10:08 IST

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