नई दिल्ली (How to Become Pilot). अक्सर माना जाता है कि 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स पढ़ने वाले ही पायलट बन सकते हैं. आर्ट्स और कॉमर्स के स्टूडेंट्स इस मलाल में रह जाते हैं कि काश उन्होंने विज्ञान विषय चुना होता. लेकिन मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम और एविएशन सेक्टर की बढ़ती मांग ने यह धारणा बदल दी है. मौजूदा दौर में कॉकपिट तक पहुंचने के लिए केवल 12वीं की मार्कशीट ही अंतिम फैसला नहीं करती, बल्कि आपकी मेहनत और सही जानकारी भी मायने रखती है.
भारत में कमर्शियल पायलट बनने के लिए DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के कुछ अनिवार्य नियम हैं, जिनमें 12वीं स्तर की फिजिक्स और मैथ्स की जानकारी होना जरूरी है. सरकार और एयरलाइंस ने ‘नॉन-साइंस’ बैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्स के लिए खास रास्ता तैयार किया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) और प्रमुख एयरलाइंस के कैडेट पायलट प्रोग्राम्स ने अब आर्ट्स और कॉमर्स वालों के लिए भी आसमान का रास्ता खोल दिया है.
बिना साइंस बैकग्राउंड के पायलट कैसे बनें?
पायलट बनने के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) की जरूरत होती है. DGCA के नियमानुसार, उम्मीदवार के पास 12वीं कक्षा में फिजिक्स और मैथमेटिक्स विषय होने चाहिए. आर्ट्स और कॉमर्स स्टूडेंट्स के पास ये विषय नहीं होते हैं. लेकिन NIOS ( Institute of Open Schooling) के पास इसके लिए भी समाधान है.
NIOS का ‘ऑन-डिमांड’ परीक्षा मॉडल
अगर आपने आर्ट्स या कॉमर्स से 12वीं कर ली है तो आप NIOS के जरिए केवल उन दो विषयों (फिजिक्स और मैथ्स) की परीक्षा दे सकते हैं, जिनकी कमी है.
आप ‘ऑन-डिमांड’ परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. परीक्षा पास करने के बाद आपक ‘इक्विवेलेंसी सर्टिफिकेट’ या मार्कशीट मिलती है, जिसे DGCA पूरी तरह मान्यता देता है. इसके बाद आप अपनी पुरानी मार्कशीट और इन नए विषयों के अंकों के आधार पर पायलट ट्रेनिंग के लिए पात्र (Eligible) हो जाते हैं.Cadet Pilot Programs: एयरलाइंस के कैडेट पायलट प्रोग्राम
इंडिगो (IndiGo), एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी एयरलाइंस अब ‘कैडेट पायलट प्रोग्राम’ चलाती हैं. जो लोग एविएशन में स्टेबल करियर चाहते हैं, उनके लिए ये प्रोग्राम बेस्ट हैं.
चयन प्रक्रिया: इसमें लिखित परीक्षा, एप्टीट्यूड टेस्ट और इंटरव्यू होता है. ट्रेनिंग: एयरलाइन खु वर्ल्ड लेवल फ्लाइंग स्कूल में ट्रेनिंग दिलवाती है. फायदा: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आपको उसी एयरलाइन में सीधे ‘फर्स्ट ऑफिसर’ के रूप में नौकरी मिलने की गारंटी (अक्सर) होती है. योग्यता: अगर आप NIOS से फिजिक्स-मैथ्स क्लियर कर लेते हैं तो आप इन प्रोग्राम्स के लिए भी आवेदन कर सकते हैं.फ्लाइंग क्लब और DGCA की परीक्षाएं
एक बार जब आपके पास अनिवार्य विषय हो जाते हैं तो आपको किसी भी फ्लाइंग क्लब में एडमिशन लेना होता है. इसके साथ ही आपको DGCA की तरफ से आयोजित ग्राउंड सब्जेक्ट्स की परीक्षाएं (जैसे- एयर नेविगेशन, एयर मेटियोरोलॉजी, एयर रेगुलेशन) पास करनी होती हैं. आर्ट्स के स्टूडेंट्स भी सही कोचिंग के साथ इन विषयों को आसानी से समझ सकते हैं. इनमें सारा खेल लॉजिक और गणनाओं का है.
पायलट के लिए मेडिकल टेस्ट
पायलट बनने के लिए विषयों की डिग्री या सर्टिफिकेट के साथ-साथ फिजिकली फिट होना भी अनिवार्य है. पायलट के तौर पर जॉइन करने के लिए DGCA की तरफ से मान्यता प्राप्त डॉक्टर्स से क्लास 2 और फिर क्लास 1 मेडिकल टेस्ट करवाना होता है. इसमें आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य की गहन जांच की जाती है.
पायलट बनने से जुड़े 5 महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)
क्या NIOS की मार्कशीट को DGCA स्वीकार करता है?
हां, DGCA अधिकारिक रूप से NIOS के सर्टिफिकेट को मान्यता देता है.
पायलट ट्रेनिंग में कितना खर्च आता है?
भारत या विदेश में CPL लेने का खर्च ₹40 लाख से ₹60 लाख के बीच हो सकता है. कैडेट प्रोग्राम का खर्च ₹80 लाख से ₹1 करोड़ तक जा सकता है, लेकिन इसमें नौकरी की गारंटी होती है.
क्या कॉमर्स का छात्र सीधे CPL के लिए आवेदन कर सकता है?
नहीं, उसे पहले NIOS या किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से फिजिक्स और मैथ्स के पेपर पास करने होंगे.
पायलट बनने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
CPL प्राप्त करने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है.
क्या आंखों का चश्मा होने पर पायलट बन सकते हैं?
हां, बशर्ते चश्मे के साथ आपकी दृष्टि 6/6 हो और कोई ‘कलर ब्लाइंडनेस’ न हो.
सही गाइडेंस और NIOS जैसे ऑप्शन के साथ आर्ट्स और कॉमर्स के स्टूडेंट्स भी कॉकपिट में बैठकर देश-दुनिया की सैर कर सकते हैं.

2 hours ago
