Last Updated:January 19, 2026, 12:54 IST
IPS Jitendra Rana Investigation on NEET Student Case: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने एक बार फिर से नया मोड़ ले लिया है. 5 जनवरी की रात से लेकर 19 जनवरी तक इस घटना ने कई करवटें बदली हैं. चित्रगुप्त नगर थाना के एसएचओ, एएसपी और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के बाद अब इस केस की कमान आईपीएस अधिकारी जितेंद्र राणा के हाथों में आ गई है. वही राणा जो साल 2015 में पटना के एसएसपी रहते सड़कों पर AK-47 लेकर उतर गए थे. जहानााबाद की मासूम लड़की के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दरिंदगी की आशंका और शरीर पर जख्मों के निशान मिलने के बाद पूरे बिहार में आक्रोश है. पूरे बिहार की नजर 'नो नॉनसेंस' IPS जितेंद्र राणा के नेतृत्व में गठित एसआईटी पर है.
जानें आईपीएस जितेंद्र राणा के कारनामे.IPS Jitendra Rana Investigation on Patna NEET Student Case: पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत पर सड़कों पर आक्रोश है. पटना सहित कई शहरों में कैंडल मार्च निकले जा रहे हैं. सोशल मीडिया भी नीट छात्रा की खबरों और वीडियो से पटा हुआ है. इस केस की सच्चाई लाने के लिए जो लोग भी लड़ रहे हैं, उनका दावा है कि आने वाले दिनों में जहानाबाद की निर्भया की आग की लपटें देश की राजधानी दिल्ली में भी प्रवेश कर सकती हैं. दिल्ली के इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकालने की तैयारी शुरू हो गई है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिस तरह से बिहार पुलिस की शुरुआती जांच ने उसके साख को बट्टा लगाया है, क्या पटना रेंज के आईजी और इस मामले में गठित एसआईटी के हेड जितेंद्र राणा की जांच दूध का दूध और पानी का पानी करेगा? कौन हैं आईपीएस जितेंद्र राणा और इसी पटना शहर में साल 2015 में एसएसपी रहते सड़कों पर AK-47 लेकर क्यों उथरे थे?
बिहार पुलिस के सामने एक ऐसी गुत्थी है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक हाई-प्रोफाइल जांच में बदल चुका है. इस जांच की कमान सौंपी गई है बिहार के कड़क और ईमानदार छवि वाले आईपीएस अधिकारी जितेंद्र राणा को. पूरे बिहार की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या जितेंद्र राणा उस सच को सामने ला पाएंगे जिसे रसूखदार और सिस्टम के कुछ हिस्से दबाने की कोशिश कर रहे हैं
कौन हैं IPS जितेंद्र राणा, जिन पर टिकी है सबकी उम्मीद?
जितेंद्र राणा 2005 बैच के बिहार कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं. वर्तमान में वह पटना रेंज (सेंट्रल रेंज) के आईजी यानी पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात हैं. जितेंद्र राणा की छवि एक नो-नॉनसेंस ऑफिसर की रही है. हाल ही में वह दिल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ में अपनी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी कर बिहार लौटे हैं. उन्हें उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता है. एक बार पटना में दंगाई माहौल को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने खुद AK-47 उठाकर मोर्चा संभाला था. जब नीट छात्रा के मामले में पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठे, तो बिहार के गृह विभाग और डीजीपी विनय कुमार ने इस केस की निगरानी का जिम्मा आईजी राणा को ही सौंपा. उनके नेतृत्व में गठित एसआईटी से अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
जहानाबाद की रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा पटना में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी कर रही थी. वह चित्रगुप्त नगर के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी. 6 जनवरी 2026 को वह अपने कमरे में बेसुध मिली थी. आनन-फानन में उसे एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत बिगड़ने पर उसे जय प्रभा मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. शुरुआती तौर पर पुलिस ने इसे नींद की गोलियां खाने से जुड़ा आत्महत्या का मामला बताया, लेकिन परिजनों के आरोपों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी पलट दी.
5 जनवरी से अब तक क्या हुआ?
5 जनवरी 2026: छात्रा छुट्टियों के बाद जहानाबाद से पटना लौटती है. दोपहर 3:05 बजे उसे पटना जंक्शन पर देखा गया और 3:19 बजे वह हॉस्टल पहुँच गई. 6 जनवरी 2026: छात्रा अपने कमरे में संदिग्ध अवस्था में बेसुध पाई गई. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस को कमरे से नींद की गोलियां मिलीं. 11 जनवरी 2026: इलाज के दौरान छात्रा ने दम तोड़ दिया. परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ हॉस्टल में कुछ गलत हुआ है. 12 जनवरी 2026: परिजनों और छात्रों ने पटना के करगिल चौक पर प्रदर्शन किया. पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे मामला और गरमा गया. 16 जनवरी 2026: पटना मेडिकल कॉलेज (PMCH) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई. रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया क्योंकि इसमें छात्रा के शरीर पर 10 जगहों पर चोट और खरोंच के निशान पाए गए. रिपोर्ट में ‘यौन हिंसा’ की आशंका से इनकार नहीं किया गया. 16 जनवरी की रात: बिहार सरकार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया. 17 जनवरी 2026: आईजी जितेंद्र राणा खुद दलबल के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुँचे. उन्होंने कमरे को सील करवाया और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए.पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस का विरोधाभास
इस केस में सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से आया. जहां स्थानीय पुलिस और शुरुआती डॉक्टर ओवरडोज या टाइफाइड की थ्योरी दे रहे थे, वहीं पीएमसीएच की रिपोर्ट ने शरीर पर संघर्ष के निशान और नाखूनों की खरोंच मिलने की पुष्टि की. परिजनों का आरोप है कि एक निजी अस्पताल के डॉक्टर और पुलिस ने साक्ष्यों को मिटाने और मामले को दबाने की कोशिश की. परिजनों ने इसे सामूहिक दुष्कर्म और हत्या करार दिया है.
अब तक की कार्रवाई और आगे की राह
आईजी जितेंद्र राणा ने मामले की कमान संभालते ही कड़े तेवर दिखाए हैं. हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस अब छात्रा के उन 14 मिनटों स्टेशन से हॉस्टल पहुंचने के बीच और हॉस्टल के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर (DVR) की बारीकी से जांच कर रही है. जितेंद्र राणा ने आश्वासन दिया है कि ‘अनुसंधान में प्रगति हो रही है और जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.’ बिहार को अब आईपीएस जितेंद्र राणा की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है. जितेंद्र राणा साल 2015 में पटना में दंगा भड़ने की स्थिति पर खुद एके-47 लेकर पटना की सड़कों पर उतरे थे. अनंत सिंह सहित कई मामलों को बड़ी चतुराई से हैंडल किया था. अब राणा पर जहानाबाद की बेटी का सच लाने की बड़ी जिम्मेदारी है.
First Published :
January 19, 2026, 12:54 IST

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