अमेरिका का ईरान पर हमला: क्या बढ़ेंगे घरेलू एलपीजी और सीएनजी गैस के दाम?

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Last Updated:March 02, 2026, 18:18 IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर अब ऊर्जा बाजारों पर साफ दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं. भारत, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल और गैस आयात करता है, दबाव में है. विशेषज्ञों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए जोखिमों की चेतावनी दी है.

 क्या बढ़ेंगे घरेलू एलपीजी और सीएनजी गैस के दाम?Zoom

अमेरिका के ईरान के हमले से एलपीजी और सीएनजी गैस के दाम बढ़ सकते हैं. (Image:AI)

नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर अब सीधे ऊर्जा बाजारों पर दिखने लगा है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे भारत की ऊर्जा कंपनियां सतर्क हो गई हैं. भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल और लगभग 50 प्रतिशत एलएनजी आयात करता है. ऐसे में अगर तनाव लंबा खिंचता है तो देश के लिए ऊर्जा लागत में तेज बढ़ोतरी तय मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात ने कीमत और सप्लाई दोनों से जुड़े जोखिम बढ़ा दिए हैं. इसके कारण घरेलू एलपीजी और सीएनजी गैस के दाम भी बढ़ सकते हैं.

भारत के सामने तीन बड़े खतरे
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक कॉरपोरेट इंडिया इस समय तीन बड़े जोखिमों से जूझ सकता है. पहला, अगर भू-राजनीतिक तनाव जल्दी नहीं थमा तो तेल की कीमतें 75 डॉलर से ऊपर टिक सकती हैं. हालांकि हालात सामान्य होने पर 2026 में औसत कीमत 65-70 डॉलर रहने का अनुमान है, लेकिन लंबा संघर्ष इसे और ऊपर धकेल सकता है. दूसरा खतरा सप्लाई चेन से जुड़ा है, क्योंकि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा देता है. इससे भी बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से भारत के लगभग आधे तेल और गैस आयात गुजरते हैं.

होर्मुज में रुकावट से बढ़ेगा समय और खर्च
यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बाधा आती है तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते घुमाकर भेजना पड़ सकता है. इससे न सिर्फ यात्रा का समय बढ़ेगा, बल्कि माल ढुलाई और बीमा खर्च भी काफी बढ़ जाएगा. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है. एलएनजी की उपलब्धता भी सीमित हो सकती है, जिससे बिजली और उर्वरक जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ेगा.

OPEC+ की नीति से सीमित राहत की उम्मीद
OPEC+ ने 2026 की पहली तिमाही में उत्पादन बढ़ोतरी रोक दी है, हालांकि अप्रैल से करीब 0.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की मामूली बढ़ोतरी की योजना है. इससे कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन सऊदी अरब और यूएई के बाहर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता सीमित है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र से वास्तविक सप्लाई कितनी सुचारू रहती है, उसी पर कीमतों की दिशा तय होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीति और वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से काम करना होगा.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

March 02, 2026, 18:18 IST

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