कभी थे जानी दुश्‍मन, अब बन गए हमसाया, ओडिशा में BJD ने क्‍यों मिलाया कांग्रेस से हाथ?

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कभी थे जानी दुश्‍मन, अब हमसाया, ओडिशा में BJD ने क्‍यों मिलाया कांग्रेस से हाथ

Last Updated:March 02, 2026, 13:48 IST

Odisha Rajya Sabha Chunav: सच ही कहा गया है कि राजनीति में न दोस्‍त और न ही दुश्‍मन स्‍थाई होते हैं. ओडिशा की राजनीति में यह बात एक बार फिर से सच साबित‍ हुई है. कभी एक दूसरे के राजनीतिक विरोधी माने जाने वाले बीजेडी और कांग्रेस ने राज्‍यसभा चुनावों के लिए हाथ मिला लिया है.

कभी थे जानी दुश्‍मन, अब हमसाया, ओडिशा में BJD ने क्‍यों मिलाया कांग्रेस से हाथZoom

ओडिशा में कभी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही कांग्रेस और बीजेडी ने राज्‍यसभा चुनाव के लिए हाथ मिला लिया है. (फाइल फोटो)

Odisha Rajya Sabha Chunav: ओडिशा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है. 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए चार सीटों पर मुकाबला होना है, और इसी बीच नवीन पटनायक ने अपनी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) की ओर से दो उम्मीदवारों की घोषणा कर सियासी समीकरण बदल दिए हैं. दिलचस्प यह है कि विधानसभा में पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद बीजद ने एक ‘कॉमन कैंडिडेट’ उतारकर भाजपा को रणनीतिक चुनौती दी है. कांग्रेस ने भी इस ‘कॉमन फेस’ को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.

ओडिशा विधानसभा की 147 सदस्यीय सदन में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास 79 विधायक हैं. साथ ही तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे हासिल है. दूसरी ओर, बीजद के पास 48 विधायक बचे हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 14 विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का एक विधायक है. राज्यसभा सांसद चुनने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 30 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है. संख्या बल के हिसाब से भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजद के पास एक सीट सुनिश्चित करने लायक संख्या है. चौथी सीट के लिए मुकाबला खुला माना जा रहा है. वर्तमान में इन चार सीटों में से दो भाजपा और दो बीजद के पास हैं.

बीजद का दांव

नवीन पटनायक ने अपने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में अपने राजनीतिक सचिव संत्रिप्‍त मिश्रा को मैदान में उतारा है. वहीं, दूसरी सीट के लिए प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को ‘कॉमन कैंडिडेट’ घोषित किया है. पटनायक ने अपने निवास नवीन निवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि डॉ. होता ओडिशा के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं, जो ओडिशा हेल्थ यूनिवर्सिटी के पहले कुलपति रह चुके हैं और कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य भी रहे हैं. उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राज्यहित में डॉ. होता को समर्थन देकर राज्यसभा भेजा जाए. बीजद सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों की घोषणा से पहले पटनायक ने सभी विधायकों को अपने आवास पर बुलाकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की. इसे क्रॉस-वोटिंग रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

रणनीतिक दबाव

बीजद द्वारा दो उम्मीदवार उतारने से भाजपा की रणनीति पर असर पड़ा है. भाजपा तीन सीटें जीतने की उम्मीद कर रही थी और एक सीट बीजद के लिए छोड़ने की चर्चा थी. हालांकि भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. पार्टी का कहना है कि संसदीय बोर्ड इस पर अंतिम फैसला करेगा, जिसमें यह भी तय होगा कि ‘कॉमन कैंडिडेट’ का समर्थन किया जाए या तीसरा उम्मीदवार उतारा जाए. अगर भाजपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है, तो मुकाबला कड़ा और टकरावपूर्ण हो सकता है. ओडिशा में पिछली बार फरवरी 2014 में राज्यसभा के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिला था, जब कांग्रेस उम्मीदवार रंजीब बिस्वाल ने चौथी सीट जीती थी.

कांग्रेस का समर्थन, नए समीकरण के संकेत

राज्य में 24 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद बीजद अब विपक्ष में है. ऐसे में कांग्रेस और बीजद के बीच नई राजनीतिक समझ की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है. ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्ता चरण दास ने दिल्ली में मीडिया से कहा कि राज्य के ‘बड़े हित’ को ध्यान में रखते हुए उनकी पार्टी डॉ. होता का समर्थन करेगी. दास ने बताया कि उन्होंने नवीन पटनायक से मुलाकात कर ‘कॉमन कैंडिडेट’ पर चर्चा की थी. उनका कहना था कि यदि कोई गैर-राजनीतिक और अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो कांग्रेस समर्थन देने को तैयार है. डॉ. होता से भी उनकी बातचीत हुई थी. हालांकि, बीजद नेताओं का कहना है कि इसे तुरंत किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन की दिशा में कदम नहीं माना जाना चाहिए. पार्टी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के समीकरणों पर अभी अटकलें लगाना जल्दबाजी होगी.

क्या बदलेगी ओडिशा की सियासी तस्‍वीर?

बीजद और कांग्रेस का यह सामरिक सहयोग भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है. हालांकि, भाजपा का संख्या बल मजबूत है, लेकिन चौथी सीट पर स्थिति पेचीदा हो सकती है. यदि भाजपा ‘कॉमन कैंडिडेट’ को समर्थन देती है, तो यह राज्यहित की राजनीति का संकेत होगा; लेकिन यदि तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो मुकाबला सीधे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल सकता है. ओडिशा में राज्यसभा चुनाव ने न सिर्फ चार सीटों का समीकरण बदला है, बल्कि संभावित नए राजनीतिक गठजोड़ और भविष्य की रणनीतियों की भी झलक दे दी है. अब निगाहें भाजपा के फैसले और 16 मार्च के मतदान परिणाम पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

March 02, 2026, 13:48 IST

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