PHOTOS: भारत का वो एयर डिफेंस सिस्‍टम, जो चीनी HQ-9B का है बाप, दुनिया भी मुरीद, पाकिस्‍तान देख चुका है जलवा

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भारत का वो एयर डिफेंस सिस्‍टम, जो चीनी HQ-9B का है बाप, पाक देख चुका है जलवा

Last Updated:March 03, 2026, 12:36 IST

Air Defence Systm: भारत अपने एयरस्‍पेस को अभेद्य किला बनाने की दिशा में मिशन मोड में काम कर रहा है. रूसी से एडवांस S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम खरीदा गया है. इसकी और यूनिट्स खरीदने की योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर चीन और पाकिस्‍तान को एक साथ माकूल जवाब दिया जा सके. चीन ने स्‍वदेशी तकनीक से वायु सुरक्षा प्रणाली विकसित की है. हालांकि, विगत कुछ महीनों में चीन का एयर डिफेंस सिस्‍टम पाकिस्‍तान से लेकर वेनेजुएला और अब ईरान तक में पूरी तरह से कबाड़ साबित हो चुका है.

चीन सब-स्‍टैंडर्ड डिफेंस इक्विपमेंट बेचकर अपनी साख को बढ़ाने की कोशिश में जुटा है. चीनी HQ-9B एयर डिफेंस सिस्‍टम की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने HQ-9B के रडार को जाम कर पाकिस्‍तान के कई एयरबेस और आतंकी ठिकानों को नेस्‍तनाबूद कर दिया था. इसके बाद वेनेजुएला और अब ईरान में भी चीनी एयर डिफेंस सिस्‍टम की नाकामी साबित हुई है. वेनेजुएला और ईरान में HQ-9B एंटी मिसाइल और एंटी फाइटर जेट सिस्‍टम दुश्‍मनों को इंटरसेप्‍ट करने में पूरी तरह से विफल रहा है. वहीं, भारत की प‍िचौरा, आकाश और S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम ने पाकिस्‍तान के सैकड़ों ड्रोन, मिसाइल और कई फाइटर जेट को इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह कर दिया. (फोटो: Reuters)

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तानी ड्रोन और मिसाइल्‍स को मार गिराने वाला पिचौरा एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम लंबे समय से इंडियन एयरफोर्स का साथ निभा रहा है. भारतीय वायुसेना की वायु रक्षा क्षमता में दशकों से अहम भूमिका निभा रही पिचौरा मिसाइल प्रणाली (एस-125 नेवा) आज भी प्रासंगिक बनी हुई है. सोवियत संघ द्वारा विकसित यह मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली 1970 के दशक से सेवा में है. NATO रिपोर्टिंग नाम ‘SA-3 गोवा’ से पहचानी जाने वाली यह प्रणाली कम और मध्यम ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे लक्ष्यों को मार गिराने के लिए डिजाइन की गई है. पिचौरा की मारक क्षमता लगभग 30 से 35.4 किलोमीटर तक है, जबकि यह 20 मीटर से 25 किलोमीटर की ऊंचाई तक के लक्ष्यों को भेद सकती है. यह सिस्‍टम एक साथ दो लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है और इसकी सफलता दर करीब 92 प्रतिशत बताई जाती है. 4R90 यातागन रडार से लैस यह सिस्टम भारी इलेक्ट्रॉनिक जामिंग की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से संचालन कर सकता है. (फाइल फोटो)

भारत के स्‍वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्‍टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं का लोहा मनवाया था. मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली Akash missile system भारतीय सेना और वायुसेना की वायु सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) द्वारा विकसित और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Limited) द्वारा निर्मित यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है. आकाश मिसाइल मैक 2.5 (तकरीबन 3000 KMPH) की सुपरसोनिक रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकती है. इसकी मारक क्षमता 4.5 किलोमीटर से 30 किलोमीटर तक है, जबकि उन्नत संस्करणों में यह 45 किलोमीटर तक पहुंचती है. यह प्रणाली 20 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर लक्ष्य साधने में सक्षम है. इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ चार लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. इसमें अत्याधुनिक 3D ‘राजेंद्र’ रडार और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर मेजर्स (ECM) से निपटने की क्षमता शामिल है. यह सिस्‍टम पूरी तरह मोबाइल है, जिससे इसे तेजी से किसी भी मोर्चे पर पहुंचाया जा सकता है. (फोटो: PTI)

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भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को नई मजबूती देते हुए आकाश प्राइम मिसाइल प्रणाली ने उच्च हिमालयी इलाकों में अपनी प्रभावशीलता साबित की है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) द्वारा विकसित यह उन्नत सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई और अत्यंत कम तापमान में भी प्रिसिजन ऑपरेशन करने में सक्षम है. आकाश प्राइम में स्वदेशी एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर लगाया गया है, जो अंतिम चरण में लक्ष्य को अधिक सटीकता से भेदने में मदद करता है. यह प्रणाली ड्रोन, फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए तैयार की गई है. इसकी मारक क्षमता लगभग 30 किलोमीटर तक है और यह मैक 2.5 से 3.5 (तकरीबन 4000 KMPH) की रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकती है. भारतीय सेना ने लद्दाख में 15,000 फीट की ऊंचाई पर इसके सफल परीक्षण किए, जिससे ठंडे और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में इसकी विश्वसनीयता प्रमाणित हुई. जुलाई 2025 में सफल परीक्षणों के बाद यह प्रणाली भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. (फोटो: PTI)

भारत की वायु रक्षा क्षमता को नई मजबूती देने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन आकाश यानी आकाश-NG मिसाइल प्रणाली को जल्द ही भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा. यह अत्याधुनिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) द्वारा विकसित की गई है. दिसंबर 2025 में सफल यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के बाद इसे पूर्ण रूप से शामिल करने की तैयारी है. आकाश-एनजी की मारक क्षमता 60 से 70 किलोमीटर तक है और यह मैक 2.5 की रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकती है. इसमें स्वदेशी एक्टिव आरएफ सीकर और ठोस ईंधन रॉकेट मोटर लगाया गया है, जिससे इसकी सटीकता और मारक क्षमता बढ़ी है. इसकी किल प्रॉबेबिलिटी लगभग 90 प्रतिशत बताई गई है, जो इसे तेज गति और कम रडार सिग्नेचर वाले लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी बनाती है. यह प्रणाली एस-400 जैसी अन्य वायु रक्षा प्रणालियों के साथ मिलकर देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करेगी. (फोटो: PTI)

चीन की लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली HQ-9B को आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है. इसे China Aerospace Science and Industry Corporation (CASIC) ने विकसित किया है. दावा है कि यह उन्नत सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बनाने में सक्षम है. HQ-9B की मारक क्षमता लगभग 250 से 300 किलोमीटर तक है, जबकि यह अधिकतम 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक लक्ष्य को भेद सकती है. मिसाइल की रफ्तार मैक 4.2 से अधिक (5000 KMPH से ज्‍यादा) बताई जाती है. इसमें एक्टिव रडार होमिंग के साथ पैसिव इंफ्रारेड सीकर भी लगाया गया है, जिससे यह स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने और रडार जैमिंग की स्थिति में भी प्रभावी बनी रहती है. इस प्रणाली में करीब 180 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगाया गया है. यह एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और 6 से 8 लक्ष्यों पर एक साथ हमला करने की क्षमता रखती है. हालांकि, HQ-9B को लेकर चीन का दावा सिर्फ कागजों पर ही है, क्‍योंकि पाकिस्‍तान से लेकर वेनेजुएला और ईरान तक में यह पूरी तरह से विफल रहा है. (फोटो: Reuters)

भारत अपने एयरस्‍पेस को अभेद्य किला बनाने के लिए रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की पांच यूनिट खरीदी है. कुछ यूनिट्स की सप्‍लाई हो चुकी है, जबकि बाकियों की इस साल के अंत तक आपूर्ति होने की संभावना है. एस-400 सिस्‍टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान को गहरा जख्‍म दिया है. (फोटो: Reuters)

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First Published :

March 03, 2026, 12:36 IST

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