Last Updated:January 15, 2026, 14:11 IST
IIT से पासआउट स्टूडेंट्स दुनियाभर में राज करते हैं. खान सर की मानें तो आईआईटी की असली ताकत वहां की पढ़ाई नहीं, बल्कि JEE परीक्षा का वह 'फिल्टर' है जो केवल सबसे मजबूत खिलाड़ियों को ही अंदर जाने देता है. जानें आईआईटी की सफलता का असली गणित.
Why IITs are Best Colleges: दुनिया की टॉप टेक कंपनियां भी आईआईटी को बेस्ट कॉलेज मानती हैंनई दिल्ली (Why IITs are Best Colleges). क्या आपने कभी सोचा है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एपल जैसी टॉप टेक कंपनियां भारत के IITians के पीछे क्यों पड़ी रहती हैं? आखिर ऐसा क्या है जो आईआईटी के छात्र को करोड़ों का पैकेज दिला देता है, जबकि उसी उम्र के दूसरे छात्र धक्के खा रहे होते हैं? इस पहेली को सुलझाया है देश के सबसे चहेते शिक्षक खान सर (Khan Sir) ने. अपने बेबाक अंदाज में खान सर ने एक ऐसा कड़वा लेकिन दिलचस्प सच बताया है, जिसे सुनकर शायद आपको यकीन न हो.
खान सर के मुताबिक, आईआईटी की महानता वहां की मोटी-मोटी किताबों या आलीशान कैंपस में नहीं, बल्कि उस ‘खौफनाक फिल्टर’ में छिपी है जिससे गुजरकर एक छात्र वहां पहुंचता है. खान सर का दावा है कि IIT केवल एक कॉलेज नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा फिल्टर है, जो लाखों की भीड़ में से केवल उन्हें चुनता है जो लोहे को चबाने का दम रखते हैं. लोग समझते हैं कि IIT में जाकर कोई जीनियस बनता है, लेकिन खान सर कहते हैं कि वहां केवल वही पहुंचता है जो पहले से ही ‘तपा हुआ सोना’ हो.
आईआईटी बेस्ट कॉलेज क्यों है?
खान सर की नजर में आईआईटी का असली खेल वहां की लैब में नहीं, बल्कि जेईई एडवांस्ड की उस दहलीज पर शुरू होता है, जहां 99% लोग हार मान लेते हैं. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि IIT के टैग में ऐसी कौन सी ‘जादुई शक्ति’ है जो रातों-रात किस्मत बदल देती है, तो खान सर का यह एनालिसिस आपकी आंखें खोल देगा.
प्रतिभा को तराशने की भट्टी है आईआईटी
खान सर के अनुसार, आईआईटी की असली ताकत वहां का सिलेबस नहीं, बल्कि वहां की एडमिशन प्रक्रिया है. लाखों अभ्यर्थियों में से महज कुछ हजार का चयन सुनिश्चित करता है कि संस्थान के पास देश का सबसे श्रेष्ठ दिमाग है. खान सर कहते हैं- आईआईटी में जाने वाला स्टूडेंट पहले से ही मानसिक रूप से इतना तैयार होता है कि वहां की पढ़ाई उसके लिए बस एक औपचारिकता रह जाती है. इसलिए यह मत सोचिए कि वहां से पढ़कर ही भविष्य बन सकता है.
पीयर प्रेशर का पॉजिटिव प्रभाव
जब आप एक ऐसे कमरे में बैठे हों, जहां हर दूसरा व्यक्ति कल का ‘सुंदर पिचाई’ बनने का दम रखता हो, तो आपकी सोच का स्तर अपने आप ऊपर उठ जाता है. मशहूर कोचिंग संचालक खान सर का तर्क है कि IIT का वातावरण छात्रों को ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने के लिए मजबूर करता है, उनकी यही खासियत उन्हें साधारण कॉलेजों के स्टूडेंट्स से मीलों आगे ले जाती है. उनके प्रोफेसर उन्हें क्या पढ़ाते हैं, उससे ज्यादा यह मायने रखता है कि उनकी संगति कैसी है.
IITians विदेशी कंपनियों की पहली पसंद क्यों?
दुनिया की टॉप टेक कंपनियां जानती हैं कि एक IITian ने दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा को पार किया है. इसका मतलब है कि उसके पास दबाव झेलने की अद्भुत क्षमता है. खान सर के मुताबिक, कंपनियां स्किल बाद में देखती हैं, पहले उस छात्र का अनुशासन और धैर्य देखती हैं जो उसने JEE की तैयारी के दौरान कमाया है. उसकी यही पूंजी आगे जाकर काम आती है. इसका साफ मतलब है कि आईआईटी की डिग्री नहीं, बल्कि आपका वहां तक पहुंचना असर डालता है.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें
First Published :
January 15, 2026, 14:11 IST

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