Last Updated:February 26, 2026, 11:58 IST
US-Iran War News: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है, बातचीत का तीसरा दौर चलने वाला है. अमेरिका हर राउंड के साथ अपने लड़ाकू विमानों की संख्या थोड़ी और बढ़ा देता है. इस बार तो इजरायल और जॉर्डन के रास्ते उसने ईरान को घेर लिया है. बावजूद इसके रिपोर्ट्स कह रही हैं कि वो चाहता है कि इजरायल, ईरान पर पहला हमला करे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ वरिष्ठ सलाहकार चाहते हैं कि अगर ईरान पर हमला करना हो तो पहले इजरायल हमला करे, उसके बाद अमेरिका कदम उठाए. यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है. प्रशासन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अगर इजरायल पहले हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा. इससे अमेरिकी जनता के बीच ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए समर्थन बढ़ सकता है. ये भी सोचा जा रहा है कि अगर इजरायल पहले और अकेले हमला करे और ईरान उसके जवाब में अमेरिका को निशाना बनाए, तो कार्रवाई करने के कारण भी ज्यादा होंगे.
वैसे इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता क्योंकि इजरायल में बुधवार को 12 एफ-22 विमानों के लैंड होने की खबर आई थी. सोर्सेज ये भी कह रहे हैं कि अमेरिका- इजरायल मिलकर संयुक्त सैन्य अभियान भी चला सकते हैं, चाहे इजरायल पहले हमला करे या नहीं. पॉलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई कितनी बड़ी होगी, यह अभी साफ नहीं है लेकिन अगर अमेरिका के हथियारों का भंडार कम होता है तो चीन भी ताइवान पर हमला करने की कोशिश कर सकता है.
अमेरिकी जनरल डैन केन के माथे पर शिकन क्यों?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्प तैयार तो कर रहे हैं लेकिन वे चिंतित भी हैं. हालांकि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधे टकराव से बचते हुए संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक जनरल केन ने सेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं. पेंटागन की आंतरिक चर्चाओं में उन्होंने ईरान पर बड़े हमले की स्थिति में उसके पैमाने, जटिलता और अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की आशंका पर चिंता जताई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मध्य पूर्व में अमेरिका ने इराक युद्ध के बाद अब तक का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा किया है. इसी बीच अमेरिका और ईरान जिनेवा में परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की मानें तो अमेरिका ने पहली बार एफ-22 लड़ाकू विमान इजरायल भेजे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ जाती है. इन विमानों का मकसद संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई से इजरायल और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों की रक्षा करना है. दूसरी ओर अमेरिकी सांसदों ने ईरान में मानवाधिकार मुद्दों को लेकर एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य इंटरनेट स्वतंत्रता बढ़ाना और मानवाधिकार उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करना है. फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और अंतिम सैन्य निर्णय अभी नहीं लिया गया है.ईरान को हल्के में न ले अमेरिका
एक सूत्र ने चेतावनी दी कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन जैसे बड़े स्तर का हमला किया जाता है, तो ईरान पूरी ताकत से जवाब दे सकता है. मध्य पूर्व में अमेरिका की कई सैन्य संपत्तियां मौजूद हैं और वे सभी संभावित निशाने बन सकती हैं. कई रिपोर्ट्स ने कहा गया कि अमेरिका के ये ठिकाने इजरायल की आयरन डोम जैसी सुरक्षा प्रणाली से सुरक्षित नहीं हैं, इसलिए अमेरिकी सैनिकों के मरने का खतरा ज्यादा है. ऐसी स्थिति में सैन्य नुकसान तो होगा ही होगा अमेरिका के अंदर राजनीतिक जोखिम भी बढ़ सकता है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर...और पढ़ें
First Published :
February 26, 2026, 11:58 IST

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