DNA: तालिबान का 'गंदा-कानून', इंसान को बनाया जाएगा गुलाम, जीनी पड़ेगी नरक जैसी जिंदगी

1 hour ago

डॉनल्ड ट्रंप अपने विरोधियों को अमेरिकी नीति का गुलाम बनाना चाहते हैं तो अमेरिका से हजारों मील दूर अफगानिस्तान में इंसानों को गुलाम बनाने का नया कानून आया है. यानी तालिबान..अपने मुल्क में जिसे मर्जी, उसे गुलाम घोषित कर सकता है. और उसके बाद उस शख्स को गुलाम बनकर ही जीना होगा. इसके लिए बकायदा कानून पारित किया गया है.

गुलामी से जुड़े तालिबान के इस अंधे कानून पर हमारे इस विश्लेषण को समझने के लिए आपको सबसे पहले अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का एक कथन ध्यान से समझना चाहिए. अब्राहम लिंकन कहते थे कि जो लोग गुलाम रखते हैं उनकी जिंदगी पर हमेशा गुलामों के आंसुओं और निर्दोषों के खून के छींटे पड़े रहते हैं.

अब दोबारा गुलाम बनाए जाएंगे इंसान

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ग्यारह हजार साल तक इंसान ही इंसान को गुलाम बनाता रहा था. 5 साल तक गुलामी की प्रथा की वजह से ही अमेरिका में गृहयुद्ध चला था. बीसवीं सदी आते आते गुलामी की इस कुप्रथा पर पूर्ण विराम लगाया जा सका लेकिन तालिबान ने दोबारा इंसानों को गुलाम बनाने के गुनाह को अंजाम दिया है.  

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— Zee News (@ZeeNews) January 27, 2026

तालिबान ने इस्लामिक अमीरात के लिए नया पीनल कोड यानी कानूनों का सिस्टम बनाया है. इस पीनल कोड में साफ-साफ कहा गया है कि बदर यानी मालिक को अपने गुलामों को सजा देने की इजाजत होगी यानी मालिक जिस तरह चाहे उस तरीके से अपने गुलाम को सजा दे सकता है. 

गुलाम नहीं कर पाएगा मालिक पर केस

तालिबान के पीनल कोड में ये भी लिखा गया है कि मालिक सजा का हकदार उसी हालत में होगा जब गुलाम की हड्डी टूट जाए या फिर उसकी चमड़ी यानी खाल शरीर से अलग हो जाए. गुलाम को अपने मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस करने की भी इजाजत नहीं दी गई है. इस कोड में ये भी बताया गया है कि अब समाज में चार वर्ग होंगे. सबसे ऊपर मुल्ला यानी धार्मिक नेता को रखा गया है और गुलाम को सबसे नीचे के वर्ग में रखा गया है.

फैसले के खिलाफ लामबंद दुनिया

अफगान तालिबान ने दोबारा सत्ता हासिल करते ही सबसे पहले लड़कियों से शिक्षा का अधिकार छीना था. तालिबान के इस फैसले के खिलाफ दुनिया भर में आज भी आवाजें उठ रही हैं लेकिन अब गुलाम प्रथा को इजाजत देकर तालिबान ने बता दिया है कि आधुनिक दुनिया के मानवाधिकारों का तालिबान की नजरों में कोई वजूद नहीं रह गया है. अगर अफगान समाज को देखा जाए तो ताकत के जोर पर कब्जाए गए लोगों या फिर बंधुआ मजदूरों को गुलाम बनाने का सिलसिला अब शुरू हो जाएगा लेकिन एक और ऐसी वजह है जो तालिबान के इस नए कानून पर सवाल खड़ा करता है.  ये वजह है बच्चाबाजी और सवाल है क्या इस पीनल कोड के जरिए तालिबान ने बच्चाबाजी को कानूनी मान्यता दे दी है.

बच्चाबाजी प्रथा आज भी अफगानिस्तान में जिंदा

बच्चाबाजी एक ऐसी कुरीति है जो आज भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जिंदा है. इतिहास के मुताबिक 10वीं सदी में अफगान समाज में बच्चाबाजी की शुरुआत हुई थी. इस कुरीति में गरीब परिवारों से छोटी उम्र के लड़कों को खरीदा या फिर छीन लिया जाता है. इन बच्चों की परवरिश एक लड़की की तरह की जाती है. यानी इन्हें लड़कियों जैसे कपड़े पहनाए जाते है. इन लड़कों को नाचना और गाना भी सिखाया जाता था. 

थोड़ा बड़े होने पर इन लड़कों का शारीरिक शोषण शुरू हो जाता है. 19वीं सदी से अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बच्चाबाजी सामाजिक रसूख का प्रतीक बनी हुई है. इसी वजह से ये शक जाहिर किया जा रहा है कि अब ऐसे पीड़ित लड़कों को गुलाम का नाम दे दिया जाएगा और बच्चाबाजी को कानूनी मान्यता मिल जाएगा.

भारत में भी रही गुलामी की प्रथा

जब तालिबान की पहली सरकार गिर गई थी तब भी अफगानिस्तान में बच्चाबाजी नाम की इस कुप्रथा का चलन कम नहीं हुआ था.आज तो तालिबान के पास ज्यादा मजबूत सरकार है. इसी वजह से अफगान समाज में बच्चाबाजी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. सदियों तक गुलामी नाम की ये कुरीति दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्रचलित रही है. हमारा भारत भी गुलामी की इस घृणित प्रथा का गवाह बना है. अब हम आपको भारत में गुलामी की प्रथा से जुड़ा एक अध्याय बताने जा रहे हैं .

आमतौर पर हमारे इतिहास में मुगल बादशाह शाहजहां को ताजमहल बनाने और कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए याद किया जाता है. इसी मुगल बादशाह को   इतिहासकार K S LAL ने अपनी किताब MUSLIM SLAVE SYSTEM IN MEDIVIAL INDIA में गुलामी प्रथा से जुड़ा बताया है.

शाहजहां की फौज ने किया था कैद

अपनी किताब में K S LAL लिखते हैं. हुगली की लड़ाई के बाद शाहजहां की फौज ने 4 हजार पुर्तगालियों और उनके साथ काम करने वाले लोगों को कैद कर लिया था. इन कैदियों को शाहजहां ने गुलामों के तौर पर बेचा . किताब में ये भी लिखा है कि 100 हिंदू गुलामों को शाहजहां ने बतौर तोहफा बुखारा के सुल्तान को दे दिया था.

इतिहास में जो हुआ उसे बदला नहीं जा सकता लेकिन जो तालिबान कर रहा है वो पहले से तबाह हो चुके अफगानिस्तान के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है.

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