9.34 रुपये के बकाया पर बुलावा, किसान ने 10 रुपये देकर मांगी 66 पैसे की वापसी

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9.34 रुपये के बकाया पर बुलावा, किसान ने 10 रुपये देकर मांगी 66 पैसे की वापसी

Last Updated:February 28, 2026, 15:58 IST

50,000 रुपये का कर्ज चुकाने के बाद कर्नाटक के एक किसान को लगा कि उसका हिसाब खत्म हो गया. लेकिन बैंक से फिर कॉल आया, वजह थी सिर्फ 9.34 का बकाया. किसान ने 10 रुपये जमा किए और बदले में 66 पैसे मांगे. छोटी रकम पर हुआ यह वाकया अब बड़ी चर्चा का विषय बन गया है.

9.34 रुपये के बकाया पर बुलावा, किसान ने 10 रुपये देकर मांगी 66 पैसे की वापसीZoom

₹50,000 का कर्ज चुकाया, फिर भी 66 पैसे पर अटका मामला, किसान ने बैंक से पूछा सवाल. (Image:AI)

नई दिल्ली. कर्नाटक में एक किसान का बैंक के साथ हुआ छोटा सा वाकया अब चर्चा का विषय बन गया है. किसान ने 50,000 रुपये का लोन पूरी तरह चुका दिया था. लेकिन कुछ महीनों बाद उसे फिर बैंक से फोन आया. कारण था सिर्फ 9.34 रुपये का बकाया.

पूरा कर्ज चुकाने के बाद भी आया कॉल
यह मामला कर्नाटक का है, जहां एक किसान ने केनरा बैंक से लिया गया 50,000 रुपये का कर्ज समय पर चुका दिया था. किसान को लगा कि अब उसका खाता पूरी तरह साफ हो चुका है. लेकिन कुछ समय बाद बैंक से फोन आया कि उसके खाते में 9.34 रुपये की राशि बाकी है. बैंक ने उससे यह छोटी सी रकम जमा करने को कहा. किसान बैंक पहुंचा और उसने 10 रुपये जमा कर दिए, ताकि बकाया पूरी तरह खत्म हो जाए.

66 पैसे की मांग ने खींचा ध्यान
10 रुपये जमा करने के बाद किसान ने बैंक से कहा कि अब उसके 66 पैसे वापस किए जाएं. उसने तर्क दिया कि जब बैंक उससे हर पैसे का हिसाब मांगता है, तो ग्राहक भी अपने पैसों का पूरा हिसाब क्यों न मांगे? यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए. आमतौर पर इतनी छोटी रकम को नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन किसान ने सिद्धांत की बात उठाई.

छोटे पैसे, बड़ा संदेश
यह घटना सिर्फ 66 पैसे की नहीं, बल्कि व्यवस्था और पारदर्शिता की है. किसान का कहना था कि अगर बैंक ब्याज और बकाया में पैसे-पैसे का हिसाब रखता है, तो ग्राहकों को भी उतनी ही गंभीरता से देखा जाना चाहिए. यह मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. कई लोग इसे आत्मसम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे नियमों के पालन का उदाहरण बता रहे हैं.

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या छोटी रकम को नजरअंदाज करना सही है या हर लेन-देन में पूरी पारदर्शिता जरूरी है. किसान की यह छोटी सी पहल बैंकिंग व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल छोड़ गई है.

About the Author

Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

February 28, 2026, 15:58 IST

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