Last Updated:February 28, 2026, 14:14 IST
रिटायरमेंट के करीब पहुंचकर बिना बचत होना चिंता की बात हो सकती है. सिर्फ सोशल सिक्योरिटी पर निर्भर रहना हमेशा पर्याप्त नहीं होता. लेकिन देर हो जाने के बाद भी हालात सुधारे जा सकते हैं. सही रणनीति और छोटे कदम भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं.

नई दिल्ली. कई लोगों को लगता है कि 55 साल के बाद ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से सुरक्षित होते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लोग रिटायरमेंट के करीब पहुंचकर भी बचत नहीं कर पाते. ऐसे लोगों का सिर्फ सोशल सिक्योरिटी पर निर्भर रहना लंबे समय में पर्याप्त नहीं होता. विशेषज्ञ मानते हैं कि देर से सही, लेकिन सही फैसले अभी भी हालात बदल सकते हैं.
सबसे पहले बदलें सोच और स्वीकारें हकीकत
वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक पहला कदम है खुद को दोष देना बंद करना. पुराने गलत फैसलों पर पछताने से बेहतर है वर्तमान पर ध्यान देना. अपनी पूरी वित्तीय स्थिति का ईमानदारी से आकलन करें- कितनी आय है, कितना खर्च है, कोई कर्ज है या नहीं. सोशल सिक्योरिटी से मिलने वाली राशि, पार्ट-टाइम काम से आय और मासिक खर्च का स्पष्ट हिसाब बनाएं. जब तस्वीर साफ होगी, तभी सही निर्णय संभव है. छोटे-छोटे मासिक लक्ष्य तय करें, जैसे कुछ सौ या हजार रुपये की बचत या अनावश्यक खर्च में कटौती.
पार्ट-टाइम काम और अतिरिक्त आय के विकल्प
अगर पूरी तरह रिटायर हो चुके हैं, तब भी हल्का-फुल्का काम या फ्रीलांसिंग मददगार हो सकती है. अपने कौशल या रुचि के अनुसार काम चुनने से मानसिक सक्रियता भी बनी रहती है और अतिरिक्त आय भी मिलती है. यह आय कर्ज चुकाने, रोजमर्रा के खर्च पूरे करने या छोटी बचत बनाने में काम आ सकती है. कमाई का हर अतिरिक्त स्रोत भविष्य की अनिश्चितता को कम करता है.
खर्चों पर नियंत्रण और घर से आय के अवसर
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर खाने, मनोरंजन और शौक जैसे खर्चों में कटौती की जा सकती है. यदि घर बड़ा है और खर्च ज्यादा है, तो छोटा घर लेने या अतिरिक्त कमरा किराये पर देने जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं. कुछ लोग रिवर्स मॉर्गेज का सहारा लेकर भी आय बना सकते हैं, हालांकि यह फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए. एन्युटी जैसे विकल्प नियमित आय दे सकते हैं, लेकिन इनके लिए योजना जरूरी है.
पेशेवर सलाह और छोटे कदमों की ताकत
अगर संभव हो तो किसी वित्तीय सलाहकार से मार्गदर्शन लेना फायदेमंद हो सकता है. पेशेवर सलाह आपकी जोखिम क्षमता और जरूरतों के अनुसार योजना बनाने में मदद करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र चाहे जो भी हो, छोटे और समझदारी भरे कदम बड़ा फर्क ला सकते हैं. बिना बचत के रिटायरमेंट डरावना लग सकता है, लेकिन सही सोच, अनुशासन और थोड़ी अतिरिक्त मेहनत से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
February 28, 2026, 14:14 IST

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