सिर्फ 15 मिनट का छोटा सा काम.. बच्चा खुद कहेगा- बुक ला दो, Please

3 weeks ago

Last Updated:August 08, 2025, 09:50 IST

UNICEF Parenting Tips: डिजिटल युग में बच्चों की किताबों से दोस्ती करवा पाना आसान नहीं है. इसके लिए पेरेंट्स को भी किताबें पढ़ने की आदत डालनी होगी. इस मसले पर जानिए यूनिसेफ की सलाह.

सिर्फ 15 मिनट का छोटा सा काम.. बच्चा खुद कहेगा- बुक ला दो, PleaseParenting Tips: बच्चे में कम उम्र से रीडिंग हैबिट विकसित करना जरूरी है

नई दिल्ली (UNICEF Parenting Tips). आज-कल बच्चे कम उम्र से ही मोबाइल, टीवी और डिजिटल गैजेट्स की तरफ आकर्षित हो जाते हैं. इस स्थिति में बच्चे किताबों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. एकाग्रता में कमी के कारण वे कुछ ही देर में किताब से दूर हो जाते हैं. यूनिसेफ पेरेंटिंग टिप्स में माता-पिता और शिक्षकों के लिए खास सलाह दी गई है. इससे वे कम उम्र में ही बच्चों में रीडिंग हैबिट डेवलप कर सकते हैं. आज के दौर में बच्चों को किताबों से जोड़ना भी माता-पिता की जिम्मेदारी है. वे बच्चों को खेल-खेल में किताबों से जोड़ सकते हैं.

3 से 5 साल की उम्र बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास का सुनहरा समय है. इस दौरान उनकी इमैजिनेशन पावर, भाषा कौशल और सीखने की क्षमता तेजी से बढ़ती है. यूनिसेफ पेरेंटिंग टिप्स के मुताबिक, पढ़ने की आदत सिर्फ ज्ञान ही नहीं बढ़ाती, बल्कि बच्चों की शब्दावली, सोचने की क्षमता, ध्यान केंद्रित करने की शक्ति और सामाजिक समझ को भी मजबूत करती है. रिसर्च बताती है कि जिन बच्चों में कम उम्र से रीडिंग हैबिट डेवलप की जाती है, वे आगे चलकर बेहतर एकेडमिक परफॉर्मेंस और क्रिएटिविटी दिखाते हैं.

बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत कैसे डालें?

अगर आप 3-5 साल के बच्चे में रीडिंग हैबिट विकसित करना चाहते हैं तो उसे खेल की तरह यह बात समझानी होगी. किताबों को बच्चों के लिए ‘टास्क’ की तरह नहीं, बल्कि ‘फन एक्टिविटी’ के रूप में पेश करें. रंग-बिरंगी, चित्रों से भरी और उनकी रुचि के हिसाब से कहानियों वाली किताबें इस आदत को शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका हो सकती हैं.

1. सही माहौल तैयार करें

बच्चों में रीडिंग हैबिट लाने के लिए घर में ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जहां किताबें आसानी से उपलब्ध हों और पढ़ने का मोटिवेशन मिले.

टिप्स और ट्रिक्स:

रंग-बिरंगी किताबें चुनें: इस उम्र के बच्चों को विजुअल्स ज्यादा आकर्षित करते हैं, इसलिए बड़ी तस्वीरों और कम टेक्स्ट वाली किताबें दें. रीडिंग कॉर्नर बनाएं: घर में एक छोटा सा रीडिंग स्पेस बनाएं, जिसमें कुशन, छोटी टेबल और बुक शेल्फ हो. इससे उन्हें वह कोजी स्पेस लगने लगेगा. दैनिक रूटीन में शामिल करें: सोने से पहले 10-15 मिनट स्टोरी टाइम रखें. एक्टिंग और वॉयस टोन का इस्तेमाल करें: कहानियां पढ़ते समय बच्चे को एंगेज रखने के लिए अलग-अलग कैरेक्टर की आवाज बनाएं. पेरेंट्स भी पढ़ें: बच्चे वही करते हैं जो वे देखते हैं, इसलिए खुद पढ़ने की आदत दिखाएं. इंटरएक्टिव किताबें दें: पॉप-अप बुक्स, फ्लैप बुक्स या साउंड बुक्स बच्चों को ज्यादा मजेदार लगती हैं. कहानी को सवाल-जवाब में बदलें: पढ़ने के बाद बच्चे से पूछें कि कहानी में क्या हुआ, कौन सा कैरेक्टर अच्छा लगा और क्यों. लाइब्रेरी विजिट करवाएं: महीने में एक बार बच्चे को बच्चों की लाइब्रेरी लेकर जाएं. इससे उन्हें नए टाइटल्स और माहौल का अनुभव मिलेगा.

Deepali Porwal

Having an experience of 9 years, she loves to write on anything and everything related to lifestyle, entertainment and career. Currently, she is covering wide topics related to Education & Career but she also h...और पढ़ें

Having an experience of 9 years, she loves to write on anything and everything related to lifestyle, entertainment and career. Currently, she is covering wide topics related to Education & Career but she also h...

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First Published :

August 08, 2025, 09:50 IST

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