Last Updated:January 05, 2026, 13:47 IST
Red Fort Blast 2025 inside story: लाल किले के पास पिछले साल हुए भीषण धमाके की जांच में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हुए हैं. जांच अधिकारियों ने दावा किया है कि इस 'सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल के पीछे पढ़े-लिखे चिकित्सकों का हाथ था, जो घोस्ट सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए सीधे पाकिस्तान से निर्देश ले रहे थे. मृतक डॉ. उमर सहित हर आरोपी के पास मिले कई मोबाइल फोन ने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है. जानिए इस डिजिटल आतंकी नेटवर्क की पूरी इनसाइड स्टोरी.
दिल्ली बम ब्लास्ट पर बड़ा खुलासा हुआ है.नई दिल्ली. पिछले साल 10 नवंबर को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण कार धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. अब इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने एक ऐसी सच्चाई उजागर की है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. जांच में पता चला है कि इस आतंकी साजिश के पीछे कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल था, जिसमें उच्च शिक्षित डॉक्टर शामिल थे. एनआईए की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. एनआईए और दिल्ली पुलिस ने इस ब्लास्ट के 9 साजिशकर्ताओं को अबतक गिरफ्तार किया है. एनआईए सभी आरोपियों से पूछताछ कर पूरी साजिश का खुलासा करने की कोशिश कर रही है.
बता दें कि लालकिला के पास 10 नवंबर को आई20 कार में ब्लास्ट हुआ था. ये कार आमिर रशीद अली के नाम पर थी. इस ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हुई थी और 32 लोग घायल हो गए थे. इस ब्लास्ट में कुछ सफेदपोश डॉक्टरों ने ने भारतीय सुरक्षा घेरे को भेदने के लिए ‘घोस्ट सिम कार्ड’ और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का एक जटिल डिजिटल जाल बुन रखा था. रविवार को जांच से जुड़े अधिकारियों ने घोस्ट सिम कार्ड को लेकर जो खुलासे किए हैं, उसके बाद भारत सरकार ने सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए नियम बदल दिए हैं.
लाल ब्लास्ट पर बड़ा खुलासा
डिजिटल नेटवर्क और ‘घोस्ट सिम’ का खुलासा जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि इस आतंकी मॉड्यूल के सदस्य पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में रहने के लिए बेहद शातिर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे. उन्होंने ‘घोस्ट सिम कार्ड्स’ का उपयोग किया, जो दरअसल उन मासूम आम नागरिकों के आधार कार्ड और पहचान पत्रों पर जारी कराए गए थे, जिन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी. इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल केवल इंटरनेट डेटा और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल को एक्टिवेट करने के लिए किया जाता था. एक बार ऐप एक्टिवेट होने के बाद, ये आतंकी बिना सिम कार्ड के भी वाई-फाई या अन्य डेटा नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान से निर्देश लेते रहते थे.
10 नवंबर 2025 की वह शाम
10 नवंबर 2025 की उस शाम को लाल किले के पास जिस हुंडई i20 कार में धमाका हुआ था, उसे डॉ. उमर नबी चला रहा था. वह फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था और खुद भी धमाके में मारा गया था. जांच में पता चला है कि डॉ. उमर सहित इस मॉड्यूल के हर आरोपी के पास कम से कम दो से तीन मोबाइल फोन थे.
डॉ. उमर और ‘डुअल-फोन’ प्रोटोकॉल
अधिकारियों ने इसे ‘डुअल-फोन प्रोटोकॉल’ नाम दिया है. उनके पास एक ‘क्लीन फोन’ होता था, जो उनके अपने नाम पर पंजीकृत था और जिसका इस्तेमाल वे अपने परिवार और पेशेवर काम के लिए करते थे ताकि किसी को शक न हो. वहीं, दूसरा ‘टेरर फोन’ होता था, जिसमें घोस्ट सिम लगा होता था. इस फोन का इस्तेमाल केवल पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स, जिन्हें ‘उकासा’, ‘फैजान’ और ‘हाशमी’ जैसे कोड नामों से जाना जाता था, से बात करने के लिए किया जाता था.
हैंडलर्स का रिमोट कंट्रोल और ट्रेनिंग
हैंडलर्स का रिमोट कंट्रोल और ट्रेनिंग जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. सुरक्षा एजेंसियों ने नोट किया कि ये ‘घोस्ट सिम’ तब भी एक्टिव रहते थे जब डिवाइस पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से ऑपरेट की जा रही थी. ऐप्स की इस खूबी का फायदा उठाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स इन डॉक्टरों को रिमोटली गाइड कर रहे थे. उन्हें यूट्यूब वीडियो और एन्क्रिप्टेड फाइल्स के जरिए आईईडी (IED) असेंबली सिखाई गई थी. हालांकि, ये पढ़े-लिखे युवक शुरुआत में सीरिया या अफगानिस्तान जाकर लड़ना चाहते थे, लेकिन उनके आकाओं ने उन्हें भारत के भीतर ही ‘सफेदपोश’ रहकर धमाके करने के लिए तैयार किया.
एनआईए की अब तक की जांच
अब तक की जांच और फरीदाबाद कनेक्शन इस मामले की शुरुआत अक्टूबर 2025 में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिलने से हुई थी. इसके बाद जांच की कड़ियां जुड़ती गईं और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक पहुँचीं. वहां से पुलिस ने मुजम्मिल गनई और अदील राथर जैसे डॉक्टरों को गिरफ्तार किया. इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक, लगभग 2900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और अन्य रसायनों की बरामदगी हुई थी. 10 नवंबर को जब डॉ. उमर कार लेकर लाल किले की ओर निकला, तो माना जाता है कि वह पुलिस की छापेमारी से घबरा गया था और उसने जल्दबाजी में धमाका कर दिया, जिसमें 15 बेगुनाह लोगों की जान चली गई.
सरकार और दूरसंचार विभाग का सख्त कदम इस मामले में उजागर हुई खामियों को देखते हुए भारत सरकार ने दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत सख्त निर्देश जारी किए हैं. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने अब आदेश दिया है कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे ऐप्स को डिवाइस में सक्रिय रहने के लिए एक चालू फिजिकल सिम कार्ड की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होगी. यदि सिम कार्ड निष्क्रिय पाया जाता है, तो ऐप अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा. यह कदम उन ‘डिजिटल स्लीपर सेल्स’ को खत्म करने के लिए उठाया गया है जो ‘घोस्ट सिम’ के सहारे आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं.
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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें
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First Published :
January 05, 2026, 13:47 IST

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